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23 साल से फरार मोनिका कपूर अमेरिका में गिरफ्तार, CBI ला रही भारत – जानिए पूरा मामला

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AIN NEWS 1 | CBI की एक बड़ी कार्रवाई में 23 साल से फरार चल रही मोनिका कपूर को अमेरिका में गिरफ्तार कर लिया गया है। अब उसे भारत लाया जा रहा है, जहां वह कानून का सामना करेगी।

मोनिका कपूर, जो एक समय Monika Overseas की मालिक थीं, 2002 के एक बड़े इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट फ्रॉड केस में मुख्य आरोपी हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने अपने भाइयों राजन खन्ना और राजीव खन्ना के साथ मिलकर नकली डॉक्युमेंट्स जैसे शिपिंग बिल्स, इनवॉयस और बैंक सर्टिफिकेट्स तैयार किए। इन जाली दस्तावेजों के दम पर उन्होंने 1998 में छह Replenishment Licenses हासिल किए और 2.36 करोड़ रुपये का ड्यूटी-फ्री सोना मंगवाया।

इसके बाद इन लाइसेंस को अहमदाबाद की एक कंपनी Deep Exports को बेच दिया गया, जिन्होंने इनका इस्तेमाल कर गोल्ड इम्पोर्ट किया। इस पूरे फ्रॉड से सरकार को करीब 1.44 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

CBI जांच और कोर्ट की कार्यवाही

CBI की गहन जांच के बाद 31 मार्च 2004 को मोनिका कपूर और उनके भाइयों के खिलाफ IPC की कई गंभीर धाराओं (120-B, 420, 467, 468, 471) में चार्जशीट दाखिल की गई। दिल्ली की साकेत कोर्ट ने 20 दिसंबर 2017 को राजन और राजीव को दोषी करार दे दिया, लेकिन मोनिका कपूर उस समय तक फरार थी।

13 फरवरी 2006 को कोर्ट ने उसे Proclaimed Offender घोषित कर दिया और 2010 में उसके खिलाफ Red Corner Notice जारी किया गया।

अमेरिका से प्रत्यर्पण की लंबी प्रक्रिया

CBI ने 2010 में अमेरिका से मोनिका कपूर के प्रत्यर्पण की मांग की थी। कई वर्षों की कानूनी प्रक्रिया और अमेरिकी एजेंसियों के साथ समन्वय के बाद आखिरकार 9 जुलाई 2025 को उसे हिरासत में लेकर भारत लाने में सफलता मिली।

CBI की एक टीम खुद अमेरिका गई और उसे भारत वापस लेकर आई। अब मोनिका कपूर को भारतीय अदालत में पेश किया जाएगा, जहां वह अपने ऊपर लगे धोखाधड़ी के गंभीर आरोपों का सामना करेगी।

Monika Kapoor, the prime accused in a 2002 import-export gold fraud involving over ₹2.36 crore, has been arrested in the United States after being on the run for 23 years. The Central Bureau of Investigation (CBI) successfully brought her back to India after years of legal procedures and cooperation with U.S. authorities. Monika, along with her brothers, forged export documents to illegally obtain duty-free gold licenses, causing a loss of ₹1.44 crore to the Indian government. Her arrest is seen as a significant win in India’s fight against financial crimes.

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