AIN NEWS 1 नजीबाबाद (बिजनौर): उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के नजीबाबाद में लाउडस्पीकर की आवाज को लेकर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। राजकीय इंटर कॉलेज (GIC) के पास स्थित ऐतिहासिक नजीबुद्दौला मस्जिद में निर्धारित ध्वनि मानकों से अधिक आवाज में लाउडस्पीकर बजाकर अजान देने के आरोप में मुअज्जिन मोहम्मद फैजान को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने संबंधित ध्वनि विस्तारक उपकरणों को भी अपने कब्जे में लिया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, आरोपी को एसडीएम अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे 14 दिनों के लिए जेल भेज दिया गया।
इस मामले में पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई ने क्षेत्र में निगरानी और नियमों के पालन में कथित लापरवाही के आरोप में बीट प्रभारी ललित कुमार को निलंबित कर दिया। घटना के बाद धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर के इस्तेमाल और ध्वनि प्रदूषण से जुड़े नियमों के पालन को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
समाधान दिवस के दौरान सामने आया मामला
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह घटना शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 की है। उस दिन नजीबाबाद में थाना समाधान दिवस के दौरान जिलाधिकारी उमेश प्रताप सिंह और पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई लोगों की शिकायतें सुनने तथा प्रशासनिक कार्यों के सिलसिले में क्षेत्र में मौजूद थे।
इसी दौरान नजीबाबाद के मोहल्ला मकबरा में स्थित नजीबुद्दौला मस्जिद से लाउडस्पीकर पर अजान की आवाज सुनाई दी। बताया गया कि आवाज सड़क तक सुनाई दे रही थी। इसके बाद अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस को मौके पर जांच करने के निर्देश दिए।
टीवी9 भारतवर्ष और अमर उजाला की रिपोर्टों में इस घटना का जिक्र किया गया है। पुलिस की कार्रवाई का आधार लाउडस्पीकर से निकलने वाली आवाज का निर्धारित मानकों से अधिक होना बताया गया है।
पुलिस ने मस्जिद पहुंचकर क्या किया?
निर्देश मिलने के बाद पुलिस टीम मस्जिद पहुंची और वहां लगे लाउडस्पीकर की जांच की। पुलिस का आरोप है कि ध्वनि विस्तारक यंत्र से निर्धारित सीमा से अधिक आवाज में अजान प्रसारित की जा रही थी।
इसके बाद अजान देने वाले मुअज्जिन मोहम्मद फैजान के खिलाफ कार्रवाई की गई। पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया। मामले में लाउडस्पीकर और उससे जुड़े उपकरणों को कब्जे में लेने की भी खबर है।
हालांकि, घटना के संबंध में अलग-अलग समाचार रिपोर्टों में कुछ विवरणों का अंतर दिखाई देता है। इसलिए ध्वनि की वास्तविक माप, दर्ज मुकदमे की सभी धाराओं और जब्त किए गए उपकरणों की पूरी जानकारी के लिए पुलिस की आधिकारिक प्राथमिकी तथा अन्य अभिलेख देखना जरूरी है।
एसडीएम अदालत ने 14 दिन के लिए जेल भेजा
अमर उजाला की 11 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने मोहम्मद फैजान को गिरफ्तार कर एसडीएम अदालत में पेश किया। अदालत ने उसे 14 दिनों के लिए जेल भेजने का आदेश दिया।
दैनिक जागरण की रिपोर्ट में भी आरोपी को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किए जाने और वहां से जेल भेजे जाने की जानकारी दी गई है। रिपोर्टों के मुताबिक, कार्रवाई निर्धारित ध्वनि मानकों से अधिक आवाज में लाउडस्पीकर बजाने के आरोप से जुड़ी है।
यह स्पष्ट करना जरूरी है कि गिरफ्तारी या न्यायिक हिरासत अपने आप में किसी व्यक्ति को दोषी साबित नहीं करती। मामले में अंतिम निर्णय संबंधित न्यायिक प्रक्रिया और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगा। आरोपी को जमानत मिली है या नहीं, इसकी पुष्टि के लिए अदालत के नवीनतम आदेश की जानकारी आवश्यक है।
बीट प्रभारी ललित कुमार भी निलंबित
इस मामले में पुलिस विभाग के स्तर पर भी कार्रवाई की गई। रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई ने बीट प्रभारी ललित कुमार को निलंबित कर दिया।
बताया गया कि संबंधित क्षेत्र में नियमों के पालन की निगरानी और कथित उल्लंघन को रोकने में लापरवाही के आरोप में यह कदम उठाया गया। इस कार्रवाई के साथ पुलिस विभाग ने अपने अधीनस्थ कर्मचारियों को भी स्पष्ट संदेश देने की कोशिश की है कि ध्वनि प्रदूषण से जुड़े नियमों के पालन में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
पुलिस अधिकारियों की ओर से क्षेत्र के थाना प्रभारियों को धार्मिक स्थलों पर लगे लाउडस्पीकरों के संबंध में निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए जाने की खबर भी सामने आई है।
शहर काजी ने कार्रवाई पर उठाए सवाल
इस मामले में नजीबाबाद के शहर काजी अफान-उल-हक की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने मुअज्जिन के खिलाफ की गई कार्रवाई को उचित नहीं बताया।
उनका कहना था कि यदि लाउडस्पीकर की आवाज निर्धारित सीमा से अधिक थी, तो संबंधित व्यक्ति को चेतावनी देकर भविष्य में नियमों का पालन करने के लिए कहा जा सकता था। उनके बयान से स्पष्ट है कि इस कार्रवाई को लेकर स्थानीय धार्मिक प्रतिनिधि की अलग राय है।
हालांकि, शहर काजी की प्रतिक्रिया उनका व्यक्तिगत पक्ष है। कार्रवाई की वैधता का अंतिम निर्धारण लागू कानूनों, उपलब्ध साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही किया जा सकता है।
सितंबर में भी चला था लाउडस्पीकरों के खिलाफ अभियान
बिजनौर जिले में लाउडस्पीकरों को लेकर यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब सितंबर 2026 में भी धार्मिक स्थलों पर ध्वनि विस्तारक यंत्रों के इस्तेमाल की समीक्षा और कार्रवाई की खबरें सामने आई थीं।
अमर उजाला की रिपोर्ट में बताया गया कि जिले में चलाए गए अभियान के दौरान 2,509 धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर उतरवाए गए थे। इनमें 1,323 मस्जिदों, 1,116 मंदिरों और 70 गुरुद्वारों का उल्लेख किया गया है। शेष लाउडस्पीकरों की आवाज निर्धारित नियमों के अनुसार रखने के निर्देश भी दिए गए थे।
इन आंकड़ों के संदर्भ में यह समझना जरूरी है कि लाउडस्पीकर हटाने की कार्रवाई और आवाज कम करने के निर्देश अलग-अलग परिस्थितियों में लागू हो सकते हैं। प्रत्येक मामले में संबंधित अनुमति, स्थान और लागू नियमों की स्थिति देखना आवश्यक है।
लाउडस्पीकर के लिए क्या हैं ध्वनि प्रदूषण के नियम?
भारत में ध्वनि प्रदूषण (विनियमन एवं नियंत्रण) नियम, 2000 के तहत अलग-अलग क्षेत्रों के लिए परिवेशी ध्वनि की सीमा निर्धारित है। सामान्य मानक इस प्रकार हैं:
– औद्योगिक क्षेत्र: दिन में 75 और रात में 70 डेसिबल।
– व्यावसायिक क्षेत्र: दिन में 65 और रात में 55 डेसिबल।
– आवासीय क्षेत्र: दिन में 55 और रात में 45 डेसिबल।
– शांत क्षेत्र: दिन में 50 और रात में 40 डेसिबल।
इन मानकों में दिन का समय सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक और रात का समय रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक माना जाता है।
ये किसी क्षेत्र में परिवेशी शोर के मानक हैं। किसी विशेष लाउडस्पीकर के इस्तेमाल की वैधता तय करते समय अनुमति की शर्तें, संबंधित स्थान की श्रेणी और अन्य लागू प्रावधान भी देखने होते हैं। लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर अनुमति संबंधी नियम लागू होते हैं और रात के समय इसके उपयोग पर विशेष प्रतिबंध हैं, जिनमें निर्धारित अपवाद शामिल हो सकते हैं।
यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। अजान देना और लाउडस्पीकर के माध्यम से निर्धारित सीमा से अधिक आवाज में अजान प्रसारित करना एक ही बात नहीं है। इस मामले में पुलिस की कार्रवाई का आधार कथित ध्वनि मानकों का उल्लंघन बताया गया है, न कि अजान देने की धार्मिक गतिविधि मात्र।
आगे क्या हो सकता है?
अब मामले में आगे की कार्रवाई दर्ज मुकदमे, पुलिस की जांच और अदालत की प्रक्रिया के अनुसार होगी। आरोपी को कानूनी प्रक्रिया के तहत जमानत मांगने का अधिकार है। साथ ही, जांच के दौरान सामने आने वाले साक्ष्य यह तय करने में महत्वपूर्ण होंगे कि कथित उल्लंघन किस प्रकार हुआ और उसके लिए कानूनी जिम्मेदारी किसकी बनती है।
प्रशासन की ओर से धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर के इस्तेमाल को लेकर सख्ती का संदेश दिया गया है। ऐसे मामलों में कानून का पालन सुनिश्चित करने के साथ-साथ निष्पक्ष जांच और सभी पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर देना भी जरूरी है।
नजीबाबाद की नजीबुद्दौला मस्जिद से जुड़ा यह मामला ध्वनि प्रदूषण और लाउडस्पीकर नियमों के पालन को लेकर प्रशासन की कार्रवाई का उदाहरण है। समाचार रिपोर्टों के अनुसार, मुअज्जिन मोहम्मद फैजान को निर्धारित सीमा से अधिक आवाज में अजान प्रसारित करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया और अदालत ने उसे 14 दिनों के लिए जेल भेज दिया। इसी मामले में बीट प्रभारी ललित कुमार को भी निलंबित किया गया।
हालांकि, मामले में आरोपों और अंतिम न्यायिक निष्कर्ष के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है। ध्वनि मानकों का पालन सभी धार्मिक और सार्वजनिक स्थलों के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन किसी व्यक्ति की कानूनी जिम्मेदारी का निर्णय जांच और अदालत की प्रक्रिया के आधार पर ही होना चाहिए।
The Najibabad mosque loudspeaker case in Bijnor, Uttar Pradesh, has drawn attention after police arrested muezzin Mohammad Faizan over alleged violations of prescribed noise limits at the historic Najibuddaula Mosque. According to media reports, the accused was presented before an SDM court and sent to judicial custody for 14 days. The incident also led to the suspension of a local beat in-charge over alleged negligence. Read the latest Bijnor news, details of the Najibabad police action, court proceedings, and an overview of India’s noise pollution rules governing loudspeaker use at religious places.



















