AIN NEWS 1: मध्य प्रदेश में पतंजलि गाय के घी को लेकर खाद्य सुरक्षा विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। प्रयोगशाला जांच में घी के एक विशेष बैच को असुरक्षित पाए जाने के बाद उसकी बिक्री पर रोक लगाने और बाजार में उपलब्ध स्टॉक वापस मंगाने के निर्देश जारी किए गए हैं। सूत्रों के अनुसार, संबंधित नमूने में सीसे (Lead) की मात्रा निर्धारित अधिकतम सीमा से पांच गुना ज्यादा पाई गई है। मामला सामने आने के बाद खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने दुकानदारों, वितरकों और संबंधित निर्माता को इस बैच का घी बाजार से हटाने के निर्देश दिए हैं।
यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब त्योहारों के दौरान घी और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता और उपभोक्ताओं की सुरक्षा को लेकर यह मामला महत्वपूर्ण हो गया है।
छिंदवाड़ा की दुकान से लिया गया था घी का नमूना
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के तामिया क्षेत्र में खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने 10 अगस्त 2026 को एक किराना दुकान से पतंजलि गाय के घी का नमूना लिया था। यह दुकान देलाखारी क्षेत्र में स्थित अनिल किराना के नाम से बताई गई है।
अधिकारियों ने दुकान से 200 मिलीलीटर के पैक का नमूना लेकर जांच के लिए भोपाल की एक प्रयोगशाला में भेजा था। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना था कि संबंधित घी खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप है या नहीं।
प्रयोगशाला की रिपोर्ट सामने आने के बाद संबंधित बैच को असुरक्षित घोषित किए जाने की जानकारी मिली। इसके बाद खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने मामले में कार्रवाई शुरू की और बाजार में उपलब्ध उत्पाद की बिक्री रोकने के निर्देश जारी किए।
घी में कितना सीसा मिलने की बात सामने आई?
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य सीसे की मात्रा से जुड़ा है। प्रकाशित जानकारी के अनुसार, घी में सीसे की अधिकतम निर्धारित सीमा 0.02 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम बताई गई है, जबकि जांच किए गए नमूने में इसकी मात्रा 0.10 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम पाई गई।
यदि ये आंकड़े मूल प्रयोगशाला रिपोर्ट के अनुरूप हैं, तो नमूने में सीसे की मात्रा निर्धारित सीमा से पांच गुना अधिक बैठती है।
जांच से जुड़ा विवरण| रिपोर्टों में बताई गई जानकारी
उत्पाद| पतंजलि गाय का घी
पैक का आकार| 200 मिलीलीटर
बैच नंबर| FAWB260017
निर्माण का महीना| अप्रैल 2026
उपयोग की अंतिम तिथि| दिसंबर 2026
सीसे की बताई गई मात्रा| 0.10 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम
निर्धारित अधिकतम सीमा| 0.02 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम
इन आंकड़ों का उल्लेख करते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि संबंधित प्रयोगशाला रिपोर्ट की प्रमाणित प्रति उपलब्ध होने पर ही सभी तकनीकी विवरणों की स्वतंत्र पुष्टि की जा सकती है।
देशभर से स्टॉक वापस मंगाने के निर्देश
मामले में मध्य प्रदेश खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की कार्रवाई केवल उस दुकान तक सीमित नहीं बताई गई है, जहां से नमूना लिया गया था। सूत्रों के अनुसार, संबंधित निर्माता पतंजलि फूड्स लिमिटेड को देशभर के बाजारों, वितरकों और खुदरा दुकानों से इस बैच का स्टॉक वापस मंगाने के निर्देश दिए गए हैं।
रिपोर्टों में बताया गया है कि कंपनी को 24 घंटे के भीतर रिकॉल प्रक्रिया शुरू करने और संबंधित उत्पाद को बिक्री से हटाने के लिए कहा गया। वापस मंगाए गए स्टॉक को स्पष्ट रूप से ‘फूड रिकॉल-नॉट फॉर सेल’ के रूप में चिह्नित करने तथा उत्पाद को नष्ट करने से संबंधित बैचवार रिकॉर्ड रखने के निर्देश भी दिए जाने की जानकारी सामने आई है।
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि संबंधित बैच का घी दुकानों पर बिक्री के लिए उपलब्ध न रहे। हालांकि, आदेश जारी होने और देशभर से पूरा स्टॉक वापस आ जाने में अंतर है। इसलिए रिकॉल की प्रक्रिया पूरी होने की पुष्टि के लिए विभागीय जानकारी का इंतजार करना होगा।
महाराष्ट्र के खाद्य सुरक्षा विभाग को भी दी गई जानकारी
प्राप्त जानकारी के अनुसार, संबंधित उत्पाद के निर्माण स्थल के महाराष्ट्र में होने के कारण मध्य प्रदेश के खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने महाराष्ट्र के संबंधित अधिकारियों को भी मामले से अवगत कराया है।
ऐसी स्थिति में संबंधित राज्यों के खाद्य सुरक्षा विभागों के बीच समन्वय महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि किसी उत्पाद की आपूर्ति एक राज्य तक सीमित नहीं रह सकती। उत्पाद अलग-अलग वितरकों और खुदरा दुकानों के माध्यम से देश के कई हिस्सों तक पहुंच सकता है।
रिकॉल की निगरानी के दौरान संबंधित बैच की पहचान, उपलब्ध स्टॉक का रिकॉर्ड और बाजार से हटाए गए उत्पाद की जानकारी जुटाना आवश्यक होता है। इससे यह पता लगाने में मदद मिलती है कि आदेश का पालन किस सीमा तक किया गया है।
सीसा शरीर के लिए कितना नुकसानदायक है?
सीसा एक विषैली भारी धातु है। इसके अधिक या लंबे समय तक संपर्क में रहने से शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। विशेष रूप से बच्चों में सीसे का संपर्क मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र के विकास को प्रभावित कर सकता है। वयस्कों में भी इसका अधिक संपर्क स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का कारण बन सकता है।
खाद्य पदार्थों में भारी धातुओं की मौजूदगी इसलिए गंभीरता से ली जाती है, क्योंकि व्यक्ति नियमित भोजन के माध्यम से इनके संपर्क में आ सकता है। खाद्य सुरक्षा मानकों का उद्देश्य ऐसे पदार्थों की मात्रा को नियंत्रित करना और उपभोक्ताओं को संभावित जोखिम से बचाना है।
हालांकि, किसी खाद्य नमूने में निर्धारित सीमा से अधिक सीसा मिलने का अर्थ यह नहीं है कि उस उत्पाद का सेवन करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को नुकसान हुआ है। किसी व्यक्ति के स्वास्थ्य पर प्रभाव का आकलन संपर्क की मात्रा, अवधि और अन्य परिस्थितियों के आधार पर किया जाता है।
उपभोक्ताओं को क्या करना चाहिए?
इस मामले में उपभोक्ताओं के लिए सबसे जरूरी है कि वे अपने पास मौजूद घी के पैकेट का बैच नंबर जांचें। संबंधित कार्रवाई की जानकारी सामने आने के बाद केवल ब्रांड का नाम देखकर सभी उत्पादों को एक जैसा मानना उचित नहीं होगा।
यदि किसी के पास पतंजलि गाय के घी का 200 मिलीलीटर पैक है और उसका बैच नंबर FAWB260017 है, तो एहतियात के तौर पर उसका सेवन रोक देना चाहिए। उपभोक्ता पैकेट को सुरक्षित रखते हुए विक्रेता या कंपनी से वापसी और रिफंड के संबंध में जानकारी ले सकते हैं।
दुकानदारों और वितरकों को भी संबंधित बैच की पहचान कर उसे बिक्री से अलग रखने तथा खाद्य सुरक्षा विभाग के निर्देशों का पालन करने की जरूरत है। यदि किसी दुकान पर यह बैच उपलब्ध मिलता है, तो संबंधित अधिकारियों की कार्रवाई के तहत उसे जब्त किया जा सकता है।
उपभोक्ताओं को सोशल मीडिया पर प्रसारित अपुष्ट दावों के बजाय खाद्य सुरक्षा विभाग के आधिकारिक निर्देशों और प्रमाणित जानकारी पर भरोसा करना चाहिए।
क्या पतंजलि के सभी घी उत्पादों पर लगी है रोक?
इस मामले में एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कार्रवाई पतंजलि गाय के घी के बैच नंबर FAWB260017 से संबंधित है। इसे कंपनी के सभी घी उत्पादों या अन्य खाद्य पदार्थों के असुरक्षित होने का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
किसी विशेष बैच के नमूने में समस्या सामने आने पर खाद्य सुरक्षा विभाग संबंधित उत्पाद की पहचान कर उस पर कार्रवाई करता है। दूसरे बैचों की गुणवत्ता के बारे में निष्कर्ष निकालने के लिए उनकी जांच और संबंधित प्रमाण जरूरी होते हैं।
इसी तरह, इस मामले में कंपनी की ओर से किसी आधिकारिक प्रतिक्रिया या रिकॉल पूरा होने की प्रमाणित जानकारी सामने आने पर खबर को अपडेट किया जाना चाहिए।
जांच और आगे की कार्रवाई पर रहेगी नजर
पतंजलि गाय के घी के संबंधित बैच को असुरक्षित पाए जाने की रिपोर्ट के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई ने खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता जांच का मुद्दा फिर चर्चा में ला दिया है। अब महत्वपूर्ण यह होगा कि संबंधित उत्पाद को बाजार से हटाने के निर्देशों का कितना पालन किया जाता है और रिकॉल की प्रक्रिया की स्थिति क्या रहती है।
उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए जरूरी है कि खाद्य कंपनियां गुणवत्ता मानकों का पालन करें और किसी उत्पाद में गड़बड़ी मिलने पर समय रहते आवश्यक कदम उठाए जाएं। वहीं, अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि जांच रिपोर्ट, रिकॉल आदेश और आगे की कार्रवाई से जुड़ी जानकारी पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराई जाए।
फिलहाल मुख्य बात यह है कि कार्रवाई एक विशिष्ट बैच को लेकर बताई गई है। उपभोक्ताओं को बैच नंबर की जांच करनी चाहिए और संबंधित उत्पाद के बारे में विभागीय निर्देशों का पालन करना चाहिए। देशभर में स्टॉक वापसी की प्रक्रिया पूरी होने और कंपनी के आधिकारिक पक्ष की पुष्टि होने के बाद मामले की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
Patanjali cow ghee has come under food safety scrutiny in Madhya Pradesh after a specific 200 ml batch, identified as FAWB260017, was reportedly declared unsafe during laboratory testing. Reports state that the lead content was five times higher than the prescribed limit, prompting authorities to order a recall of the affected batch from markets, distributors and retail stores across India. Consumers should check the batch number, avoid consuming the affected product and follow official food safety advisories. The case highlights the importance of food quality testing, lead contamination monitoring and consumer protection in India.



















