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नोएडा सेक्टर-150 हादसा: 91 घंटे बाद सीवर से निकली कार, बिल्डर गिरफ्तार, रेस्क्यू सिस्टम की खुली पोल!

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AIN NEWS 1: नोएडा के सेक्टर-150 में हुए दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर सिस्टम की सुस्ती और लापरवाही को उजागर कर दिया है। जिस कार की तलाश में रेस्क्यू टीमें तीन दिन से ज्यादा समय तक लगी रहीं, वह आखिरकार 91 घंटे बाद सीवर के गंदे पानी से बाहर निकाली जा सकी।

लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। इस हादसे में सिविल इंजीनियर युवराज मेहता की जान जा चुकी थी।

🚓 पुलिस ने बिल्डर को किया गिरफ्तार

इस मामले में पुलिस ने मंगलवार सुबह आरोपी बिल्डर को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपी की पहचान अभय कुमार, डायरेक्टर एमनेट विंडडाउन प्लानर्स प्राइवेट लिमिटेड, के रूप में हुई है।

पुलिस ने अभय कुमार को सेक्टर-150 इलाके से गिरफ्तार किया। आरोपी दिल्ली के व्योमनोल्व इलाके का रहने वाला है। उस पर गैर-इरादतन हत्या और लापरवाही से मौत का केस दर्ज किया गया है।

🌫️ कोहरे में छुपा मौत का गड्ढा

हादसा 16 जनवरी की रात हुआ था। उस वक्त नोएडा में घना कोहरा छाया हुआ था। युवराज मेहता अपनी कार से सेक्टर-150 इलाके से गुजर रहे थे।

इसी दौरान उनकी कार एक ऐसे गहरे गड्ढे में गिर गई, जो बेसमेंट निर्माण के लिए खोदा गया था। गड्ढे में सीवर का पानी भरा हुआ था और चारों तरफ न तो सही बैरिकेडिंग थी और न ही कोई चेतावनी बोर्ड।

🚒 रेस्क्यू पहुंचा, लेकिन प्लान नहीं था

हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस, फायर ब्रिगेड और एसडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंचीं। लेकिन मौके पर जो नजारा था, उसने सभी को हैरान कर दिया।

रेस्क्यू के लिए न तो क्रेन थी, न ही यह साफ था कि कार आखिर गिरी कहां है। अलग-अलग टीमें अलग-अलग जगह खोज करती रहीं। इसी भ्रम में कीमती समय निकलता चला गया।

😔 पिता ने दर्ज कराया केस

युवराज के पिता राजकुमार मेहता ने इस पूरे मामले में बिल्डर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। उनका कहना था कि अगर गड्ढे को ठीक से कवर किया गया होता, तो उनका बेटा आज जिंदा होता।

शिकायत के आधार पर पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू की और आखिरकार आरोपी बिल्डर की गिरफ्तारी हुई।

🧑‍🚒 30 से ज्यादा बार पानी में उतरे जवान

कार की तलाश आसान नहीं थी। एनडीआरएफ के जवानों को बेहद खराब हालात में काम करना पड़ा।

पानी गंदा था

विजिबिलिटी लगभग शून्य थी

नीचे दलदल था

इसके बावजूद दो जवान ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ 30 से ज्यादा बार पानी में उतरे। कई घंटों की मशक्कत के बाद शाम करीब 7 बजे कार को खोजकर बाहर निकाला गया।

📍 नाले से 30 मीटर दूर मिली कार

सर्च ऑपरेशन के दौरान एक सिविल इंजीनियर ने बताया कि कार नाले से करीब 30 मीटर दूर दलदल में धंसी हुई थी।

अधिकारियों के बीच भी कार की सटीक लोकेशन को लेकर असमंजस बना रहा। इसी वजह से सर्च ऑपरेशन की दिशा कई बार बदली गई।

🚗 सनरूफ और फ्रंट शीशा टूटा मिला

जब कार को पानी से बाहर निकाला गया, तो उसमें कई अहम सुराग मिले।

कार का सनरूफ टूटा हुआ था

आगे का फ्रंट शीशा भी टूटा मिला

आशंका जताई जा रही है कि युवराज ने कार के अंदर फंसने के बाद बाहर निकलने की कोशिश की होगी और सनरूफ तोड़कर ऊपर जाने का प्रयास किया होगा।

📱 मोबाइल, लैपटॉप अब भी लापता

हालांकि कार बरामद हो चुकी है, लेकिन युवराज का मोबाइल फोन, लैपटॉप और पर्स अब तक नहीं मिल पाए हैं।

रेस्क्यू टीमों का कहना है कि ये सामान शायद दलदल में और अंदर धंस गया हो।

🕵️‍♂️ SIT जांच में जुटी, अफसरों को फटकार

मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन किया।

दोपहर करीब 12 बजे SIT नोएडा अथॉरिटी पहुंची। टीम ने अधिकारियों से पूछा कि वे अब तक मौके पर क्यों नहीं पहुंचे थे। इस दौरान नाराजगी भी देखने को मिली।

🧾 पिता के बयान दर्ज

डीएम मेधा रूपम और पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह की मौजूदगी में मृतक के पिता के बयान दर्ज किए गए।

एडीजी भानु भास्कर ने बताया कि SIT को 5 दिन में रिपोर्ट सौंपनी है। रिपोर्ट में यह तय होगा कि

किस स्तर पर लापरवाही हुई

रेस्क्यू में क्या-क्या कमी रही

कौन-कौन जिम्मेदार है

😡 स्थानीय लोगों के गंभीर आरोप

घटना के बाद स्थानीय निवासी मुनेंद्र और उनके परिवार ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

मुनेंद्र का कहना है कि पुलिस उन पर मीडिया में बयान न देने का दबाव बना रही है। परिवार का आरोप है कि कुछ लोग उनके घर आकर उन्हें कुछ दिनों के लिए बाहर चले जाने की सलाह दे रहे हैं।

🗣️ “जान जोखिम में डालकर बचाने गए, अब हमें ही परेशान किया जा रहा”

मुनेंद्र का कहना है,

“अगर इंजीनियर को बचाने में मेरे बेटे की भी जान चली जाती, तो भी गम न होता। लेकिन अब, जिसने जान जोखिम में डालकर मदद की, उसी को डराया जा रहा है।”

सवाल जो अब भी बाकी हैं

यह हादसा कई सवाल छोड़ गया है:

निर्माण स्थल पर सुरक्षा इंतजाम क्यों नहीं थे?

रेस्क्यू के लिए पहले से कोई प्लान क्यों नहीं था?

नोएडा जैसा हाई-प्रोफाइल इलाका होने के बावजूद व्यवस्था क्यों फेल हुई?

⚠️ सिस्टम के लिए चेतावनी

यह मामला सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि एक चेतावनी है। अगर समय रहते निर्माण स्थलों पर सुरक्षा, निगरानी और जवाबदेही तय नहीं की गई, तो ऐसी घटनाएं दोबारा हो सकती हैं।

अब सबकी नजर SIT की रिपोर्ट पर है, जो तय करेगी कि यह सिर्फ एक हादसा था या सिस्टम की लापरवाही से हुई मौत।

The Noida Sector 150 accident case has triggered serious questions about construction safety and emergency response systems. An engineer died after his car fell into a water-filled sewer pit at a construction site. After 91 hours of search, NDRF recovered the vehicle, and police arrested the builder for negligence. A Special Investigation Team (SIT) is now investigating the role of Noida Authority, police, fire department, and other agencies in the delayed rescue.

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