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गर्मियों में घर ठंडा रखने वाला ‘पसीना बहाने वाला’ पेंट, AC की बिजली खपत में 40% तक कमी का दावा

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AIN NEWS 1: गर्मियों में तेज धूप से तपती दीवारें घर के अंदर का तापमान बढ़ा देती हैं। इसका असर खासकर उन घरों में ज्यादा दिखाई देता है, जहां दिनभर सीधी धूप छत या बाहरी दीवारों पर पड़ती है। ऐसे में लोग कमरे को ठंडा रखने के लिए पंखे, कूलर और एयर कंडीशनर का सहारा लेते हैं। लेकिन AC जितना ज्यादा चलता है, बिजली का बिल भी उतना ही बढ़ता है। अब वैज्ञानिकों ने ऐसी तकनीक विकसित की है जो बिना किसी सक्रिय बिजली खपत के इमारत की सतह को ठंडा रखने में मदद कर सकती है।

सिंगापुर की Nanyang Technological University (NTU) के वैज्ञानिकों ने CCP-30 नाम का एक नया पैसिव कूलिंग पेंट विकसित किया है। इसकी खासियत यह है कि यह केवल सूरज की रोशनी को परावर्तित नहीं करता, बल्कि पानी को वाष्पित करके भी गर्मी बाहर निकालता है। वैज्ञानिकों ने इसके काम करने के तरीके की तुलना इंसान के शरीर से की है—जिस तरह पसीना वाष्पित होकर शरीर को ठंडा करता है, उसी तरह यह पेंट पानी के वाष्पीकरण के जरिए सतह से गर्मी हटाने में मदद करता है।

क्या है CCP-30 पेंट?

CCP-30 एक पानी आधारित, सीमेंट-बेस्ड कोटिंग है। इसमें ऐसी छिद्रयुक्त संरचना तैयार की गई है, जो पानी को अपने अंदर रोक सकती है। पानी बारिश या वातावरण की नमी से भी प्राप्त हो सकता है। जब तेज धूप पड़ती है और सतह गर्म होती है, तो पेंट में मौजूद पानी धीरे-धीरे वाष्पित होता है। इस प्रक्रिया में गर्मी सतह से बाहर निकलती है और दीवार को ठंडा करने में मदद मिलती है।

यही वजह है कि इसे सामान्य ‘कूलिंग पेंट’ से अलग माना जा रहा है। सामान्य रिफ्लेक्टिव पेंट मुख्य रूप से सूर्य की ऊर्जा को वापस भेजने पर निर्भर करते हैं, जबकि CCP-30 एक साथ कई कूलिंग प्रक्रियाओं का इस्तेमाल करता है।

तीन तरीकों से करता है कूलिंग

CCP-30 की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इसका तीन स्तर वाला कूलिंग सिस्टम है।

पहला, यह सूर्य की रोशनी के बड़े हिस्से को वापस परावर्तित करता है, जिससे दीवार कम गर्म होती है।

दूसरा, इसकी सतह अवरक्त विकिरण के जरिए गर्मी को वातावरण की ओर बाहर निकालने में मदद करती है। रिसर्च में CCP-30 की लंबी तरंग वाली इंफ्रारेड एमिसिविटी लगभग 95 प्रतिशत बताई गई है।

तीसरा और सबसे दिलचस्प तरीका है evaporative cooling। पेंट के अंदर मौजूद पानी जब वाष्प बनकर बाहर निकलता है तो अपने साथ गर्मी भी ले जाता है। यह प्रक्रिया कुछ हद तक मानव शरीर में पसीने के वाष्पीकरण जैसी है।

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88 से 92 प्रतिशत तक सूर्य की ऊर्जा को रिफ्लेक्ट करने की क्षमता

रिसर्च से जुड़े आंकड़ों के अनुसार CCP-30 की सौर परावर्तन क्षमता परिस्थितियों के अनुसार लगभग 88 से 92 प्रतिशत के बीच बताई गई है। इसका मतलब है कि सूर्य से आने वाली ऊर्जा का बड़ा हिस्सा सतह द्वारा वापस भेज दिया जाता है और दीवार को पारंपरिक पेंट की तुलना में कम गर्म होने में मदद मिलती है।

हालांकि यहां यह समझना जरूरी है कि केवल पेंट लगाने से हर घर में तापमान एक समान 4.5 डिग्री कम हो जाएगा, ऐसा दावा नहीं किया जाना चाहिए। वास्तविक परिणाम मौसम, भवन की बनावट, धूप की दिशा, नमी, छत की संरचना और वेंटिलेशन जैसी परिस्थितियों पर निर्भर कर सकते हैं।

परीक्षण में 4.5 डिग्री से ज्यादा ठंडा रहा मॉडल हाउस

NTU की रिसर्च में इस पेंट को मॉडल हाउसों पर भी परीक्षण किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक CCP-30 से पेंट किए गए मॉडल हाउस का प्रदर्शन सामान्य सफेद पेंट की तुलना में काफी बेहतर रहा और कुछ परिस्थितियों में सतह/घर का तापमान 4.5 डिग्री सेल्सियस से अधिक कम दर्ज किया गया।

NTU ने बताया कि इस तकनीक को वास्तविक परिस्थितियों में लंबे समय तक भी परखा गया। यूनिवर्सिटी के अनुसार मॉडल हाउसों पर करीब दो साल के परीक्षण में पेंट ने धूप और बारिश जैसी परिस्थितियों के बीच अपनी प्रभावशीलता बनाए रखी।

AC का बिजली खर्च 30 से 40 प्रतिशत तक घटाने की संभावना

इस तकनीक का सबसे बड़ा आकर्षण बिजली की बचत है। शोध के पायलट-स्केल परीक्षणों में CCP-30 से 30 से 40 प्रतिशत तक बिजली की बचत दर्ज की गई। NTU के अनुसार यह बचत मुख्य रूप से एयर कंडीशनिंग की जरूरत कम होने से जुड़ी है।

इसका अर्थ यह नहीं है कि हर घर में बिजली का कुल बिल सीधे 40 प्रतिशत कम हो जाएगा। घर में फ्रिज, पंखे, लाइट, टीवी और दूसरे उपकरणों की बिजली खपत भी होती है। इसलिए वास्तविक बिल में कमी उस भवन की कुल ऊर्जा खपत और AC के इस्तेमाल पर निर्भर करेगी।

बारिश और नमी से भी मिल सकता है फायदा

CCP-30 की एक और खासियत इसकी पानी को अपने अंदर रोकने की क्षमता है। NTU के मुताबिक पेंट की छिद्रयुक्त संरचना वातावरण की नमी और बारिश से पानी ग्रहण कर सकती है। धूप निकलने पर यही पानी वाष्पित होकर कूलिंग प्रक्रिया में योगदान देता है।

यानी यह तकनीक खास तौर पर गर्म और उमस वाले क्षेत्रों के लिए दिलचस्प हो सकती है, जहां केवल रेडिएटिव कूलिंग वाली पारंपरिक तकनीकें नमी के कारण अपेक्षाकृत कम प्रभावी हो सकती हैं।

आम लोगों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह तकनीक?

भारत जैसे देशों में गर्मियों के दौरान एयर कंडीशनर और कूलर का इस्तेमाल तेजी से बढ़ता है। इससे घरेलू बिजली की मांग बढ़ती है और लोगों का मासिक खर्च भी प्रभावित होता है। अगर किसी भवन की बाहरी सतह को ही इस तरह डिजाइन किया जा सके कि वह सूर्य की गर्मी को कम सोखे और अतिरिक्त गर्मी को बाहर निकालने में मदद करे, तो भविष्य में भवनों की कूलिंग जरूरत कम की जा सकती है।

इसका फायदा केवल बिजली बिल तक सीमित नहीं हो सकता। बड़े शहरों में इमारतों की छतों और सड़कों का ज्यादा गर्म होना Urban Heat Island Effect को बढ़ाता है। NTU पहले भी कूल पेंट तकनीक पर किए गए अध्ययनों में शहरी वातावरण को ठंडा करने की संभावनाओं पर काम कर चुका है।

अभी इसे लेकर क्या सावधानी जरूरी है?

CCP-30 निश्चित रूप से दिलचस्प वैज्ञानिक उपलब्धि है, लेकिन इसे अभी ऐसा समाधान नहीं माना जाना चाहिए जो हर घर में तुरंत AC की जगह ले लेगा। यह एक passive cooling technology है, जिसका उद्देश्य भवन की सतह और अंदर की कूलिंग जरूरत को कम करना है।

NTU की तकनीक को उद्योग के स्तर पर आगे बढ़ाने के लिए पायलट ट्रायल और व्यावसायिक साझेदारियों पर भी काम किया जा रहा है। यूनिवर्सिटी के अनुसार इस तकनीक से जुड़ी टीम ने इसे बड़े पैमाने पर विकसित करने के लिए कंपनी भी बनाई है।

कुल मिलाकर, ‘पसीना बहाने वाला पेंट’ नाम भले ही सुनने में अनोखा लगे, लेकिन इसके पीछे वैज्ञानिक आधार है। सूर्य की रोशनी को परावर्तित करना, गर्मी को इंफ्रारेड विकिरण के रूप में बाहर निकालना और पानी के वाष्पीकरण से अतिरिक्त गर्मी हटाना—इन तीनों प्रक्रियाओं को एक साथ इस्तेमाल करना CCP-30 को खास बनाता है। आने वाले समय में अगर यह तकनीक बड़े पैमाने पर व्यावसायिक रूप से उपलब्ध होती है और अलग-अलग जलवायु में भी समान परिणाम देती है, तो गर्म इलाकों में भवनों को ठंडा रखने और AC पर निर्भरता घटाने की दिशा में यह उपयोगी विकल्प साबित हो सकती है।

CCP-30 is an innovative passive cooling paint developed by scientists at Nanyang Technological University (NTU) Singapore. The cement-based cooling coating combines solar reflection, radiative cooling and evaporative cooling to reduce surface temperatures. By absorbing moisture and releasing it through evaporation, CCP-30 works somewhat like human sweating and can help buildings stay cooler. Pilot-scale testing reported 30–40% electricity savings for air conditioning, making this cooling paint technology a promising option for energy-efficient buildings and sustainable urban cooling.

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