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परशुराम जयंती 2026: 19 या 20 अप्रैल? जानिए सही तारीख, शुभ मुहूर्त और पूजा का सही समय!

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AIN NEWS 1: साल की तरह इस बार भी परशुराम जयंती की सही तारीख को लेकर लोगों के बीच भ्रम की स्थिति बनी हुई है। कुछ लोग इसे 19 अप्रैल को मनाने की बात कर रहे हैं, जबकि कुछ 20 अप्रैल को इसे मनाने के पक्ष में हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि इसी समय अक्षय तृतीया का पर्व भी पड़ रहा है, जिसे बेहद शुभ माना जाता है।

ऐसे में आम लोगों के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर सही तारीख कौन-सी है? आइए इस पूरे विषय को विस्तार से समझते हैं, ताकि आप सही दिन पर श्रद्धा के साथ भगवान परशुराम की पूजा कर सकें।

📅 तिथि को लेकर क्यों है भ्रम?

हिंदू धर्म में किसी भी पर्व या जयंती की तारीख तय करने के लिए हिंदू पंचांग का सहारा लिया जाता है। पंचांग के अनुसार, भगवान परशुराम का जन्म वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हुआ था।

यही तिथि हर साल अक्षय तृतीया के रूप में भी मनाई जाती है। इस कारण से कई बार दोनों पर्व एक ही दिन आते हैं, जिससे लोगों के बीच तारीख को लेकर भ्रम पैदा हो जाता है।

🕰️ इस बार तृतीया तिथि कब से कब तक?

इस वर्ष द्रिक पंचांग के अनुसार तृतीया तिथि की शुरुआत:

19 अप्रैल, सुबह 10 बजकर 49 मिनट से

और इसका समापन 20 अप्रैल, सुबह 7 बजकर 27 मिनट पर होगा

अब यहां ध्यान देने वाली सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भगवान परशुराम का जन्म प्रदोष काल (संध्या समय) में हुआ था।

🌅 प्रदोष काल का महत्व

हिंदू शास्त्रों के अनुसार, अगर किसी देवी-देवता का जन्म किसी विशेष समय में हुआ हो, तो उस समय को अधिक महत्व दिया जाता है। भगवान परशुराम का जन्म संध्या काल में हुआ था, जिसे प्रदोष काल कहा जाता है।

इस साल 19 अप्रैल को ही तृतीया तिथि के दौरान शाम का समय (प्रदोष काल) पड़ रहा है। यही कारण है कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार:

👉 परशुराम जयंती 19 अप्रैल को मनाना अधिक शुभ और सही माना जा रहा है।

🪔 पूजा का शुभ मुहूर्त

द्रिक पंचांग के अनुसार, इस बार परशुराम जयंती पर पूजा का शुभ समय इस प्रकार रहेगा:

शाम 6 बजकर 49 मिनट से

रात 8 बजकर 12 मिनट तक

यह समय प्रदोष काल के अंतर्गत आता है, जो भगवान परशुराम की पूजा के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है।

🙏 भगवान परशुराम कौन हैं?

भगवान परशुराम को भगवान विष्णु का छठा अवतार माना जाता है। वे एक ऐसे योद्धा ब्राह्मण थे, जिन्होंने अन्याय और अधर्म के खिलाफ संघर्ष किया।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उन्होंने पृथ्वी को 21 बार क्षत्रियों से मुक्त किया था, ताकि धर्म की स्थापना हो सके। उनका जीवन सत्य, साहस और धर्म की रक्षा का प्रतीक माना जाता है।

🌼 परशुराम जयंती का महत्व

परशुराम जयंती केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि यह न्याय और धर्म की जीत का प्रतीक भी है। इस दिन लोग:

भगवान परशुराम की पूजा करते हैं

व्रत रखते हैं

दान-पुण्य करते हैं

धार्मिक कथाएं सुनते हैं

मान्यता है कि इस दिन पूजा करने से जीवन में साहस, शक्ति और धर्म का मार्ग अपनाने की प्रेरणा मिलती है।

🪔 पूजा विधि (सरल तरीके से)

अगर आप इस दिन घर पर पूजा करना चाहते हैं, तो आप इस आसान विधि को अपना सकते हैं:

सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें

घर के मंदिर में भगवान परशुराम की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें

उन्हें चंदन, अक्षत, फूल और फल अर्पित करें

घी का दीपक जलाएं

परशुराम मंत्र या विष्णु मंत्र का जाप करें

शाम के समय प्रदोष काल में विशेष पूजा करें

📌 क्या 20 अप्रैल को भी मनाया जा सकता है?

हालांकि तृतीया तिथि 20 अप्रैल की सुबह तक रहेगी, लेकिन उस दिन प्रदोष काल नहीं पड़ेगा। इसलिए धार्मिक दृष्टि से 19 अप्रैल को ही जयंती मनाना ज्यादा उचित माना गया है।

इस बार परशुराम जयंती को लेकर जो भ्रम बना हुआ था, वह तृतीया तिथि के दो दिनों में फैलने के कारण है। लेकिन शास्त्रों और पंचांग के अनुसार, भगवान परशुराम का जन्म प्रदोष काल में हुआ था, जो इस बार 19 अप्रैल को ही पड़ रहा है।

👉 इसलिए 19 अप्रैल 2026 को परशुराम जयंती मनाना सबसे सही और शुभ रहेगा।

Parshuram Jayanti 2026 will be observed based on the Tritiya Tithi of Vaishakh month, which coincides with Akshaya Tritiya. According to the Hindu Panchang and Drik Panchang, the correct date to celebrate Parshuram Jayanti is April 19, as the Pradosh Kaal falls on this day. Devotees should follow the correct Shubh Muhurat and Puja Vidhi to seek blessings of Lord Parshuram, the sixth incarnation of Lord Vishnu.

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