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प्रतीक यादव मौत मामला पहुंचा NHRC: NGO ने उठाए गंभीर सवाल, SIT जांच और केंद्रीय फॉरेंसिक जांच की मांग!

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AIN NEWS 1: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के छोटे भाई और भाजपा नेता अपर्णा यादव के पति प्रतीक यादव की संदिग्ध मौत का मामला अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग यानी NHRC तक पहुंच गया है। मामले ने अब राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर गंभीर रूप ले लिया है। एक गैर सरकारी संस्था (NGO) ने इस पूरे प्रकरण को संदिग्ध बताते हुए स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की है।

मानवाधिकार के क्षेत्र में काम करने वाली संस्था डीके फाउंडेशन ने NHRC में शिकायत दाखिल कर कहा है कि प्रतीक यादव की मौत सामान्य परिस्थितियों में हुई घटना नहीं लगती। संस्था ने दावा किया है कि कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं जो इस मामले को और गंभीर बनाते हैं। NGO ने विशेष जांच दल यानी SIT के गठन, CCTV फुटेज सुरक्षित रखने और केंद्रीय फॉरेंसिक जांच कराने की मांग की है।

कैसे हुई थी प्रतीक यादव की मौत

जानकारी के अनुसार बुधवार तड़के प्रतीक यादव अपने लखनऊ स्थित आवास पर अचेत अवस्था में पाए गए थे। परिवार के लोगों ने उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। अस्पताल सूत्रों के मुताबिक जब उन्हें अस्पताल लाया गया तब तक उनकी सांस और धड़कन बंद हो चुकी थी।

घटना के बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया और पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी कराई गई। शुरुआती रिपोर्ट में मौत की वजह Cardiorespiratory Collapse बताई गई, लेकिन बाद में सामने आई जानकारियों ने कई नए सवाल खड़े कर दिए।

NGO ने क्यों उठाए सवाल

डीके फाउंडेशन ने NHRC में दाखिल अपनी शिकायत में कहा है कि प्रतीक यादव पूरी तरह फिट और सक्रिय जीवनशैली के लिए जाने जाते थे। ऐसे में उनकी अचानक हुई मौत लोगों को चौंकाने वाली है। संस्था का दावा है कि पोस्टमार्टम के दौरान शरीर पर कुछ कथित चोट के निशान भी मिले हैं, जिन्हें Ante-mortem Injuries बताया जा रहा है।

NGO का कहना है कि यदि शरीर पर चोट के निशान मौजूद थे, तो यह जरूरी हो जाता है कि हर पहलू की निष्पक्ष जांच की जाए। संस्था ने आरोप लगाया कि हाई-प्रोफाइल मामला होने के कारण जांच पर किसी भी प्रकार का दबाव नहीं होना चाहिए।

SIT जांच की मांग क्यों

NGO ने अपनी शिकायत में सबसे प्रमुख मांग SIT जांच की रखी है। संस्था का मानना है कि मामला बेहद संवेदनशील और राजनीतिक रूप से चर्चित है, इसलिए सामान्य पुलिस जांच पर्याप्त नहीं मानी जा सकती।

शिकायत में कहा गया है कि यदि स्वतंत्र एजेंसी द्वारा जांच की जाती है, तो लोगों का भरोसा बना रहेगा और सच्चाई सामने आने में आसानी होगी। संस्था ने NHRC से अनुरोध किया है कि आयोग इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करे।

CCTV फुटेज सुरक्षित रखने की मांग

NGO ने यह भी मांग की है कि अस्पताल और प्रतीक यादव के आवास से जुड़े सभी CCTV फुटेज तुरंत सुरक्षित किए जाएं। शिकायत में कहा गया है कि कई मामलों में समय बीतने के साथ महत्वपूर्ण डिजिटल सबूत नष्ट हो जाते हैं, जिससे जांच प्रभावित होती है।

संस्था चाहती है कि संबंधित फुटेज न्यायिक निगरानी में रखे जाएं ताकि किसी तरह की छेड़छाड़ की आशंका न रहे। जांच एजेंसियां यह जानने की कोशिश कर रही हैं कि मौत से पहले प्रतीक यादव किन परिस्थितियों में थे और आखिरी बार उनसे किसने मुलाकात की थी।

केंद्रीय फॉरेंसिक जांच की मांग

NGO ने राज्य स्तरीय जांच के बजाय केंद्रीय फॉरेंसिक लैब यानी CFSL से जांच कराने की मांग भी उठाई है। संस्था का कहना है कि केंद्रीय एजेंसी द्वारा जांच होने से निष्पक्षता बनी रहेगी और किसी भी तरह के विवाद की संभावना कम होगी।

बताया जा रहा है कि पोस्टमार्टम के बाद विसरा सुरक्षित रखा गया है और उसकी जांच रिपोर्ट आने का इंतजार किया जा रहा है। अंतिम मेडिकल निष्कर्ष उसी रिपोर्ट के आधार पर तय होगा।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में क्या सामने आया

सूत्रों के अनुसार पोस्टमार्टम रिपोर्ट में Pulmonary Embolism यानी फेफड़ों में खून का थक्का बनने की बात सामने आई है। मेडिकल विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति कई बार अचानक मौत का कारण बन सकती है। हालांकि डॉक्टरों का यह भी मानना है कि शरीर पर यदि चोट के निशान मिले हैं, तो उन पहलुओं की भी गंभीरता से जांच जरूरी है।

फिलहाल पुलिस और मेडिकल टीम दोनों रिपोर्टों का मिलान कर रही हैं ताकि मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सके।

पुलिस ने जब्त किए इलेक्ट्रॉनिक उपकरण

मामले की जांच के दौरान पुलिस ने प्रतीक यादव का मोबाइल फोन, लैपटॉप और कुछ निजी दस्तावेज अपने कब्जे में लिए हैं। सूत्रों के मुताबिक जांच एजेंसियां उनके कॉल रिकॉर्ड, डिजिटल गतिविधियों और हाल के संपर्कों की भी पड़ताल कर रही हैं।

पुलिस ने आवास के कुछ हिस्सों का निरीक्षण करने के बाद उन्हें सील भी किया था। अधिकारियों का कहना है कि हर एंगल से जांच की जा रही है और अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।

परिवार और समर्थकों में शोक

पोस्टमार्टम के बाद प्रतीक यादव का पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए उनके आवास पर रखा गया, जहां बड़ी संख्या में समर्थक, रिश्तेदार और राजनीतिक नेता पहुंचे। माहौल बेहद भावुक था और परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल दिखाई दिया।

कई राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की और निष्पक्ष जांच की मांग का समर्थन किया।

सोशल मीडिया पर तेज हुई बहस

प्रतीक यादव की मौत के बाद सोशल मीडिया पर भी लगातार चर्चाएं जारी हैं। कुछ लोग इसे सामान्य मेडिकल केस मान रहे हैं, जबकि कई लोग स्वतंत्र जांच की मांग उठा रहे हैं। सोशल मीडिया पर तरह-तरह के दावे और चर्चाएं वायरल हो रही हैं, हालांकि अभी तक किसी भी दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि जांच पूरी होने से पहले अफवाहों पर भरोसा न करें।

विशेषज्ञों की क्या राय है

मेडिकल और कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि Pulmonary Embolism जैसी स्थिति अचानक और जानलेवा हो सकती है। लेकिन यदि पोस्टमार्टम के दौरान शरीर पर चोट के निशान मिले हैं, तो हर तथ्य की गहराई से जांच जरूरी है।

कानूनी जानकारों के मुताबिक NHRC में शिकायत पहुंचने के बाद मामले की संवेदनशीलता और बढ़ गई है। अब आयोग चाहे तो राज्य सरकार और संबंधित एजेंसियों से विस्तृत रिपोर्ट मांग सकता है।

अब सबकी नजर NHRC पर

फिलहाल पूरे प्रदेश की नजर NHRC और जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है। लोगों को उम्मीद है कि जांच पारदर्शी तरीके से होगी और सभी सवालों के जवाब सामने आएंगे।

प्रतीक यादव की अचानक हुई मौत ने राजनीतिक गलियारों से लेकर आम लोगों तक सभी को झकझोर दिया है। अब देखना होगा कि NHRC इस मामले में क्या कदम उठाता है और क्या SIT जांच तथा केंद्रीय फॉरेंसिक जांच की मांग को मंजूरी मिलती है।

The Prateek Yadav death case has intensified after an NGO approached the NHRC demanding an SIT probe, CCTV footage preservation, and a central forensic investigation. Prateek Yadav, brother of Akhilesh Yadav and husband of BJP leader Aparna Yadav, died under suspicious circumstances in Lucknow. Questions surrounding the postmortem report, pulmonary embolism findings, alleged injury marks, and seized electronic devices have increased public attention on the investigation.

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