AIN NEWS 1 प्रयागराज/हिसार। उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की प्रयागराज यूनिट में तैनात दरोगा रणेंद्र कुमार सिंह पर एक आपराधिक मुकदमे से नाम हटवाने के बदले रिश्वत मांगने का गंभीर आरोप लगा है। शिकायत के मुताबिक, दरोगा ने कथित तौर पर कुर्सी-मेज खरीदने के लिए 35 हजार रुपये, दो गाय, एक भैंस और जर्मन शेफर्ड नस्ल का कुत्ता मांगा। मामले में हरियाणा के हिसार स्थित राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने जांच के बाद 6 अक्टूबर 2026 को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया है।
शिकायतकर्ता ने दरोगा के साथ हुई बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग और स्क्रीनशॉट जांच एजेंसी को सौंपे थे। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, शिकायतकर्ता ने करीब 45 ऑडियो रिकॉर्डिंग उपलब्ध कराई थीं। जांच एजेंसी ने शिकायत में लगाए गए आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों की पड़ताल के बाद प्राथमिकी दर्ज करने की कार्रवाई की। हालांकि, मामले में दरोगा पर लगे आरोपों को अदालत में साबित होना अभी बाकी है।

2023 में दर्ज मुकदमे से जुड़ा है पूरा मामला
यह मामला प्रयागराज के नवाबगंज थाने में 2 सितंबर 2023 को दर्ज एक आपराधिक मुकदमे से जुड़ा है। रिपोर्टों के अनुसार, यह मुकदमा अवैध शराब की तस्करी के आरोपों के संबंध में दर्ज किया गया था। हरियाणा के हिसार जिले के ब्यानाखेड़ा गांव निवासी मनवीर सिंह उर्फ मन्नू का नाम भी इस मामले में सामने आया था।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि इसी मुकदमे से उसका नाम निकलवाने के बदले दरोगा रणेंद्र कुमार सिंह ने उससे रुपये और अन्य सामान की मांग की। आरोप के अनुसार, फोन पर हुई बातचीत में दरोगा ने कथित तौर पर कहा कि कुर्सी-मेज खरीदने के लिए 35 हजार रुपये दिए जाएं। इसके अलावा गाय, भैंस और जर्मन शेफर्ड कुत्ते की मांग किए जाने की बात भी शिकायत में कही गई है।
मामले की गंभीरता इसलिए बढ़ गई क्योंकि शिकायतकर्ता ने केवल मौखिक आरोप लगाने के बजाय बातचीत की रिकॉर्डिंग और अन्य डिजिटल साक्ष्य जांच एजेंसी को सौंपने का दावा किया।
कुर्सी-मेज के लिए 35 हजार रुपये मांगने का आरोप
मीडिया रिपोर्टों में सामने आई जानकारी के मुताबिक, 1 फरवरी 2026 की एक कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग में कुर्सी-मेज खरीदने के लिए 35 हजार रुपये की मांग किए जाने का उल्लेख है। एक अन्य रिकॉर्डिंग में हिमांशु नाम के व्यक्ति के ऑनलाइन भुगतान स्कैनर पर 10 हजार रुपये भेजने की बात सामने आने का दावा भी किया गया है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि रुपये की मांग के साथ-साथ पशुओं की व्यवस्था करने के लिए भी कहा गया था। हालांकि, इन कथित लेन-देन और बातचीत का पूरा संदर्भ, रकम के वास्तविक हस्तांतरण तथा प्रत्येक आरोप की पुष्टि जांच के आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर ही की जानी चाहिए।
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या किसी आपराधिक मुकदमे में नाम हटाने या राहत दिलाने के बदले किसी लोक सेवक ने अनुचित लाभ मांगा था। इसी पहलू की जांच भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसी के लिए महत्वपूर्ण है।
दो गाय भेजने के बाद फिर मांग करने का आरोप
शिकायतकर्ता मनवीर सिंह के अनुसार, 1 फरवरी को फोन पर दो गायों की मांग की गई थी। रिपोर्टों में दावा किया गया है कि 3 फरवरी 2026 को दो गाय भेजी गईं। इसके बाद 9 फरवरी को कथित तौर पर एक और गाय तथा एक भैंस की मांग किए जाने की बात सामने आई।
शिकायत में जर्मन शेफर्ड नस्ल का कुत्ता मांगे जाने का आरोप भी शामिल है। इस प्रकार, आरोपों के मुताबिक रिश्वत की मांग केवल नकदी तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसमें पशु और अन्य सामान भी शामिल थे।
हालांकि, गायों और अन्य सामान की मांग, उनकी आपूर्ति तथा इससे संबंधित बातचीत को अंतिम रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता। इन दावों की पुष्टि के लिए रिकॉर्डिंग, भुगतान संबंधी विवरण, संबंधित व्यक्तियों के बयान और अन्य साक्ष्य महत्वपूर्ण होंगे।
17 फरवरी को दी गई शिकायत, जांच के बाद दर्ज हुई FIR
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मनवीर सिंह ने 17 फरवरी 2026 को हिसार मंडल के राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में शिकायत दी थी। शिकायत के साथ कथित बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग और स्क्रीनशॉट भी सौंपे गए।
इसके बाद जांच एजेंसी ने उपलब्ध सामग्री की पड़ताल की। रिपोर्टों में बताया गया है कि जांच से संबंधित रिपोर्ट 15 जुलाई 2026 को हरियाणा के पुलिस महानिदेशक कार्यालय को भेजी गई थी। इसके बाद 14 अगस्त 2026 को प्राथमिकी दर्ज करने की अनुमति मिलने का उल्लेख भी समाचार रिपोर्टों में किया गया है।
आखिरकार, 6 अक्टूबर 2026 को हिसार में दरोगा के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत FIR दर्ज की गई। रिपोर्टों के अनुसार, मामले की आगे की जांच भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के अधिकारी कर रहे हैं।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 क्यों महत्वपूर्ण है?
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 लोक सेवक द्वारा अपने आधिकारिक कार्य के संबंध में अनुचित लाभ लेने, मांगने या लेने का प्रयास करने जैसे कृत्यों से संबंधित है। किसी मामले में इस धारा के तहत अपराध बनता है या नहीं, इसका निर्धारण संबंधित तथ्यों, साक्ष्यों और कानून के आधार पर किया जाता है।
यदि किसी सरकारी कर्मचारी पर किसी व्यक्ति को आपराधिक मुकदमे में राहत दिलाने के बदले अनुचित लाभ मांगने का आरोप लगता है, तो जांच एजेंसी को यह देखना होता है कि कथित मांग किस संदर्भ में की गई, क्या कोई लाभ मांगा या स्वीकार किया गया और उपलब्ध साक्ष्य आरोपों का समर्थन करते हैं या नहीं।
इस प्रकरण में कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग, स्क्रीनशॉट, ऑनलाइन भुगतान से संबंधित जानकारी और शिकायतकर्ता के बयान जांच के महत्वपूर्ण हिस्से हो सकते हैं। केवल प्राथमिकी दर्ज होने से किसी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही निकाला जा सकता है।
पुलिस विभाग की कार्रवाई पर भी रहेगी नजर
मामला उत्तर प्रदेश STF में तैनात एक दरोगा से संबंधित होने के कारण विभागीय कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों के आधार पर दरोगा की गिरफ्तारी, निलंबन या किसी अंतिम विभागीय दंड की स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की जा सकती।
इसलिए फिलहाल यह कहना उचित होगा कि दरोगा के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप में FIR दर्ज की गई है और मामले की कानूनी जांच जारी है। आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों, संबंधित अधिकारियों के निर्णय और न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।
प्रयागराज STF के दरोगा रणेंद्र कुमार सिंह के खिलाफ हिसार में दर्ज भ्रष्टाचार का मामला इसलिए चर्चा में है क्योंकि शिकायत में नकदी के साथ गाय, भैंस और जर्मन शेफर्ड कुत्ते की कथित मांग का उल्लेख है। शिकायतकर्ता मनवीर सिंह ने ऑडियो रिकॉर्डिंग और अन्य साक्ष्य जांच एजेंसी को सौंपने का दावा किया था। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जांच के बाद 6 अक्टूबर 2026 को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत FIR दर्ज की गई।
अब मामले में जांच के निष्कर्ष, उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों की पुष्टि और संबंधित अधिकारियों की आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। दरोगा पर लगे आरोपों की अंतिम सत्यता सक्षम न्यायिक प्रक्रिया से ही निर्धारित होगी।
Prayagraj STF sub-inspector Ranendra Kumar Singh has been named in a bribery case registered in Hisar, Haryana, on October 6, 2026. According to media reports, the officer is accused of demanding Rs 35,000, two cows, a buffalo and a German Shepherd dog in exchange for removing a person’s name from a criminal case linked to alleged illegal liquor trafficking. The complainant, Manveer Singh, reportedly submitted audio recordings and screenshots to the Haryana State Vigilance and Anti-Corruption Bureau. The case was registered under Section 7 of the Prevention of Corruption Act. The allegations remain subject to investigation and judicial proceedings, and registration of an FIR does not establish guilt.



















