पुणे-लोनावला हाईवे पर पुलिस पर गंभीर आरोप: परिवार को ड्रग्स केस में फंसाने की धमकी देकर ₹5 लाख की वसूली की कोशिश, 2 कांस्टेबल समेत 5 हिरासत में
AIN NEWS 1 पुणे: महाराष्ट्र के पुणे जिले से कानून व्यवस्था को लेकर एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि हाईवे स्टेट पुलिस से जुड़े दो कांस्टेबल और तीन ट्रैफिक वार्डन ने लोनावला जा रहे एक परिवार को रास्ते में रोककर उन्हें झूठे ड्रग्स केस में फंसाने की धमकी दी और बदले में पांच लाख रुपये की मांग की। पीड़ित परिवार की शिकायत के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पांच आरोपियों को हिरासत में ले लिया है, जबकि एक अन्य संदिग्ध की तलाश जारी है। यह मामला पुलिस की कार्यशैली और आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े कर रहा है।

क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार यह घटना 5 और 6 जुलाई की रात की है। शिकायतकर्ता अपने एक मित्र और उसके परिवार के साथ कार से लोनावला घूमने जा रहा था। यात्रा के दौरान रास्ते में कुछ लोगों ने उनकी कार को रोक लिया। इन लोगों ने खुद को हाईवे स्टेट पुलिस से जुड़ा बताया। इनमें खाकी वर्दी पहने पुलिसकर्मी और ट्रैफिक वार्डन शामिल थे। सभी ने रिफ्लेक्टिव जैकेट पहन रखी थी, जिस पर “HSP (Highway State Police)” लिखा हुआ था।
शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने परिवार को डराते हुए कहा कि उनके खिलाफ ड्रग्स से जुड़ा मामला दर्ज किया जा सकता है। इसके बाद उन्होंने कथित रूप से मामला रफा-दफा करने के लिए ₹5 लाख की मांग की। परिवार भयभीत हो गया और आरोपियों के दबाव में आ गया।
एटीएम तक ले गए आरोपी
पीड़ित परिवार का आरोप है कि आरोपी उन्हें तलेगांव के पास एक एटीएम तक ले गए ताकि पैसे निकलवाए जा सकें। इसी दौरान शिकायतकर्ता के मित्र ने अपनी स्मार्ट वॉच के जरिए चुपके से एक परिचित को संदेश भेज दिया। इस संदेश से पूरे घटनाक्रम की जानकारी बाहर पहुंच गई।
जब आरोपियों को इस बात का आभास हुआ कि किसी को सूचना भेजी जा चुकी है, तो उनमें से दो लोग अपनी एसयूवी में बैठकर मौके से फरार हो गए, जबकि अन्य मौके पर मौजूद रहे।
शिकायत के बाद तुरंत हुई कार्रवाई
घटना के बाद पीड़ित परिवार सीधे कामशेत पुलिस थाने पहुंचा और पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने तत्काल जांच शुरू की।
प्रारंभिक जांच के आधार पर पुलिस ने दो कांस्टेबल और तीन ट्रैफिक वार्डन सहित पांच लोगों को हिरासत में ले लिया है। मामले में शामिल एक अन्य आरोपी अभी फरार बताया जा रहा है, जिसकी तलाश जारी है। पुलिस पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच कर रही है।
कई महत्वपूर्ण पहलुओं की जांच
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि—
क्या यह किसी संगठित वसूली गिरोह का हिस्सा था?
क्या आरोपियों ने पहले भी इसी तरह लोगों को निशाना बनाया है?
क्या सरकारी पद और वर्दी का दुरुपयोग कर लोगों से अवैध वसूली की जाती थी?
फरार आरोपी की भूमिका क्या थी?
यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो आरोपियों पर जबरन वसूली, आपराधिक धमकी, धोखाधड़ी और अन्य गंभीर धाराओं के तहत कार्रवाई हो सकती है।
पुलिस विभाग की साख पर सवाल
यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब आम नागरिक पुलिस से सुरक्षा और निष्पक्ष कार्रवाई की अपेक्षा रखते हैं। यदि पुलिसकर्मी ही कानून का भय दिखाकर लोगों से धन उगाही करने लगें, तो जनता का भरोसा प्रभावित होना स्वाभाविक है।
हालांकि, इस मामले में शिकायत दर्ज होने के बाद संबंधित पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपियों को हिरासत में लिया है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि घटना की वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं और दोषियों के खिलाफ आगे क्या कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
जांच जारी
फिलहाल पुलिस सभी उपलब्ध साक्ष्यों, पीड़ितों के बयान और घटनास्थल से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है। फरार आरोपी की तलाश जारी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच निष्पक्ष तरीके से पूरी की जाएगी और दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को कानून के अनुसार कार्रवाई का सामना करना होगा।
A shocking Pune Police extortion case has surfaced after two police constables and three wardens were detained for allegedly threatening a family with a fake drug case and demanding ₹5 lakh on the Pune-Lonavala Highway. The incident reportedly occurred on the night of July 5–6, leading to a complaint at Kamshet Police Station. Authorities have launched an investigation into the alleged police misconduct, misuse of official authority, and attempted extortion, while one suspect remains absconding. This developing Maharashtra crime news has raised serious concerns about accountability and public trust in law enforcement.


















