राजस्थान के डीग में दो ठिकानों पर पुलिस और खाद्य सुरक्षा विभाग की छापेमारी, दो आरोपी गिरफ्तार; मुख्य संचालकों की तलाश जारी
AIN NEWS 1: राजस्थान के डीग जिले से मिलावटी पनीर के कारोबार को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। यहां पुलिस और खाद्य सुरक्षा विभाग की संयुक्त टीम ने दो अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी कर करीब 1,800 किलोग्राम संदिग्ध मिलावटी पनीर बरामद किया। अधिकारियों की निगरानी में इस पनीर को मौके पर ही नष्ट करा दिया गया। शुरुआती जांच में सामने आया कि कथित तौर पर पनीर तैयार करने के लिए पारंपरिक दूध के बजाय सोयाबीन तेल, रिफाइंड पामोलीन ऑयल, स्किम्ड मिल्क पाउडर (SMP) और अन्य पाउडर का इस्तेमाल किया जा रहा था।
इस मामले ने एक बार फिर खाद्य पदार्थों में मिलावट और आम लोगों की सेहत से जुड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस के अनुसार, इन ठिकानों पर तैयार होने वाले पनीर की आपूर्ति दिल्ली-NCR, उत्तर प्रदेश और हरियाणा के विभिन्न बाजारों तक किए जाने की जानकारी मिली है। हालांकि, किसी खास दुकान या बाजार में इस खेप की बिक्री की पुष्टि अलग से जांच के बाद ही हो सकेगी।
डीग में पुलिस और खाद्य सुरक्षा विभाग का संयुक्त अभियान
24 अक्टूबर 2026 को सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, डीग जिले के कैथवाड़ा थाना क्षेत्र में मिलावटी पनीर बनाने वाले दो ठिकानों पर कार्रवाई की गई। पुलिस को सूचना मिली थी कि इलाके में संदिग्ध तरीके से पनीर तैयार कर दूसरे राज्यों में भेजा जा रहा है।
सूचना के आधार पर पुलिस, जिला विशेष टीम और खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों ने संयुक्त अभियान चलाया। छापेमारी के दौरान दोनों स्थानों से कुल करीब 1,800 किलो पनीर बरामद हुआ। अधिकारियों ने खाद्य सुरक्षा मानकों के उल्लंघन की आशंका के चलते पनीर को नष्ट कराया और निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री भी जब्त की।
कार्रवाई के दौरान दो लोगों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई है। वहीं, कथित तौर पर इन इकाइयों का संचालन करने वाले कुछ अन्य लोगों की तलाश की जा रही है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।
पहली कार्रवाई: जाजमका गांव में मिला 1,600 किलो पनीर
पुलिस की पहली कार्रवाई जाजमका गांव में एक मकान में संचालित डेयरी पर हुई। रिपोर्टों के अनुसार, इस ठिकाने पर मकसूद नामक व्यक्ति की डेयरी चलने की जानकारी सामने आई है।
जब पुलिस टीम मौके पर पहुंची तो वहां मौजूद कुछ लोग भागने लगे। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए साहिल नामक व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया। बताया गया कि वह वहां मुनीम के तौर पर काम करता था।
इस स्थान से लगभग 1,600 किलोग्राम संदिग्ध मिलावटी पनीर बरामद किया गया। इसके अलावा पाउडर और तेल से संबंधित सामग्री भी मिली। खाद्य सुरक्षा विभाग की मौजूदगी में बरामद पनीर को मौके पर नष्ट करा दिया गया।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि यहां कितने समय से पनीर तैयार किया जा रहा था, प्रतिदिन कितना उत्पादन होता था और तैयार माल किन कारोबारियों तक पहुंचाया जाता था।
दूसरी कार्रवाई: मांची के जंगल में चल रही थी डेयरी
दूसरी छापेमारी मांची के जंगल क्षेत्र में स्थित एक अन्य डेयरी इकाई पर की गई। रिपोर्टों के अनुसार, इस ठिकाने का संबंध अयूब और मुफीद नामक व्यक्तियों से बताया गया है।
पुलिस ने यहां से अली उर्फ अलीजान नामक व्यक्ति को गिरफ्तार किया। मौके पर करीब 200 किलोग्राम संदिग्ध पनीर मिला, जिसे नष्ट करा दिया गया। इसके साथ ही स्किम्ड मिल्क पाउडर के कट्टे, रिफाइंड पामोलीन ऑयल, सोयाबीन तेल और मशीन क्लीनिंग पाउडर से संबंधित सामग्री बरामद होने की जानकारी दी गई है।
कार्रवाई के दौरान एक पिकअप वाहन भी जब्त किया गया। आशंका है कि इस वाहन का इस्तेमाल सामग्री या तैयार उत्पाद को लाने-ले जाने में किया जाता था। इसकी वास्तविक भूमिका का पता जांच के बाद ही चलेगा।
दोनों ठिकानों पर हुई कार्रवाई के बाद संबंधित इकाइयों को बंद कराने और कथित मुख्य संचालकों की तलाश किए जाने की जानकारी सामने आई है।
किन चीजों से तैयार किया जा रहा था कथित नकली पनीर?
इस मामले में सबसे अहम सवाल पनीर बनाने की प्रक्रिया को लेकर है। सामान्य पनीर दूध को फाड़कर या जमाकर तैयार किया जाता है। लेकिन छापेमारी में मिली सामग्री के आधार पर अधिकारियों को आशंका है कि यहां पारंपरिक तरीके के बजाय अलग-अलग तेल और पाउडर मिलाकर पनीर जैसा उत्पाद तैयार किया जा रहा था।
जांच से जुड़ी रिपोर्टों में निम्न सामग्री का उल्लेख किया गया है:
– सोयाबीन तेल: वनस्पति तेल, जिसका इस्तेमाल कथित तौर पर मिश्रण तैयार करने में किया जा रहा था।
– रिफाइंड पामोलीन ऑयल: खाद्य तेल, जो बरामद सामग्री में शामिल बताया गया है।
– SMP यानी स्किम्ड मिल्क पाउडर: ऐसा दूध पाउडर जिसमें वसा की मात्रा कम होती है और जिसका इस्तेमाल खाद्य उद्योग में किया जाता है।
– मशीन क्लीनिंग पाउडर: इस नाम से बताई गई सामग्री की वास्तविक संरचना और उपयोग की पुष्टि जांच से होना जरूरी है।
यह स्पष्ट करना जरूरी है कि किसी तेल या मिल्क पाउडर का इस्तेमाल अपने आप में मिलावट का प्रमाण नहीं है। खाद्य सुरक्षा मानकों के विपरीत सामग्री का इस्तेमाल, उत्पाद की गलत पहचान और गैर-खाद्य पदार्थों का मिश्रण गंभीर उल्लंघन हो सकता है। इस मामले में बरामद सामग्री की सटीक संरचना और तैयार उत्पाद की गुणवत्ता की पुष्टि संबंधित जांच से ही होगी।
दिल्ली-NCR, यूपी और हरियाणा तक सप्लाई का दावा
इस कार्रवाई का सबसे महत्वपूर्ण पहलू कथित सप्लाई नेटवर्क है। पुलिस की शुरुआती पूछताछ से संबंधित रिपोर्टों में बताया गया है कि तैयार पनीर को राजस्थान से बाहर भी भेजा जाता था।
जिन इलाकों के नाम सामने आए हैं, उनमें दिल्ली, गुरुग्राम, नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद और ग्रेटर नोएडा शामिल हैं। इसके अलावा हरियाणा और उत्तर प्रदेश के अन्य बाजारों में भी आपूर्ति किए जाने की बात कही गई है।
रिपोर्टों के मुताबिक, यह उत्पाद दो से तीन दिन के अंतराल पर तैयार करके बाजारों तक पहुंचाया जाता था। हालांकि, इस दावे की पूरी पुष्टि के लिए पुलिस को खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड, परिवहन संबंधी जानकारी, संबंधित कारोबारियों और अन्य साक्ष्यों की जांच करनी होगी।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी से यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि दिल्ली-NCR के सभी बाजारों में मिलावटी पनीर बिक रहा है या किसी विशेष दुकान से खरीदा गया पनीर इसी नेटवर्क का हिस्सा है।
सेहत के लिए क्यों चिंता का विषय है मिलावटी पनीर?
पनीर का इस्तेमाल घरों के अलावा होटल, रेस्तरां, ढाबों, मिठाई की दुकानों और शादी-पार्टियों में बड़े पैमाने पर होता है। इसलिए यदि किसी क्षेत्र में असुरक्षित या गलत तरीके से तैयार किया गया पनीर बाजार तक पहुंचता है, तो बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हो सकते हैं।
खाद्य पदार्थ में गैर-खाद्य रसायन, असुरक्षित सामग्री या दूषित पदार्थ मिलाए जाने पर स्वास्थ्य संबंधी जोखिम पैदा हो सकते हैं। ऐसे उत्पादों से पेट संबंधी परेशानी, उल्टी-दस्त या अन्य प्रतिकूल प्रभाव हो सकते हैं। वास्तविक खतरा इस्तेमाल की गई सामग्री, उसकी मात्रा, उत्पाद की स्वच्छता और सेवन की स्थिति पर निर्भर करता है।
यह भी ध्यान रखना चाहिए कि केवल रंग, गंध, स्वाद या बनावट देखकर हर प्रकार के मिलावटी पनीर की विश्वसनीय पहचान करना संभव नहीं है। किसी उत्पाद के संदिग्ध होने पर उसकी प्रयोगशाला जांच अधिक भरोसेमंद तरीका है।
ग्राहक पनीर खरीदते समय क्या सावधानी बरतें?
खाद्य पदार्थों में मिलावट से बचने के लिए उपभोक्ता कुछ सामान्य सावधानियां अपना सकते हैं।
सबसे पहले, पनीर किसी भरोसेमंद विक्रेता से खरीदें और संभव हो तो पैकबंद उत्पाद पर निर्माता का नाम, बैच नंबर, निर्माण एवं उपयोग की तारीख और FSSAI लाइसेंस या पंजीकरण संबंधी विवरण देखें।
खुले पनीर की खरीद करते समय उसकी स्वच्छता और उचित तापमान पर रखे जाने पर ध्यान दें। असामान्य गंध, रंग या बनावट वाला उत्पाद न खरीदें। हालांकि, सामान्य दिखने वाला पनीर भी जांच के बिना पूरी तरह सुरक्षित प्रमाणित नहीं माना जा सकता।
यदि किसी दुकान या डेयरी में मिलावट का संदेह हो तो संबंधित राज्य के खाद्य सुरक्षा विभाग या स्थानीय प्रशासन को शिकायत दी जा सकती है। जरूरत पड़ने पर खाद्य सुरक्षा अधिकारी नमूना लेकर जांच करा सकते हैं।
आगे क्या होगी कार्रवाई?
डीग में हुई छापेमारी के बाद पुलिस की प्राथमिकता कथित मुख्य संचालकों और उनके सहयोगियों तक पहुंचना, पनीर की सप्लाई से जुड़े लोगों की पहचान करना और बरामद सामग्री के स्रोत का पता लगाना है।
खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में नमूनों की गुणवत्ता, सामग्री की प्रकृति और खाद्य सुरक्षा नियमों के संभावित उल्लंघन जैसे पहलुओं का महत्व रहेगा। मामले में कानूनी जिम्मेदारी तय करने के लिए जांच के निष्कर्ष और उपलब्ध साक्ष्य अहम होंगे।
निष्कर्ष: राजस्थान के डीग जिले में करीब 1,800 किलो संदिग्ध मिलावटी पनीर की बरामदगी और उसे नष्ट किए जाने की कार्रवाई खाद्य सुरक्षा के लिहाज से गंभीर मामला है। दिल्ली-NCR, उत्तर प्रदेश और हरियाणा तक कथित सप्लाई की जानकारी के कारण जांच का दायरा भी महत्वपूर्ण हो गया है। अब यह देखना होगा कि जांच एजेंसियां इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और बाजारों तक पहुंचती हैं या नहीं। उपभोक्ताओं के लिए जरूरी है कि वे खाद्य पदार्थों की खरीद में सावधानी बरतें और मिलावट की आशंका होने पर संबंधित विभाग को सूचना दें।
Rajasthan’s Deeg district has witnessed a major food safety crackdown after authorities seized and destroyed 1,800 kg of suspected adulterated paneer during raids at two locations. Police reportedly arrested two people, while the investigation focuses on the alleged use of soybean oil, refined palmolein oil, skimmed milk powder (SMP) and other substances in paneer production. Investigators are also examining claims that the product was supplied to markets across Delhi-NCR, Uttar Pradesh and Haryana. The Deeg fake paneer case highlights growing concerns about food adulteration, dairy product quality and consumer safety in India.



















