AIN NEWS 1 नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सह-संयोजक सौरव दास को दिल्ली में अपने वर्तमान आवासीय पते का प्रमाण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) की अदालत में हुई सुनवाई के दौरान उनके दिल्ली स्थित आवास से जुड़े दस्तावेजों के सत्यापन का मुद्दा उठा। अदालत ने पाया कि प्रस्तुत दस्तावेजों से उनके मौजूदा पते की पुष्टि के लिए अतिरिक्त प्रमाण की जरूरत है। इसके बाद सौरव दास की कानूनी टीम ने आवश्यक दस्तावेज जुटाने के लिए समय मांगा, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर 2026 को होगी।
यह मामला उस कार्रवाई से जुड़ा है, जिसके बाद सौरव दास और कॉकरोच जनता पार्टी के एक अन्य सह-संयोजक आशुतोष रांका को कई दिनों तक न्यायिक हिरासत में रहने के बाद राहत मिली थी। दोनों नेताओं को शांति बनाए रखने से संबंधित शर्तों और मुचलके की प्रक्रिया पूरी करने के बाद 21 अक्टूबर को रिहा किया गया था।
SEM कोर्ट में क्यों उठा दिल्ली के पते का मुद्दा?
सौरव दास और आशुतोष रांका शुक्रवार को अपने जमानतदारों के साथ SEM कोर्ट में पेश हुए थे। इस दौरान अदालत में उनके आवासीय पते और जमानतदारों की ओर से प्रस्तुत दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया पर चर्चा हुई।
दिल्ली पुलिस की ओर से पेश अधिवक्ताओं प्रशांत प्रकाश और भैरव दास ने सौरव दास के दिल्ली में रहने की पुष्टि करने वाले दस्तावेजों को लेकर सवाल उठाए। पुलिस पक्ष का कहना था कि उपलब्ध कराए गए कागजात से यह पर्याप्त रूप से स्पष्ट नहीं होता कि सौरव दास वर्तमान में दिल्ली में किस पते पर रह रहे हैं।
अदालत के सामने यह बात भी आई कि उनके दस्तावेजों में ऐसा रेंट एग्रीमेंट या लीज संबंधी कागजात उपलब्ध नहीं था, जिससे उनके मौजूदा दिल्ली आवास की पुष्टि की जा सके। इसी कारण उनके पते का सत्यापन पूरा नहीं हो पाया।
हालांकि, इस स्तर पर दस्तावेजों की कमी को अपने आप में किसी अपराध का प्रमाण नहीं माना जा सकता। मामले में संबंधित दस्तावेजों की जांच और पते का सत्यापन होना बाकी है।
सौरव दास की कानूनी टीम ने मांगा समय
अदालत में दस्तावेजों से संबंधित आपत्ति सामने आने के बाद सौरव दास की कानूनी टीम ने आवश्यक कागजात जुटाने के लिए अतिरिक्त समय देने का अनुरोध किया। अदालत ने इस मांग को स्वीकार कर लिया और अगली सुनवाई के लिए 17 नवंबर की तारीख निर्धारित की।
अब अगली तारीख पर उनके वर्तमान आवासीय पते से संबंधित दस्तावेजों की जांच की जाएगी। जरूरत पड़ने पर संबंधित अधिकारी भी पते का सत्यापन कर सकते हैं।
इस सुनवाई का मुख्य उद्देश्य आवासीय पते और जमानतदारों से जुड़े दस्तावेजों की पुष्टि करना था। इसलिए इसे मामले में अंतिम फैसला या किसी आरोप पर दोषसिद्धि के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
पुडुचेरी के पते वाले आधार कार्ड को लेकर भी चर्चा
मामले से संबंधित मीडिया रिपोर्टों में यह भी बताया गया है कि सौरव दास के आधार कार्ड पर पुडुचेरी का पता दर्ज है, जबकि दिल्ली में उनके वर्तमान आवास की पुष्टि के लिए दस्तावेज मांगे गए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, ग्रेटर कैलाश स्थित आवास के रेंट एग्रीमेंट को लेकर भी पुलिस पक्ष ने सवाल उठाए हैं।
कुछ रिपोर्टों में पुलिस सूत्रों के हवाले से उक्त रेंट एग्रीमेंट की प्रामाणिकता पर संदेह जताए जाने की बात कही गई है। हालांकि, इन दावों को अंतिम रूप से प्रमाणित तथ्य मानने से पहले संबंधित दस्तावेजों और आधिकारिक रिकॉर्ड की पुष्टि जरूरी है।
किसी व्यक्ति के पहचान पत्र पर दूसरे स्थान का पता होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि वह दिल्ली में नहीं रहता। इसी तरह, किसी दस्तावेज पर सवाल उठना और उसका फर्जी साबित होना दो अलग-अलग बातें हैं। दस्तावेजों की वास्तविक स्थिति संबंधित जांच और सत्यापन से ही स्पष्ट होगी।
क्या है पीस बॉन्ड और क्यों भरवाया गया?
पीस बॉन्ड का सामान्य अर्थ ऐसा बंधपत्र या लिखित आश्वासन है, जिसके माध्यम से संबंधित व्यक्ति निर्धारित अवधि या शर्तों के अनुसार शांति और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने की प्रतिबद्धता देता है।
इस मामले में पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 170 के तहत एहतियाती कार्रवाई की थी। पुलिस की ओर से शांति भंग होने की आशंका जताई गई थी। इसके बाद सौरव दास और आशुतोष रांका को न्यायिक हिरासत में रखा गया।
दोनों नेताओं को 21 अक्टूबर को SEM कोर्ट से राहत मिली। इसके लिए उन्होंने 50,000 रुपये के व्यक्तिगत मुचलके और इतनी ही राशि के जमानती मुचलके की शर्त पूरी की थी।
रिहाई की प्रक्रिया में दोनों नेताओं ने लिखित आश्वासन दिया कि वे शांति, कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक सौहार्द बनाए रखेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक जंतर-मंतर को नियमानुसार फिर से निर्धारित प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित नहीं किया जाता, तब तक वे वहां प्रदर्शन के लिए आह्वान नहीं करेंगे। साथ ही, उन्होंने भविष्य में संवैधानिक दायरे में रहकर गतिविधियां संचालित करने की प्रतिबद्धता जताई।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान शुरू हुआ था मामला
इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि 12 अक्टूबर 2026 को जंतर-मंतर पर हुई घटना से जुड़ी है। सौरव दास और आशुतोष रांका पर आरोप है कि वे निर्धारित प्रतिबंधों के बावजूद जंतर-मंतर के प्रतिबंधित प्रदर्शन क्षेत्र में प्रवेश कर गए थे।
उस समय विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत मतदाता सूचियों में बदलाव को लेकर विरोध-प्रदर्शन हो रहे थे। इन प्रदर्शनों के दौरान मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ भी विरोध दर्ज कराया जा रहा था।
पुलिस की कार्रवाई के बाद दोनों नेताओं को हिरासत में लिया गया और फिर न्यायिक हिरासत में भेजा गया। लगभग एक सप्ताह बाद SEM कोर्ट से उन्हें राहत मिली। अदालत में दिए गए आश्वासनों और मुचलके की प्रक्रिया के बाद उनकी रिहाई का रास्ता साफ हुआ।
यहां यह अंतर समझना जरूरी है कि पीस बॉन्ड से जुड़ी कार्यवाही एहतियाती प्रकृति की है। इससे संबंधित आरोपों और किसी अन्य आपराधिक जांच की कानूनी स्थिति अलग हो सकती है।
आशुतोष रांका के दस्तावेजों का सत्यापन हुआ
23 अक्टूबर की सुनवाई के दौरान दोनों नेताओं और उनके जमानतदारों के दस्तावेजों की जांच की गई। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, आशुतोष रांका और उनकी पत्नी, जो उनकी जमानतदार भी हैं, के पते से संबंधित सत्यापन पूरा हो गया था। वहीं, सौरव दास के मौजूदा आवासीय पते की पुष्टि के लिए अतिरिक्त दस्तावेजों की आवश्यकता बनी रही।
इसी कारण अदालत ने मामले को आगे की जांच और सत्यापन के लिए अगली तारीख पर सूचीबद्ध किया। सौरव दास को अब अपने वर्तमान पते के समर्थन में आवश्यक कागजात प्रस्तुत करने होंगे।
17 नवंबर को होगी अगली सुनवाई
सौरव दास के आवासीय पते से संबंधित दस्तावेजों की जांच के लिए अदालत ने 17 नवंबर 2026 की तारीख तय की है। अगली सुनवाई में यह स्पष्ट हो सकेगा कि प्रस्तुत दस्तावेज उनके दिल्ली स्थित वर्तमान पते की पुष्टि करने के लिए पर्याप्त हैं या नहीं।
फिलहाल अदालत के निर्देश का केंद्र आवासीय पते का सत्यापन है। रेंट एग्रीमेंट को लेकर उठे सवालों पर अंतिम निष्कर्ष और दस्तावेजों की वास्तविक स्थिति आगे की प्रक्रिया से स्पष्ट होगी।
कॉकरोच जनता पार्टी के सह-संयोजक सौरव दास को SEM कोर्ट में दिल्ली में रहने का प्रमाण प्रस्तुत करना है। पुलिस पक्ष ने उनके आवासीय दस्तावेजों पर सवाल उठाए हैं, जबकि उनकी कानूनी टीम ने जरूरी कागजात जुटाने के लिए समय मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर को होगी। तब तक दस्तावेजों के सत्यापन और अदालत की आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।
Cockroach Janta Party (CJP) co-convener Saurav Das has been directed by a Special Executive Magistrate (SEM) court in Delhi to submit documents verifying his current residential address. The issue arose during proceedings related to an alleged peace bond violation following the Jantar Mantar protest incident. Delhi Police counsel questioned the documents submitted as proof of residence, including the absence of a satisfactory rent agreement or lease document. Das’s legal team requested additional time to arrange the necessary paperwork. The next hearing is scheduled for November 17, 2026, when the court is expected to examine the residential documents and verification status.



















