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रोहिणी घावरी की यूपी राजनीति में एंट्री: सपा के साथ 200 सभाओं का प्लान, चंद्रशेखर आजाद पर सीधा हमला!

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AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले नई हलचल शुरू हो गई है। इस बार चर्चा में हैं डॉ. रोहिणी घावरी, जो अब सक्रिय राजनीति में कदम रखने जा रही हैं। अब तक विदेश में रहकर काम कर रहीं रोहिणी ने समाजवादी पार्टी के साथ जुड़कर यूपी में बड़ा अभियान चलाने का ऐलान किया है। उनका यह कदम सीधे तौर पर Chandrashekhar Azad की राजनीति को चुनौती देने वाला माना जा रहा है।

https://x.com/DrRohinighavari/status/2042545270659961179?ref_src=twsrc%5Etfw%7Ctwcamp%5Etweetembed%7Ctwterm%5E2042545270659961179%7Ctwgr%5E5680eeaa9cf1a7a453df1107d357e674f5e4cbab%7Ctwcon%5Es1_c10&ref_url=https%3A%2F%2Fwww.patrika.com%2Flucknow-news%2Fup-politics-chandrashekhar-azad-ex-girlfriend-rohini-ghavari-will-hold-200-rallies-for-akhliesh-yadav-in-assembly-elections-2027-20491701

🔹 सपा के साथ जुड़ने का फैसला कैसे हुआ?

रोहिणी घावरी ने हाल ही में एक इंटरव्यू में बताया कि उनकी Akhilesh Yadav से फोन पर बातचीत हुई थी। यह बातचीत 7 अप्रैल को हुई, जिसमें उन्होंने साफ तौर पर पूछा कि क्या समाजवादी पार्टी भविष्य में चंद्रशेखर आजाद के साथ कोई गठबंधन करेगी।

अखिलेश यादव का जवाब स्पष्ट था—“कभी नहीं”।

यही वह मोड़ था, जहां से रोहिणी ने सपा के साथ जुड़ने का फैसला कर लिया।

इसके अगले दिन यानी 8 अप्रैल को उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट लिखी, जिसमें उन्होंने कहा कि अब वे उत्तर प्रदेश में सक्रिय राजनीति करेंगी और जल्द ही 200 सभाओं का अभियान शुरू करेंगी।

https://x.com/DrRohinighavari/status/2041810306783949304?ref_src=twsrc%5Etfw%7Ctwcamp%5Etweetembed%7Ctwterm%5E2041810306783949304%7Ctwgr%5E5680eeaa9cf1a7a453df1107d357e674f5e4cbab%7Ctwcon%5Es1_c10&ref_url=https%3A%2F%2Fwww.patrika.com%2Flucknow-news%2Fup-politics-chandrashekhar-azad-ex-girlfriend-rohini-ghavari-will-hold-200-rallies-for-akhliesh-yadav-in-assembly-elections-2027-20491701

🔹 विदेश से वापसी और बड़ा राजनीतिक प्लान

रोहिणी फिलहाल स्विट्जरलैंड में नौकरी कर रही हैं, लेकिन उन्होंने साफ किया है कि जून महीने में वे भारत लौटेंगी। वापसी के बाद उनका पूरा फोकस उत्तर प्रदेश की राजनीति पर होगा।

उनकी रणनीति काफी स्पष्ट है:

पूरे यूपी में करीब 200 छोटी-बड़ी सभाएं

हर क्षेत्र में सीधा संवाद अभियान

दलित समाज, खासकर नॉन-जाटव समुदाय पर फोकस

इन सभाओं के बाद आगरा या लखनऊ में एक बड़ी रैली का आयोजन किया जाएगा, जिसमें अखिलेश यादव मुख्य अतिथि होंगे।

🔹 किस पर रहेगा फोकस?

रोहिणी घावरी का कहना है कि उत्तर प्रदेश में दलित समाज की आबादी लगभग 20-21% है। इसमें:

करीब 12% जाटव

करीब 10% नॉन-जाटव दलित

वे खास तौर पर पासी और वाल्मीकि समुदाय पर ध्यान देने की बात कर रही हैं।

उनका दावा है:

पासी समाज की संख्या करीब 65 लाख

वाल्मीकि समाज की संख्या करीब 13 लाख

रोहिणी का मानना है कि ये समुदाय समाज और व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, लेकिन राजनीति में इन्हें उतनी हिस्सेदारी नहीं मिल पाई।

🔹 चंद्रशेखर आजाद पर तीखा हमला

रोहिणी घावरी ने अपने बयानों में Chandrashekhar Azad पर खुलकर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि:

“चंद्रशेखर को वोट देना मतलब बीजेपी को फायदा पहुंचाना है।”

उनका आरोप है कि दलित राजनीति के नाम पर लोगों को गुमराह किया जा रहा है और असल मुद्दों से ध्यान हटाया जा रहा है।

रोहिणी का कहना है कि वे अब “सच्चाई” लोगों के सामने लाने के लिए मैदान में उतर रही हैं।

🔹 विदेश में भी सक्रियता, टीम तैयार

भारत लौटने से पहले रोहिणी घावरी यूरोप में भी सक्रिय हैं। वे इटली और पेरिस में अपने समर्थकों और सहयोगियों के साथ बैठक कर रही हैं।

इन बैठकों का मकसद है:

एक मजबूत टीम तैयार करना

ग्राउंड लेवल नेटवर्क बनाना

अभियान की रणनीति तय करना

उन्होंने कहा कि यूपी के कई सामाजिक और स्थानीय नेताओं से उनकी बातचीत हो चुकी है और वे उनके साथ जुड़ने के लिए तैयार हैं।

🔹 एनजीओ के जरिए सामाजिक काम

रोहिणी सिर्फ राजनीति ही नहीं, बल्कि सामाजिक कामों पर भी जोर दे रही हैं। वे अपने एनजीओ के माध्यम से हाशिए पर रहने वाले लोगों के लिए काम करने की बात कर रही हैं।

उनका कहना है कि:

शिक्षा

स्वास्थ्य

सामाजिक जागरूकता

इन क्षेत्रों में काम करके वे समाज को मजबूत बनाना चाहती हैं।

🔹 यूपी की राजनीति पर क्या असर पड़ेगा?

राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, रोहिणी घावरी की एंट्री से यूपी की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

संभावित असर:

नॉन-जाटव दलित वोट बैंक में हलचल

सपा को नया सामाजिक आधार मिल सकता है

चंद्रशेखर आजाद की पकड़ कमजोर हो सकती है

अगर रोहिणी अपने अभियान में सफल होती हैं, तो दलित वोटों का बंटवारा और बढ़ सकता है, जिससे चुनावी समीकरण बदल सकते हैं।

🔹 आगे क्या?

रोहिणी घावरी ने साफ किया है कि वे कम से कम एक साल तक उत्तर प्रदेश में सक्रिय रहेंगी और लगातार जनसंपर्क अभियान चलाएंगी।

उनका लक्ष्य है:

समाज को राजनीतिक रूप से जागरूक करना

नए नेतृत्व को सामने लाना

और खुद को एक मजबूत नेता के रूप में स्थापित करना

  1. अब देखना दिलचस्प होगा कि 2027 के चुनाव से पहले उनका यह अभियान कितना असर डालता है।

 

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