spot_imgspot_img

बिना इंक्रीमेंट के 1 लाख से ज्यादा बढ़ गई सैलरी, रुपये-डॉलर के उतार-चढ़ाव ने कैसे बदल दिया पूरा हिसाब?

spot_img

Date:

AIN NEWS 1 | भारतीय रुपये और अमेरिकी डॉलर का रिश्ता हमेशा से ही आम लोगों और निवेशकों के बीच चर्चा का विषय रहा है। यह सिर्फ शेयर बाजार या आयात-निर्यात तक ही सीमित नहीं है, बल्कि सीधे-सीधे हर उस व्यक्ति को प्रभावित करता है जो विदेश में काम करता है या फिर किसी अंतरराष्ट्रीय लेन-देन से जुड़ा है। हाल ही में रुपये में आई गिरावट ने कई दिलचस्प नतीजे दिखाए हैं, जिनमें से एक यह है कि बिना किसी वेतन वृद्धि (Increment) के भी भारत में बैठे कर्मचारी की सैलरी 1 लाख रुपये से ज्यादा बढ़ गई है।

आइए समझते हैं कि आखिर यह पूरा खेल कैसे काम करता है और रुपये की गिरावट ने किस तरह से विदेशों में काम करने वाले भारतीयों की जेब को अप्रत्यक्ष रूप से फायदा पहुंचाया।

रुपये-डॉलर का ताजा हाल

शुक्रवार, 26 सितंबर 2025 को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 6 पैसे मजबूत होकर 88.70 पर बंद हुआ। एक दिन पहले यानी गुरुवार को भी रुपये ने थोड़ी मजबूती दिखाई थी और 88.68 पर बंद हुआ था। हालांकि, पिछले कुछ महीनों में रुपये की कमजोरी लगातार चर्चा का विषय रही है।

रुपये की इस स्थिति पर कई वैश्विक और घरेलू कारण असर डाल रहे हैं—जैसे कि अमेरिका की ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता, भारत-अमेरिका के बीच चल रही ट्रेड डील की बातचीत, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और H1-B वीजा फीस में बढ़ोतरी।

शेयर बाजार पर असर

रुपये की गिरावट का सीधा असर शेयर बाजार पर भी दिखा। गुरुवार को बीएसई सेंसेक्स 555.95 अंक गिरकर 81,159.68 पर बंद हुआ, जो लगातार पांचवें दिन गिरावट का संकेत था। वहीं, एनएसई निफ्टी 166.05 अंक टूटकर 24,890.85 पर बंद हुआ।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली इसका बड़ा कारण रही। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) लगातार भारतीय शेयरों से पैसा निकाल रहे हैं, जिससे बाजार पर दबाव बना हुआ है।

चालू वित्त वर्ष में रुपया कितना गिरा?

अगर पूरे आंकड़ों पर नजर डालें तो चालू वित्त वर्ष में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगभग 2.15% गिरा है। साल 2025 की शुरुआत से अब तक इसमें कुल 2.30% की गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि अगस्त के महीने में इसमें 0.20% की मजबूती भी आई थी।

LKP सिक्योरिटीज के वाइस प्रेसिडेंट (कमोडिटी एवं करेंसी) जतिन त्रिवेदी के मुताबिक, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और अमेरिकी टैरिफ नीति को लेकर चिंताओं ने रुपये को कमजोर बनाए रखा है।

रुपये-डॉलर का खेल: सैलरी कैसे बढ़ी बिना इंक्रीमेंट?

अब बात करते हैं उस दिलचस्प हिस्से की जिसने हजारों भारतीयों का ध्यान खींचा है। मान लीजिए कि किसी भारतीय ने साल की शुरुआत में अमेरिका में 5,00,000 डॉलर की नौकरी ली। उस समय अगर 1 डॉलर की कीमत लगभग 87.60 रुपये थी, तो उसकी सालाना सैलरी भारत में करीब 43,33,484 रुपये होती।

लेकिन सितंबर तक रुपये में 2.30% की गिरावट आने के बाद अब वही 1 डॉलर की कीमत बढ़कर 88.70 रुपये हो गई। इसका मतलब है कि बिना किसी वेतन वृद्धि के अब उसकी सालाना सैलरी भारत में बदलकर लगभग 44,35,500 रुपये हो जाएगी।

यानी, सिर्फ रुपये की कमजोरी की वजह से उसकी सैलरी में लगभग 1,02,000 रुपये का इजाफा हो गया—वह भी बिना कंपनी से इंक्रीमेंट पाए!

किसे होता है फायदा और किसे नुकसान?

➡️ फायदा
विदेशों में काम करने वाले भारतीय (NRI) या वे लोग जो डॉलर में कमाते हैं और भारत में पैसा भेजते हैं, उन्हें रुपये की गिरावट से बड़ा फायदा होता है। उनके भेजे गए डॉलर भारत में ज्यादा रुपये में बदलते हैं, जिससे उनकी आय स्वतः बढ़ जाती है।

➡️ नुकसान
लेकिन इसका उल्टा असर आयात करने वाली कंपनियों और आम उपभोक्ताओं पर पड़ता है। कच्चा तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और अन्य आयातित सामान महंगा हो जाता है। इसका बोझ अंततः आम आदमी की जेब पर भी पड़ता है।

रुपये की गिरावट क्यों अहम है?

  1. महंगाई पर असर – रुपये की कमजोरी से आयातित सामान महंगा होता है, जिससे महंगाई बढ़ सकती है।

  2. विदेशी निवेश – निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ सकता है और वे भारतीय बाजार से पैसा निकाल सकते हैं।

  3. एक्सपोर्ट सेक्टर – रुपये की कमजोरी से एक्सपोर्टर्स को फायदा मिलता है, क्योंकि उन्हें डॉलर में ज्यादा रुपये मिलते हैं।

  4. विदेशों में काम करने वाले भारतीय – उनकी भारत में भेजी गई रकम का मूल्य बढ़ जाता है।

भविष्य की तस्वीर

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में रुपया 89-90 के स्तर तक भी जा सकता है, अगर विदेशी निवेशकों की बिकवाली और अमेरिकी नीतियों का दबाव जारी रहता है। हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) रुपये की स्थिरता बनाए रखने के लिए समय-समय पर कदम उठाता रहा है।

रुपये और डॉलर की यह खींचतान सिर्फ वित्तीय दुनिया का खेल नहीं है, बल्कि यह हर भारतीय के जीवन को प्रभावित करती है। एक तरफ जहां विदेशों में काम करने वालों के लिए यह बोनस की तरह है, वहीं दूसरी तरफ आयात पर निर्भर भारतीय उद्योगों और उपभोक्ताओं के लिए यह एक बोझ है।

spot_img
spot_imgspot_img

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

spot_imgspot_img

Share post:

New Delhi
light rain
39.2 ° C
39.2 °
39.2 °
33 %
2.1kmh
68 %
Tue
38 °
Wed
36 °
Thu
41 °
Fri
38 °
Sat
41 °
Video thumbnail
Arvind Kejriwal : "सरकार ethanol पर दूसरे देशों का उदाहरण देकर लोगों...."
02:52
Video thumbnail
Yogi Adityanath : "तंत्र वही, लोग वही, राज्य वही, केवल कार्य करने की स्टाइल बदली है..."
00:51
Video thumbnail
लेटे हनुमान मंदिर में CM योगी ने की पूजा-अर्चना
01:44
Video thumbnail
राम मंदिर ट्रस्ट ने दान में मिले आभूषण और स्वर्ण रामायण का किया प्रदर्शन
01:37
Video thumbnail
Yogi Adityanath : "राम का मतलब राष्ट्र..."
00:32
Video thumbnail
Akhilesh Yadav : "जो लखनऊ में भाजपा के विधायक है वो क्षेत्र बदलने की तैयारी में हैं"
00:28
Video thumbnail
Amit Shah ने Cooperation Ministry के 5th foundation day पर किया ताबड़तोड़ ऐलान ! Amit Shah Speech
11:06
Video thumbnail
महिला सिपाही के साथ मिले पुलिसकर्मी पर पत्नी का हंगामा
01:56
Video thumbnail
जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ के पावर प्रोजेक्ट के पास लैंडस्लाइड
00:30
Video thumbnail
गुजरात में बारिश से सावरकुंडला-अमरेली NH का हिस्सा बहा
00:13

Subscribe

spot_img
spot_imgspot_img

Popular

spot_img

More like this
Related