AIN NEWS 1: सहारनपुर में पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की करेंसी चेस्ट से जुड़ा मामला अब बेहद गंभीर होता जा रहा है। शहर के घंटाघर क्षेत्र स्थित सोफिया मार्केट की PNB करेंसी चेस्ट में ऑडिट के दौरान करोड़ों रुपये की ऐसी करेंसी मिली, जो जांच में जाली पाई गई। शुरुआती जांच में करीब 7.40 करोड़ रुपये के नकली नोट मिलने की बात सामने आई थी, लेकिन जांच और नोटों की गिनती आगे बढ़ने के साथ यह रकम करीब 17 करोड़ रुपये तक पहुंचने की जानकारी सामने आई है।
हालांकि, करीब 17 करोड़ रुपये का आंकड़ा अभी जांच के स्तर पर है और इसे अंतिम आधिकारिक आंकड़ा नहीं माना जा सकता। बैंक और पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कुल कितनी रकम के असली नोट गायब हुए और उनकी जगह कितने जाली नोट रखे गए थे।

ऑडिट में खुला करोड़ों की गड़बड़ी का मामला
पूरा मामला उस समय सामने आया जब बैंक की करेंसी चेस्ट का ऑडिट किया जा रहा था। करेंसी का मिलान करने के दौरान नोटों में बड़ी गड़बड़ी सामने आई। शुरुआती जांच में 500 रुपये के बड़ी संख्या में जाली नोट बरामद होने की बात सामने आई।
प्रारंभिक रिपोर्ट के मुताबिक 148 बंडल ऐसे मिले, जिनमें नकली नोट होने की बात सामने आई। इनकी कुल कीमत करीब 7.40 करोड़ रुपये बताई गई थी। इसके बाद जब जांच का दायरा बढ़ाया गया तो गड़बड़ी की रकम और अधिक होने की आशंका सामने आई। ताजा रिपोर्टों में यह आंकड़ा करीब 17 करोड़ रुपये तक बताया जा रहा है।
जांच एजेंसियां अब इस सवाल का जवाब तलाश रही हैं कि आखिर करेंसी चेस्ट जैसी सुरक्षित व्यवस्था में इतनी बड़ी मात्रा में जाली नोट कैसे पहुंचे और असली नोट आखिर कहां गए।
असली नोट निकालकर नकली रखने की आशंका
जांच में सबसे गंभीर आशंका यह है कि करेंसी चेस्ट में जमा असली नोटों को निकालकर उनकी जगह जाली नोट रखे गए। यानी यह केवल नकली नोट मिलने का मामला नहीं, बल्कि कथित तौर पर असली करेंसी के स्थान पर नकली करेंसी रखकर बैंक को आर्थिक नुकसान पहुंचाने का मामला हो सकता है।
पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस पूरी प्रक्रिया में किस-किस व्यक्ति की भूमिका रही। करेंसी चेस्ट में नोट किसने जमा किए, किसने उनकी गिनती की, किस अधिकारी ने उन्हें स्वीकार किया और बाद में उन बंडलों को किस स्तर पर संभाला गया—इन सभी बिंदुओं की जांच की जा रही है।
4.36 लाख रुपये की कमी से खुला मामला
इस मामले की जांच एक अन्य वित्तीय गड़बड़ी के बाद तेज हुई। रिपोर्टों के अनुसार करेंसी चेस्ट से मुख्यालय भेजी गई करीब 11.50 करोड़ रुपये की नकदी के मिलान में लगभग 4.36 लाख रुपये की कमी सामने आई थी।
इस कमी के बाद बैंक की ओर से जांच शुरू कराई गई और बैंक की टीम सहारनपुर पहुंची। इसी जांच के दौरान करेंसी चेस्ट में रखी रकम के मिलान में बड़ी गड़बड़ी सामने आने लगी और मामला करोड़ों रुपये की जाली करेंसी तक पहुंच गया।
तीन बैंक प्रबंधक निलंबित
मामले की गंभीरता को देखते हुए PNB प्रबंधन ने करेंसी चेस्ट से जुड़े तीन बैंक प्रबंधकों को निलंबित कर दिया है। बैंक की ओर से संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
PNB के नोडल अधिकारी अरुण कुमार चौबे की शिकायत पर सदर बाजार कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया गया है। रिपोर्टों के अनुसार जाली नोटों से जुड़े मामले में वरिष्ठ प्रबंधक मंडल कार्यालय रवि कुमार कांसे, करेंसी चेस्ट प्रबंधक सुशील शर्मा और खेरा बाजार जगाधरी करेंसी चेस्ट प्रबंधक अमित कुमार के नाम सामने आए हैं।
यह स्पष्ट करना जरूरी है कि मुकदमे में नाम आने या निलंबन की कार्रवाई का मतलब आरोप सिद्ध होना नहीं है। आरोपों की सच्चाई पुलिस जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया में तय होगी।
हाउसकीपर की भूमिका भी जांच के घेरे में
करेंसी चेस्ट में नोटों की गड्डियों को व्यवस्थित करने का काम करने वाले पार्ट-टाइम हाउसकीपर विशाल कुमार को भी बैंक ने काम से हटा दिया है। पुलिस उसकी भूमिका की भी जांच कर रही है।
जांच के दौरान करेंसी चेस्ट में लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि फुटेज में हाउसकीपर को नोटों की गड्डियों से रकम निकालते हुए देखा गया है। हालांकि, उसकी वास्तविक भूमिका और यह गतिविधि किस संदर्भ में हुई, इसका अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही सामने आएगा।
DIG, DM और SSP ने किया निरीक्षण
मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर करेंसी चेस्ट का निरीक्षण किया। DIG अभिषेक सिंह, जिलाधिकारी अरविंद कुमार चौहान और SSP अभिनंदन सिंह ने बैंक अधिकारियों से जानकारी ली और पूरे घटनाक्रम की समीक्षा की।
DIG की ओर से संकेत दिया गया है कि मामले में गबन से संबंधित मुकदमा दर्ज कर जांच की जा रही है। पुलिस अब बैंक के रिकॉर्ड, करेंसी के आवागमन, ऑडिट रिपोर्ट, CCTV फुटेज और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की पड़ताल कर रही है।
SIT करेगी पूरे मामले की जांच
इतनी बड़ी रकम से जुड़े मामले को देखते हुए जांच के लिए विशेष जांच टीम यानी SIT गठित की गई है। SIT का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि जाली नोट करेंसी चेस्ट तक कैसे पहुंचे और असली नोटों को किस तरह बाहर निकाला गया।
जांच टीम बैंक के पुराने रिकॉर्ड और करेंसी के लेन-देन का भी मिलान कर सकती है। इसके अलावा यह भी पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि कहीं यह गड़बड़ी एक दिन में हुई या लंबे समय से किसी स्तर पर चल रही थी।
पुलिस आरोपियों की तलाश में हरियाणा, उत्तराखंड और आसपास के क्षेत्रों में दबिश देने की बात भी सामने आई है।
करेंसी चेस्ट का नकदी संचालन प्रभावित
मामले की जांच के दौरान सोफिया मार्केट स्थित करेंसी चेस्ट से नकदी के लेन-देन को रोक दिया गया है। बैंक की अन्य शाखाओं के नकदी संबंधी काम के लिए वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर गंगोह स्थित करेंसी चेस्ट का इस्तेमाल किए जाने की जानकारी सामने आई है।
अब सबसे बड़ा सवाल—17 करोड़ रुपये की गड़बड़ी कैसे हुई?
सहारनपुर का यह मामला कई गंभीर सवाल खड़े करता है। करेंसी चेस्ट में करोड़ों रुपये की नकदी सुरक्षित रखी जाती है और वहां नोटों की गिनती, मिलान और रिकॉर्ड के लिए निर्धारित प्रक्रियाएं होती हैं। ऐसे में इतनी बड़ी मात्रा में जाली नोटों का मौजूद मिलना बैंकिंग व्यवस्था की निगरानी और आंतरिक नियंत्रण पर सवाल खड़े करता है।
अब जांच का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा यह होगा कि करीब 17 करोड़ रुपये का आंकड़ा अंतिम रूप से कितना निकलता है। साथ ही पुलिस यह भी पता लगाएगी कि जाली नोट कहां से आए, असली नोट किसके पास गए और इस पूरी प्रक्रिया में कितने लोग शामिल थे।
फिलहाल पुलिस और SIT की जांच जारी है। शुरुआती तौर पर 7.40 करोड़ रुपये के जाली नोट सामने आने के बाद मामला करीब 17 करोड़ रुपये तक पहुंचने की बात सामने आई है। इसलिए इस पूरे मामले में अंतिम रकम और जिम्मेदार लोगों को लेकर जांच पूरी होने का इंतजार करना जरूरी है।
सहारनपुर का PNB करेंसी चेस्ट मामला अब केवल बैंक की आंतरिक गड़बड़ी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि करोड़ों रुपये की कथित धोखाधड़ी, जाली करेंसी और संभावित मिलीभगत की जांच में बदल गया है। SIT की जांच से यह साफ होने की उम्मीद है कि इस पूरे खेल के पीछे कौन था और बैंक की सुरक्षित करेंसी चेस्ट तक इतनी बड़ी मात्रा में जाली नोट आखिर कैसे पहुंच गए।
The Saharanpur PNB Currency Chest Fake Notes Case has raised serious questions over banking security and cash management. An initial audit reportedly detected fake currency worth Rs 7.40 crore at Punjab National Bank’s currency chest in Saharanpur, while subsequent investigation has indicated that the suspected amount may reach around Rs 17 crore. Three PNB managers have been suspended and a Special Investigation Team (SIT) is investigating how genuine currency was allegedly replaced with counterfeit notes. The Saharanpur Fake Currency case is now being examined through bank records, CCTV footage, audit documents and cash movement records.



















