AIN NEWS 1: दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला PG बिल्डिंग गिरने के बाद राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हादसे में अब तक 7 लोगों की मौत और 5 लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। हादसे के बाद दिल्ली सरकार, पुलिस और नगर निगम की कार्रवाई तेज हो गई है। वहीं, अदालत में भी इस मामले को लेकर सुनवाई शुरू हो चुकी है।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने AIIMS ट्रॉमा सेंटर पहुंचकर हादसे में घायल लोगों का हाल जाना। उन्होंने डॉक्टरों से घायलों के इलाज और स्वास्थ्य की जानकारी ली तथा उनके परिजनों से भी मुलाकात की। सरकार की ओर से घायलों को 5-5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता के चेक दिए गए हैं। सरकार ने यह भी कहा है कि घायलों के इलाज का खर्च उठाया जाएगा।
हादसे के बाद सामने आईं कई गंभीर बातें
सत्य निकेतन में रविवार को एक पांच मंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई थी। इस बिल्डिंग का इस्तेमाल छात्रों के लिए PG/हॉस्टल के रूप में किया जा रहा था। राहत और बचाव दलों ने मलबे से लोगों को बाहर निकालने के लिए लंबे समय तक अभियान चलाया।
शुरुआती जांच में बिल्डिंग की उम्र, निर्माण में बदलाव और मरम्मत कार्य को लेकर कई सवाल उठे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, इमारत काफी पुरानी थी और हाल के दिनों में उसमें मरम्मत का काम भी चल रहा था। बेसमेंट में पानी भरने और सीपेज की समस्या को दूर करने के लिए काम किए जाने की बात सामने आई है। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या इस काम ने इमारत की संरचना को कमजोर किया था।
FIR में अतिरिक्त मंजिलों के निर्माण का आरोप
पुलिस की FIR में इस मामले को लेकर एक और गंभीर आरोप सामने आया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, पुराने भवन पर किराये से ज्यादा कमाई के उद्देश्य से अतिरिक्त मंजिलों का निर्माण कराया गया। NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, FIR में आरोप है कि मालिकों को इमारत की पुरानी नींव की क्षमता के बारे में जानकारी थी, इसके बावजूद अतिरिक्त भार बढ़ाया गया।
हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी। फिलहाल पुलिस मामले से जुड़े दस्तावेज, निर्माण कार्य और बिल्डिंग की संरचनात्मक स्थिति की जांच कर रही है।
मालिक समेत तीन लोग गिरफ्तार
हादसे के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए बिल्डिंग से जुड़े तीन लोगों को गिरफ्तार किया। इनमें हरिराम गुप्ता, उनकी पत्नी उर्मिला गुप्ता और बेटे महेश गुप्ता शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, परिवार का इस संपत्ति के संचालन और प्रबंधन से संबंध था। तीनों को राजस्थान के भिवाड़ी से गिरफ्तार किया गया।
कोर्ट ने हरिराम गुप्ता और उर्मिला गुप्ता को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा है, जबकि उनके बेटे महेश गुप्ता को 2 दिन की पुलिस हिरासत में भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। पुलिस अब निर्माण, मरम्मत, किरायेदारी और बिल्डिंग की सुरक्षा से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है।
सत्य निकेतन हादसा पहुंचा अदालत
हादसे के बाद दिल्ली में संचालित PG और निजी हॉस्टलों की सुरक्षा व्यवस्था भी सवालों के घेरे में आ गई है। इस मामले को लेकर अदालत में जनहित याचिका दाखिल की गई है, जिसमें हादसे की स्वतंत्र जांच, पीड़ितों के लिए मुआवजा और दिल्ली के PG, हॉस्टल तथा छात्र आवासों के व्यापक सुरक्षा ऑडिट की मांग की गई है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने भी मामले को गंभीरता से लिया है। अदालत ने PG और हॉस्टलों की व्यवस्था तथा उनकी निगरानी को लेकर संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा है। कोर्ट ने शहर में PG और हॉस्टल के सुरक्षा ऑडिट की दिशा में भी कदम उठाने को कहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, दिल्ली के PG हब में एक सप्ताह के भीतर स्ट्रक्चरल ऑडिट कराने की प्रक्रिया शुरू करने की बात सामने आई है।
सिर्फ मालिक ही जिम्मेदार नहीं: व्यवस्था पर भी सवाल
हादसे के बाद सवाल केवल बिल्डिंग मालिक की जिम्मेदारी तक सीमित नहीं रहे हैं। यह भी पूछा जा रहा है कि आखिर इतने पुराने भवन में PG जैसी व्यवस्था कैसे चल रही थी और समय-समय पर उसकी सुरक्षा जांच क्यों नहीं हुई।
दिल्ली हाईकोर्ट ने इस व्यापक पहलू पर भी सवाल उठाए हैं और MCD तथा दिल्ली विश्वविद्यालय की भूमिका को लेकर जवाब मांगा है। अदालत का रुख यह है कि छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करना केवल मकान मालिक की जिम्मेदारी नहीं हो सकती, बल्कि संबंधित सरकारी और स्थानीय निकायों की निगरानी व्यवस्था भी प्रभावी होनी चाहिए।
सरकार अब बना सकती है नई सुरक्षा नीति
सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली सरकार ने PG और सार्वजनिक उपयोग वाली इमारतों के लिए सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में कदम उठाने की बात कही है। रिपोर्टों के अनुसार, PG हब में स्ट्रक्चरल ऑडिट और भविष्य में ऐसे भवनों के लिए सुरक्षा प्रमाणन की व्यवस्था पर विचार किया जा रहा है।
इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि किन इमारतों में छात्र या अन्य लोग रह रहे हैं, उनकी संरचनात्मक स्थिति कैसी है और क्या वे अतिरिक्त भार, निर्माण या मरम्मत के बाद भी सुरक्षित हैं।
AIIMS में घायलों का इलाज जारी
हादसे में बचाए गए घायलों को AIIMS ट्रॉमा सेंटर समेत अस्पतालों में उपचार के लिए पहुंचाया गया। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अस्पताल पहुंचकर डॉक्टरों से बातचीत की और घायलों की स्थिति जानी। सरकार की ओर से परिवारों को हर संभव सहायता देने का आश्वासन दिया गया है।
हादसे ने दिल्ली में किराये के मकानों, PG और निजी हॉस्टलों में रहने वाले हजारों छात्रों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या राजधानी में मौजूद सभी पुराने PG और हॉस्टलों की समय पर जांच होगी और खतरनाक इमारतों पर कार्रवाई की जाएगी।
सत्य निकेतन हादसे की जांच आगे बढ़ने के साथ यह भी साफ होगा कि इमारत के गिरने की वास्तविक वजह क्या थी, निर्माण और मरम्मत में नियमों का कितना पालन हुआ और इस मामले में किस-किस की जिम्मेदारी तय होती है। फिलहाल पुलिस की जांच, अदालत की निगरानी और सरकार की कार्रवाई—तीनों पर लोगों की नजर बनी हुई है।
नोट: इस रिपोर्ट में आरोपों को आरोप के रूप में ही प्रस्तुत किया गया है। निर्माण और लापरवाही से जुड़े आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच एवं न्यायिक प्रक्रिया के बाद होगी।
The Satya Niketan PG building collapse in Delhi has raised major concerns over hostel safety, structural audits and regulation of private PG accommodations. Delhi Chief Minister Rekha Gupta visited the AIIMS Trauma Centre, announced ₹5 lakh financial assistance for injured victims and assured government support for treatment. Police have arrested the building owner and family members, while authorities are examining alleged construction and renovation violations. The Delhi High Court has also sought stronger regulation and safety audits of PG hostels across the capital.



















