AIN NEWS 1 लखनऊ, उत्तर प्रदेश। कारोबारी और कैफे संचालक शिवा शर्मा की संदिग्ध मौत का मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। इस मामले में अब प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों से कथित संपर्कों तथा जांच को प्रभावित किए जाने की आशंकाओं को लेकर उच्चस्तरीय जांच की मांग उठी है। आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर मामले से जुड़े सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
संगठन की ओर से उठाए गए सवालों में श्रद्धा दुबे के कथित प्रभावशाली संपर्क, वायरल ऑडियो में सामने आ रहा ‘संजय सर’ नाम और विवेचना में संभावित हस्तक्षेप जैसे मुद्दे शामिल हैं। पत्र में आशंका जताई गई है कि आरोपित को किसी प्रभावशाली व्यक्ति या समूह की ओर से अनुचित संरक्षण मिल सकता है। हालांकि, ये आरोप और आशंकाएं हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है।
इस बीच, मामले में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। 20 अक्टूबर 2026 को उत्तर प्रदेश एसटीएफ, लखनऊ पुलिस और नागपुर पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में श्रद्धा दुबे को महाराष्ट्र के नागपुर से गिरफ्तार किए जाने की खबर सामने आई। उनके साथ उनकी बहन रश्मि दुबे और चालक तनवीर अली उर्फ दानिश को भी पकड़े जाने की जानकारी दी गई। इस गिरफ्तारी के बाद मामले की जांच और आरोपों की सत्यता सामने आने को लेकर उम्मीदें बढ़ गई हैं।
मुख्य सचिव को पत्र लिखकर क्या मांग की गई?
आजाद अधिकार सेना की ओर से उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को भेजे गए पत्र में शिवा शर्मा की मौत से जुड़े घटनाक्रम की व्यापक जांच कराने की मांग की गई है। संगठन का कहना है कि मामले में सामने आ रहे अलग-अलग तथ्यों और सार्वजनिक चर्चाओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर ने पत्र के माध्यम से प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों से जुड़े कथित संपर्कों की जांच कराने पर जोर दिया है। उनका कहना है कि यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि क्या किसी प्रभावशाली व्यक्ति ने मामले की विवेचना को प्रभावित करने की कोशिश की और क्या किसी स्तर पर आरोपित को अनुचित मदद या संरक्षण मिला।
पत्र में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि जांच केवल आरोपों तक सीमित न रहे, बल्कि संबंधित लोगों की भूमिका, उनके संपर्कों और घटना से पहले तथा बाद के घटनाक्रम की निष्पक्ष पड़ताल की जाए। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि मामले में लगाए जा रहे आरोपों में कितनी सच्चाई है।
वायरल ऑडियो में ‘संजय सर’ का नाम चर्चा में
शिवा शर्मा मामले में सामने आए कथित ऑडियो को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं। मीडिया रिपोर्टों में पहले शिवा शर्मा और श्रद्धा दुबे के बीच बातचीत की रिकॉर्डिंग सामने आने की जानकारी दी गई थी। इन रिकॉर्डिंग को लेकर सोशल मीडिया पर भी चर्चाएं हुई हैं।
आजाद अधिकार सेना के पत्र में विशेष रूप से ‘संजय सर’ नाम का उल्लेख किया गया है। संगठन ने मांग की है कि इस नाम से जुड़े व्यक्ति की पहचान स्पष्ट की जाए और यह पता लगाया जाए कि उसका शिवा शर्मा प्रकरण से कोई वास्तविक संबंध है या नहीं।
संगठन का तर्क है कि यदि किसी ऑडियो में किसी व्यक्ति का नाम सामने आता है, तो उसकी प्रामाणिकता और संदर्भ की जांच जरूरी है। केवल नाम का उल्लेख होने से किसी व्यक्ति की संलिप्तता साबित नहीं होती। इसलिए संबंधित रिकॉर्डिंग की सत्यता, उसकी पूरी बातचीत, आवाज की पहचान और संदर्भ की जांच तकनीकी तथा अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की जानी चाहिए।
इस मामले में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि ऑडियो की फॉरेंसिक जांच कराई जाती है या नहीं और उसमें कही गई बातों की पुष्टि अन्य साक्ष्यों से होती है या नहीं। जब तक जांच पूरी नहीं होती, तब तक किसी व्यक्ति के विरुद्ध निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
श्रद्धा दुबे को संरक्षण दिए जाने की आशंका
आजाद अधिकार सेना ने अपने पत्र में श्रद्धा दुबे के मीडिया में बयान देने, उनके कथित तौर पर फरार रहने और पुलिस कार्रवाई से संबंधित घटनाक्रमों का उल्लेख किया है। संगठन का कहना है कि इन परिस्थितियों के कारण यह सवाल उठ रहा है कि कहीं किसी प्रभावशाली व्यक्ति या समूह की ओर से उन्हें मदद तो नहीं दी जा रही थी।
हालांकि, किसी आरोपित का मीडिया में बयान देना या पुलिस से बचने की आशंका अपने आप में अधिकारियों से मिलीभगत का प्रमाण नहीं है। इसी तरह, किसी व्यक्ति के प्रभावशाली लोगों से संपर्क होने की बात सामने आने पर भी उन संपर्कों की प्रकृति और मामले से उनका संबंध साक्ष्यों के आधार पर ही निर्धारित किया जा सकता है।
इसी वजह से संगठन ने कथित संरक्षण और संभावित हस्तक्षेप के आरोपों की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। जांच में यह पता लगाया जा सकता है कि क्या किसी अधिकारी ने नियमों के विपरीत कोई सहायता दी, किसी कार्रवाई में जानबूझकर देरी की या उपलब्ध साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ करने का प्रयास किया।
यदि ऐसी किसी अनियमितता के प्रमाण मिलते हैं, तो संबंधित व्यक्तियों की भूमिका के अनुसार कानूनी और विभागीय कार्रवाई का सवाल उठ सकता है। वहीं, यदि आरोपों की पुष्टि नहीं होती है, तो तथ्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
9 अक्टूबर को हुई थी शिवा शर्मा की मौत
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, लखनऊ के हजरतगंज क्षेत्र स्थित अवध ग्रीन अपार्टमेंट में 9 अक्टूबर 2026 को शिवा शर्मा की चौथी मंजिल से गिरने के बाद मौत हो गई थी। घटना के बाद मौत की परिस्थितियों को लेकर सवाल उठे और उनकी मां की शिकायत के आधार पर मामले में हत्या का आरोप दर्ज किए जाने की खबरें सामने आईं।
मामले में श्रद्धा दुबे सहित अन्य लोगों पर आरोप लगाए गए। श्रद्धा दुबे ने इससे पहले सार्वजनिक रूप से अपना पक्ष रखते हुए शिवा की मौत को आत्महत्या बताया था और अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया था। इस प्रकार, मामले में आरोपों और दावों के बीच मौत की वास्तविक परिस्थितियों का पता लगाना जांच एजेंसियों के लिए अहम है।
शिवा शर्मा की मौत को लेकर सामने आए कथित ऑडियो और वीडियो ने भी मामले को चर्चा में बनाए रखा है। हालांकि, सोशल मीडिया पर प्रसारित किसी भी रिकॉर्डिंग या दावे को अंतिम सच्चाई नहीं माना जा सकता। उनकी प्रामाणिकता और घटना से संबंध की पुष्टि जांच के बाद ही संभव है।
20 अक्टूबर को नागपुर से गिरफ्तारी की खबर
मामले में 20 अक्टूबर को बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जब मीडिया रिपोर्टों में श्रद्धा दुबे, उनकी बहन रश्मि दुबे और चालक तनवीर अली उर्फ दानिश को नागपुर से गिरफ्तार किए जाने की जानकारी दी गई। बताया गया कि उत्तर प्रदेश एसटीएफ, लखनऊ पुलिस और नागपुर पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई की।
इससे पहले आरोपितों की तलाश जारी थी और उनकी संभावित लोकेशन को लेकर अलग-अलग खबरें सामने आई थीं। गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियों के सामने घटना से जुड़े तथ्यों, आरोपों और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों की पड़ताल करने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
अब जांच में यह स्पष्ट करना होगा कि शिवा शर्मा की मौत किन परिस्थितियों में हुई, आरोपितों की कथित भूमिका क्या थी और वायरल ऑडियो-वीडियो का मामले से क्या संबंध है। साथ ही, आजाद अधिकार सेना की ओर से उठाए गए कथित प्रभावशाली संपर्कों और जांच में हस्तक्षेप के सवालों की भी पुष्टि योग्य साक्ष्यों के आधार पर पड़ताल किए जाने की मांग है।
निष्पक्ष जांच से ही सामने आएगी सच्चाई
शिवा शर्मा मामले में आजाद अधिकार सेना की मांग का मुख्य आधार यह है कि जांच के दौरान किसी भी संभावित प्रभाव, दबाव या पक्षपात की गुंजाइश नहीं रहनी चाहिए। संगठन चाहता है कि ‘संजय सर’ के नाम की पहचान की जाए, संबंधित व्यक्तियों के संपर्कों की जांच हो और यह पता लगाया जाए कि किसी स्तर पर विवेचना को प्रभावित करने की कोशिश तो नहीं हुई।
इस मामले में तीन महत्वपूर्ण पहलू हैं—शिवा शर्मा की मौत की वास्तविक परिस्थितियां, श्रद्धा दुबे और अन्य आरोपितों के विरुद्ध लगाए गए आरोपों की सत्यता तथा जांच प्रक्रिया में कथित हस्तक्षेप की आशंका। इन सभी पहलुओं को अलग-अलग साक्ष्यों के आधार पर जांचना आवश्यक है।
फिलहाल, मुख्य सचिव को भेजे गए पत्र में उठाए गए सवालों और उन पर किसी आधिकारिक जांच के आदेश की स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। गिरफ्तारी को भी आरोपों की अंतिम पुष्टि नहीं माना जा सकता। मामले में आगे की तस्वीर पुलिस जांच, फॉरेंसिक रिपोर्ट, संबंधित लोगों के बयान और न्यायिक प्रक्रिया से स्पष्ट होगी।
शिवा शर्मा के परिवार को न्याय दिलाने और पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने लाने के लिए जरूरी है कि जांच निष्पक्ष, पारदर्शी और साक्ष्य-आधारित हो। साथ ही, किसी भी व्यक्ति को बिना प्रमाण दोषी ठहराने से बचते हुए सभी आरोपों की कानूनी प्रक्रिया के अनुसार जांच की जाए।
The Shiva Sharma death case in Lucknow has drawn attention following allegations raised by Azad Adhikar Sena chief Amitabh Thakur. In a letter to the Uttar Pradesh Chief Secretary, he sought a high-level investigation into the alleged influential connections of Shraddha Dubey, the identity of the person referred to as “Sanjay Sir” in a viral audio recording, and possible interference in the police investigation. Media reports stated that Shraddha Dubey, her sister Rashmi Dubey, and driver Tanveer Ali alias Danish were arrested in Nagpur on October 20, 2026. The investigation is expected to examine the circumstances surrounding Shiva Sharma’s death, the authenticity of viral audio and video recordings, and the allegations of possible protection or undue influence. The claims require independent verification, and the final findings will depend on the evidence gathered by investigators.



















