सुप्रीम कोर्ट ने Party-in-Person मामलों के लिए बदले नियम, अब वर्चुअल सुनवाई को मिलेगी प्राथमिकता
AIN NEWS 1 नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने अदालत की कार्यवाही को अधिक व्यवस्थित, सुरक्षित और गरिमापूर्ण बनाए रखने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक फैसला लिया है। अब वे लोग जो किसी वकील की मदद लिए बिना अपने मामले की पैरवी स्वयं (Party-in-Person) करना चाहते हैं, उनके लिए नई प्रक्रिया लागू की गई है। सुप्रीम कोर्ट की फुल कोर्ट (सभी न्यायाधीशों की बैठक) में लिए गए इस निर्णय की जानकारी न्यायालय ने आधिकारिक बयान जारी कर दी है।
यह फैसला हाल के दिनों में अदालत के भीतर हुई कुछ अप्रिय घटनाओं के बाद लिया गया है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने अपने आधिकारिक बयान में किसी एक व्यक्ति या घटना का नाम नहीं लिया, लेकिन यह स्पष्ट किया गया है कि अदालत की गरिमा और न्यायिक प्रक्रिया को सुचारु बनाए रखने के लिए नई व्यवस्था आवश्यक समझी गई।

वर्चुअल सुनवाई को दी जाएगी प्राथमिकता
नई व्यवस्था के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति बिना वकील के स्वयं अपने मामले की पैरवी करना चाहता है, तो उसे सबसे पहले वर्चुअल माध्यम से सुनवाई में शामिल होने की सलाह दी जाएगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि न्यायिक प्रक्रिया शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संचालित हो सके तथा अनावश्यक व्यवधान से बचा जा सके।
सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से सुनवाई में भाग लेना न केवल सुविधाजनक है, बल्कि इससे अदालत का समय भी बचता है और सुरक्षा संबंधी चुनौतियां भी कम होती हैं।
फिजिकल पेशी पर लागू होंगे विशेष नियम
यदि कोई पक्षकार यह आग्रह करता है कि वह अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपनी बात रखना चाहता है, तो उसे इसकी अनुमति दी जा सकती है। लेकिन ऐसे मामलों में सुनवाई की लाइव स्ट्रीमिंग और वीडियो रिकॉर्डिंग उपलब्ध नहीं कराई जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट का यह कदम अदालत की कार्यवाही को बाधारहित बनाए रखने और किसी भी प्रकार की अवांछित स्थिति से बचने के उद्देश्य से उठाया गया है।
हालिया घटनाओं के बाद लिया गया निर्णय
पिछले कुछ समय में सुप्रीम कोर्ट में स्वयं पैरवी कर रहे कुछ पक्षकारों के व्यवहार को लेकर विवाद सामने आए थे। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, एक मामले में अदालत के भीतर अनुशासनहीनता और हंगामे जैसी स्थिति भी बनी थी। इसके बाद न्यायालय ने पूरी व्यवस्था की समीक्षा की और फुल कोर्ट बैठक में नई प्रक्रिया लागू करने का निर्णय लिया।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने अपने आधिकारिक बयान में यह नहीं कहा है कि यह फैसला केवल किसी एक घटना के कारण लिया गया है। इसलिए सोशल मीडिया पर चल रहे कुछ दावे, जिनमें सीधे तौर पर किसी विशेष घटना को नियम बदलने की वजह बताया जा रहा है, उन्हें आधिकारिक रूप से पुष्ट नहीं माना जा सकता।
अदालत की गरिमा बनाए रखना प्राथमिकता
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि न्यायालय में अनुशासन और गरिमा बनाए रखना प्रत्येक पक्षकार की जिम्मेदारी होती है। नई व्यवस्था का उद्देश्य किसी के अधिकारों को सीमित करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि सभी मामलों की सुनवाई निष्पक्ष, शांतिपूर्ण और व्यवस्थित माहौल में हो।
इस फैसले से उन लोगों को भी स्पष्ट दिशा-निर्देश मिलेंगे जो भविष्य में बिना वकील के सुप्रीम कोर्ट में स्वयं अपना पक्ष रखना चाहते हैं।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा लागू की गई नई व्यवस्था न्यायिक प्रक्रिया को अधिक सुव्यवस्थित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। अब Party-in-Person मामलों में वर्चुअल सुनवाई को प्राथमिकता दी जाएगी, जबकि फिजिकल पेशी की स्थिति में लाइव स्ट्रीमिंग और वीडियो रिकॉर्डिंग उपलब्ध नहीं होगी। अदालत ने यह फैसला न्यायालय की गरिमा बनाए रखने और सुनवाई को प्रभावी ढंग से संचालित करने के उद्देश्य से लिया है।
The Supreme Court of India has introduced new rules for Party-in-Person cases, giving priority to virtual hearings while restricting live streaming and video recording for those appearing physically in court. The decision aims to maintain courtroom decorum, improve judicial efficiency, and prevent disruptions during proceedings. This latest Supreme Court update, involving virtual court hearings, courtroom rules, and judicial reforms, is significant for litigants, legal professionals, and anyone following India’s legal and judicial system.


















