spot_imgspot_img

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: बालिग की मर्जी से किया गया सेक्स वर्क अपराध नहीं, पुलिस को दिए गए महत्वपूर्ण निर्देश!

spot_img

Date:

AIN NEWS 1 नई दिल्ली: देश की सर्वोच्च अदालत ने सेक्स वर्क से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया है कि यदि कोई बालिग महिला या पुरुष अपनी इच्छा और सहमति से सेक्स वर्क करता है, तो केवल इस आधार पर उसे अपराधी नहीं माना जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को निर्देश दिया है कि वे ऐसे मामलों में संवेदनशीलता और सम्मान के साथ व्यवहार करें तथा अनावश्यक कार्रवाई और उत्पीड़न से बचें।

सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब लंबे समय से सेक्स वर्कर्स के अधिकारों, उनकी सुरक्षा और सम्मानजनक व्यवहार को लेकर बहस चलती रही है। अदालत ने स्पष्ट किया कि भारतीय संविधान प्रत्येक नागरिक को गरिमा के साथ जीवन जीने का अधिकार देता है और यह अधिकार सेक्स वर्क से जुड़े लोगों पर भी समान रूप से लागू होता है।

पुलिस को क्या निर्देश दिए गए?

सुप्रीम Court ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति बालिग है और अपनी स्वतंत्र इच्छा से सेक्स वर्क कर रहा है, तो पुलिस को केवल इसी आधार पर उसके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई नहीं करनी चाहिए। अदालत ने यह भी कहा कि सेक्स वर्कर्स को अपराधी की तरह नहीं बल्कि नागरिक के रूप में देखा जाना चाहिए, जिनके पास भी अन्य नागरिकों की तरह संवैधानिक अधिकार मौजूद हैं।

अदालत ने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि छापेमारी या जांच के दौरान सेक्स वर्कर्स के साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जाए। उनकी पहचान और निजता की रक्षा की जाए तथा मीडिया में उनकी पहचान उजागर करने से बचा जाए।

सेक्स वर्क और मानव तस्करी में अंतर

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि स्वैच्छिक सेक्स वर्क और मानव तस्करी दो अलग-अलग विषय हैं। यदि कोई व्यक्ति अपनी इच्छा से इस पेशे में है तो स्थिति अलग है, लेकिन यदि किसी महिला, पुरुष या बच्चे को धोखे, लालच, दबाव या जबरदस्ती के जरिए सेक्स वर्क में धकेला जाता है, तो यह गंभीर अपराध माना जाएगा।

अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में मानव तस्करी और यौन शोषण से संबंधित सभी कठोर कानून लागू होंगे। इसमें इमोरल ट्रैफिक (प्रिवेंशन) एक्ट (ITPA), भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराएं तथा अन्य संबंधित कानून शामिल हैं।

नाबालिगों के मामलों में सख्त कार्रवाई

सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया कि नाबालिगों को किसी भी प्रकार की यौन गतिविधि या देह व्यापार में शामिल करना गंभीर अपराध है। ऐसे मामलों में कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि बच्चों के शोषण से जुड़े मामलों में किसी प्रकार की नरमी नहीं बरती जा सकती और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को पूरी गंभीरता के साथ कार्रवाई करनी चाहिए।

सेक्स वर्कर्स के अधिकारों पर जोर

सुप्रीम कोर्ट ने माना कि सेक्स वर्कर्स भी समाज का हिस्सा हैं और उन्हें भी समान अधिकार प्राप्त हैं। अदालत ने कहा कि केवल पेशे के आधार पर किसी व्यक्ति के साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता। यदि कोई सेक्स वर्कर किसी अपराध का शिकार होता है तो उसकी शिकायत भी अन्य नागरिकों की तरह दर्ज की जानी चाहिए और उसे न्याय दिलाने के लिए उचित कदम उठाए जाने चाहिए।

अदालत ने इस बात पर भी जोर दिया कि पुलिस और प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सेक्स वर्कर्स को स्वास्थ्य सेवाओं, कानूनी सहायता और अन्य सरकारी सुविधाओं तक पहुंचने में किसी प्रकार की बाधा न हो।

क्या भारत में वेश्यावृत्ति पूरी तरह कानूनी है?

इस फैसले के बाद सोशल मीडिया पर कई तरह की भ्रामक जानकारियां सामने आईं, जिनमें दावा किया गया कि भारत में वेश्यावृत्ति पूरी तरह कानूनी हो गई है। हालांकि वास्तविक स्थिति इससे अलग है।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, किसी बालिग व्यक्ति द्वारा अपनी इच्छा से सेक्स वर्क करना अपराध नहीं माना जाता, लेकिन इससे जुड़ी कई गतिविधियां अब भी कानून के दायरे में आती हैं। उदाहरण के लिए मानव तस्करी, जबरन देह व्यापार, दलाली, सार्वजनिक स्थानों पर ग्राहकों को आकर्षित करने की गतिविधियां तथा नाबालिगों से संबंधित मामले आज भी दंडनीय अपराध हैं।

यानी सुप्रीम कोर्ट का फैसला सेक्स वर्क को पूरी तरह वैध घोषित नहीं करता, बल्कि यह सुनिश्चित करता है कि स्वैच्छिक रूप से इस पेशे में शामिल बालिग व्यक्तियों के साथ सम्मानजनक और कानूनी व्यवहार किया जाए।

मानवाधिकारों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

कानूनी विशेषज्ञों और मानवाधिकार संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी को एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। उनका मानना है कि इससे सेक्स वर्कर्स के प्रति समाज और प्रशासन का दृष्टिकोण अधिक संवेदनशील बन सकता है। साथ ही, यह फैसला उन लोगों को सुरक्षा प्रदान करता है जो अपनी परिस्थितियों या व्यक्तिगत निर्णयों के कारण इस पेशे से जुड़े हुए हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस फैसले का उद्देश्य देह व्यापार को बढ़ावा देना नहीं बल्कि संविधान द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों की रक्षा करना है। साथ ही यह सुनिश्चित करना है कि मानव तस्करी और यौन शोषण जैसे अपराधों के खिलाफ कार्रवाई और अधिक प्रभावी हो।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी बालिग व्यक्ति द्वारा अपनी इच्छा से किया गया सेक्स वर्क अपने आप में अपराध नहीं माना जा सकता। पुलिस को ऐसे लोगों के साथ सम्मानजनक व्यवहार करने और अनावश्यक कार्रवाई से बचने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि मानव तस्करी, जबरन वेश्यावृत्ति, यौन शोषण और नाबालिगों से जुड़े मामलों पर कानून पहले की तरह सख्ती से लागू रहेगा। अदालत का यह रुख मानवाधिकारों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा के साथ-साथ संगठित अपराधों के खिलाफ कठोर कार्रवाई के संतुलन को दर्शाता है।

The Supreme Court of India has reaffirmed that voluntary sex work conducted by consenting adults cannot be treated as a criminal offense. The landmark ruling strengthens sex workers’ rights in India and directs police authorities to respect the dignity and constitutional rights of adult sex workers. However, the court emphasized that human trafficking, forced prostitution, sexual exploitation, and activities involving minors remain serious criminal offenses under the Immoral Traffic (Prevention) Act (ITPA) and other applicable laws. The judgment is considered a significant step toward protecting human rights while maintaining strict action against organized trafficking networks.

spot_img
spot_imgspot_img

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

spot_imgspot_img

Share post:

New Delhi
clear sky
33.9 ° C
33.9 °
33.9 °
32 %
1.7kmh
0 %
Fri
34 °
Sat
41 °
Sun
42 °
Mon
44 °
Tue
46 °
Video thumbnail
"अडानी-अंबानी पर कांग्रेस भी फायदा लेती है!" गाजियाबाद के व्यापारियों ने खुलकर रखी अपनी राय |
11:34
Video thumbnail
Yogi Birthday Celebration by Hindu Yuva Vahini | Kerala Islamic Friendly Gym Controversy
07:26
Video thumbnail
एथलीट चिराग त्यागी पर बोले ओवैसी के नेता
00:43
Video thumbnail
असदुद्दीन ओवैसी के नेता क्या बोले : “अपराधी मुस्लिम पकड़ा है तो ऑन द स्पॉट फैसला क्यों...”
00:31
Video thumbnail
असदुद्दीन ओवैसी के नेता क्या बोले :"फिर से उत्तर प्रदेश को हिंदू मुसलमान की राजनीति..."
00:44
Video thumbnail
असदुद्दीन ओवैसी के नेता खोड़ा पर क्या बोले : "पूरे खोड़ा के मुसलमानो को परेशान..."
00:38
Video thumbnail
AIMIM महानगर अध्यक्ष बिट्टू बजरंगी और खोड़ा पर क्या बोले ?
00:28
Video thumbnail
सीबीएससी पेपर लीक पर बोले जयंत चौधरी
00:50
Video thumbnail
Film Producer Amit Jani on Akhilesh Yadav
01:02
Video thumbnail
Amit Jani on Yogi Adityanath, Akhilesh Yadav | Surya Murder Case : “हर घर का बेटा सूर्या की तरफ...”
01:13

Subscribe

spot_img
spot_imgspot_img

Popular

spot_img

More like this
Related