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ट्रंप ने चीन से किया ऐन मौके पर समझौता, टिकटॉक बैन पर संकट टला, अमेरिका-चीन व्यापार रिश्तों में नई हलचल

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AIN NEWS 1 | अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा ऐलान किया है, जिसने न सिर्फ अमेरिकी युवाओं को राहत दी बल्कि दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच तनाव को भी कम कर दिया। ट्रंप ने सोमवार (15 सितंबर, 2025) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर लिखा कि अमेरिका और चीन के बीच एक अहम समझौता हुआ है, जिससे चीनी ऐप टिकटॉक अमेरिकी बाजार में काम करना जारी रख सकेगा। यह समझौता उस डेडलाइन से ठीक पहले हुआ है, जब अमेरिकी सरकार ने चीनी कंपनी बाइटडांस को अपनी अमेरिकी हिस्सेदारी बेचने का आदेश दिया था।

टिकटॉक पर अमेरिकी कानून और बाइटडांस की हिस्सेदारी

अमेरिकी संसद ने 2024 में एक सख्त कानून पारित किया था जिसके मुताबिक यदि बाइटडांस (TikTok की पैरेंट कंपनी) अपनी अमेरिकी हिस्सेदारी नहीं बेचती, तो ऐप को अमेरिका में पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया जाएगा।

  • 19 जनवरी 2025 को अमेरिकी सरकार ने टिकटॉक पर कानूनी तौर पर प्रतिबंध लगा दिया था।

  • इसके बावजूद ऐप अब तक अमेरिका में काम करता रहा, क्योंकि हिस्सेदारी बेचने को लेकर बाइटडांस और अमेरिकी प्रशासन के बीच बातचीत चल रही थी।

  • अमेरिकी युवाओं के बीच टिकटॉक की लोकप्रियता और उसके सामाजिक प्रभाव को देखते हुए सरकार पर काफी दबाव था।

यही वजह रही कि आखिरी समय में ट्रंप प्रशासन और चीन के बीच एक समझौता हुआ, जिसने टिकटॉक के भविष्य को फिलहाल सुरक्षित कर दिया।

ट्रंप का बयान और संकेत

ट्रंप ने अपनी पोस्ट में लिखा:
“यूरोप में अमेरिका और चीन के बीच बड़ी व्यापारिक बैठक बेहद सफल रही। जल्द ही इसका समापन होगा। एक विशेष कंपनी पर भी समझौता हुआ है, जिसे हमारे देश के युवा बचाना चाहते थे। वे बेहद खुश होंगे! मैं शुक्रवार को राष्ट्रपति शी जिनपिंग से बात करूंगा। हमारे रिश्ते अब भी मजबूत हैं।”

यह बयान साफ इशारा करता है कि ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच बैकडोर डिप्लोमेसी जारी है और दोनों देश फिलहाल अपने रिश्तों को टकराव से समझौते की ओर ले जाना चाहते हैं।

मैड्रिड में अमेरिका-चीन वार्ता

इस समझौते की पृष्ठभूमि में मैड्रिड में हुई उच्चस्तरीय वार्ता अहम रही।

  • अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व ट्रेज़री सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट और ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जेमिसन ग्रीयर ने किया।

  • चीनी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उप-प्रधानमंत्री हे लिफेंग कर रहे थे।

  • बैठक का मुख्य उद्देश्य व्यापार विवादों को कम करना, तकनीकी तनाव घटाना और द्विपक्षीय रिश्तों को पटरी पर लाना था।

विशेषज्ञों का मानना है कि टिकटॉक डील इसी कूटनीतिक बातचीत का हिस्सा थी, ताकि दोनों देशों के बीच जमे बर्फ को पिघलाया जा सके।

अमेरिका-चीन संबंधों की जटिलताएं

अमेरिका और चीन के बीच संबंध हमेशा से उतार-चढ़ाव भरे रहे हैं।

  • व्यापार विवाद: अमेरिका ने चीन पर अनुचित व्यापार नीतियों का आरोप लगाते हुए कई उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क लगाया।

  • राष्ट्रीय सुरक्षा की चिंता: टिकटॉक और अन्य चीनी ऐप्स को अमेरिका में डेटा सुरक्षा खतरे के रूप में देखा गया।

  • तकनीकी वर्चस्व की होड़: 5G, AI और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर दोनों देशों के बीच गहरी प्रतिस्पर्धा है।

चीन ने अमेरिका द्वारा G7 और NATO देशों से लगाई जाने वाली नीतिगत अपीलों को आर्थिक दबाव और धौंस जमाने की रणनीति बताया। उसने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने इस दिशा में और कदम बढ़ाए, तो चीन भी कड़ा जवाब देगा।

टिकटॉक क्यों बना विवाद का केंद्र?

टिकटॉक सिर्फ एक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म नहीं है, बल्कि यह करोड़ों अमेरिकी युवाओं की रोज़मर्रा की लाइफस्टाइल और डिजिटल पहचान से जुड़ा हुआ है।

  • टिकटॉक की वजह से हजारों कंटेंट क्रिएटर्स अपनी आजीविका कमा रहे हैं।

  • अमेरिकी सरकार को डर था कि इसका डाटा चीन तक पहुंच सकता है।

  • वहीं चीन इसे युवा कूटनीति का हिस्सा मानता है, जो उसे अमेरिका में सॉफ्ट पावर देता है।

यही कारण है कि यह ऐप दोनों देशों के बीच व्यापारिक और कूटनीतिक टकराव का प्रतीक बन गया।

क्या यह डील स्थायी है?

हालांकि समझौते ने टिकटॉक के भविष्य को फिलहाल बचा लिया है, लेकिन सवाल यह है कि यह समाधान स्थायी होगा या अस्थायी?

  • यदि बाइटडांस अमेरिकी हिस्सेदारी बेचने पर सहमत हो जाता है तो टिकटॉक का संचालन और भी सहज हो जाएगा।

  • लेकिन अगर चीन इसके लिए तैयार नहीं हुआ, तो अमेरिका फिर से सख्त कदम उठा सकता है।

  • दोनों देशों के बीच रिश्तों की संवेदनशीलता को देखते हुए यह डील सिर्फ एक अस्थायी राहत हो सकती है।

अमेरिका और चीन के बीच टिकटॉक को लेकर हुआ यह समझौता फिलहाल राहत लेकर आया है। अमेरिकी युवाओं के लिए यह खुशी की बात है कि उनका पसंदीदा ऐप बैन से बच गया, वहीं चीन ने भी इसे कूटनीतिक जीत के तौर पर देखा।

लेकिन वास्तविकता यह है कि अमेरिका-चीन रिश्ते अभी भी जटिल हैं। व्यापार, तकनीक और सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियां दोनों देशों को लगातार टकराव की ओर धकेलती हैं। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि ट्रंप और शी जिनपिंग इस समझौते को कितना आगे बढ़ाते हैं और क्या टिकटॉक विवाद वास्तव में खत्म हो पाएगा।

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