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मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: ट्विशा शर्मा केस में पूर्व जज गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत रद्द!

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मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: ट्विशा शर्मा केस में पूर्व जज गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत रद्द

AIN NEWS 1: मध्य प्रदेश के चर्चित ट्विशा शर्मा केस में हाई कोर्ट ने एक अहम और सख्त फैसला सुनाते हुए पूर्व जज गिरिबाला सिंह को निचली अदालत से मिली अग्रिम जमानत रद्द कर दी है। इस फैसले के बाद मामले ने एक बार फिर नया मोड़ ले लिया है। हाई कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ट्रायल कोर्ट ने मामले के तथ्यों, गवाहों के बयानों और उपलब्ध सबूतों पर गंभीरता से विचार नहीं किया था। अदालत ने यह भी माना कि रिकॉर्ड में मौजूद सामग्री केवल समर्थ सिंह के खिलाफ नहीं बल्कि गिरिबाला सिंह की भूमिका की ओर भी इशारा करती है।

यह मामला पहले से ही काफी संवेदनशील और हाई-प्रोफाइल माना जा रहा है। अब इसकी जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) कर रही है। जांच एजेंसी ने अदालत को बताया कि मामले की सच्चाई तक पहुंचने और तथ्यों की गहराई से जांच करने के लिए गिरिबाला सिंह से हिरासत में पूछताछ जरूरी है। इसी आधार पर CBI ने उनकी अग्रिम जमानत रद्द करने की मांग की थी।

क्या है पूरा मामला?

ट्विशा शर्मा की मौत के बाद उनके परिवार ने गंभीर आरोप लगाए थे। शिकायतकर्ता पक्ष का कहना है कि ट्विशा को शादी के बाद लगातार मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। परिवार ने आरोप लगाया कि ट्विशा पर गर्भपात कराने के लिए दबाव डाला गया और इस पूरे मामले में उनके पति समर्थ सिंह तथा सास गिरिबाला सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका थी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 80(2), 85 और 3(5) के साथ-साथ दहेज प्रतिषेध अधिनियम 1961 की धारा 3 और 4 के तहत केस दर्ज किया था। बाद में इस केस की जांच CBI को सौंप दी गई।

हाई कोर्ट ने क्या कहा?

जबलपुर हाई कोर्ट की वैकेशन बेंच में जस्टिस देव नारायण मिश्रा ने इस मामले की सुनवाई की। अदालत ने अपने 17 पन्नों के विस्तृत आदेश में कहा कि भोपाल की 10वीं अतिरिक्त सत्र अदालत द्वारा 15 मई 2026 को दिया गया अग्रिम जमानत आदेश तथ्यों के अनुरूप नहीं था।

हाई कोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने कई महत्वपूर्ण पहलुओं को नजरअंदाज कर दिया था। अदालत के अनुसार, गवाहों के बयान, शिकायतकर्ता पक्ष के आरोप और व्हाट्सएप चैट्स इस बात की ओर संकेत करते हैं कि मामले में केवल समर्थ सिंह ही नहीं बल्कि गिरिबाला सिंह की भूमिका की भी जांच आवश्यक है।

कोर्ट ने साफ कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि आरोप केवल एक व्यक्ति तक सीमित हैं। इसलिए अग्रिम जमानत जारी रखना उचित नहीं माना जा सकता।

गवाहों के बयानों ने बढ़ाई मुश्किलें

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कई गवाहों के बयानों का विशेष उल्लेख किया। अदालत ने कहा कि रेखारानी शर्मा, मीनाक्षी शर्मा, नवनिधि शर्मा, हर्षित शर्मा और राशि अबरोल के बयान बेहद महत्वपूर्ण हैं।

इन सभी ने 13 मई 2026 से ही आरोप लगाए थे कि ट्विशा शर्मा को लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था। गवाहों के अनुसार, ट्विशा पर गर्भपात कराने का दबाव डाला गया और इस मामले में गिरिबाला सिंह तथा समर्थ सिंह दोनों की भूमिका सामने आई।

इसके अलावा 14 और 15 मई को दर्ज हुए अन्य बयानों में भी इसी तरह के आरोप दोहराए गए। अदालत ने माना कि इन बयानों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

गर्भपात को लेकर अदालत की टिप्पणी

हाई कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा कि यह एक स्वीकार किया गया तथ्य है कि ट्विशा शर्मा गर्भवती थीं और दो महीने के भीतर उनका गर्भपात कराया गया।

शिकायतकर्ता पक्ष का आरोप है कि यह गर्भपात दबाव बनाकर कराया गया, जबकि बचाव पक्ष ने अदालत में दावा किया कि ट्विशा स्वयं गर्भपात चाहती थीं। हालांकि अदालत ने कहा कि इस पहलू की विस्तृत जांच अभी बाकी है और यह जांच एजेंसी का विषय है।

कोर्ट ने माना कि इस मामले में कई ऐसे तथ्य हैं जिनकी गहन जांच आवश्यक है। इसलिए जांच एजेंसी को स्वतंत्र रूप से जांच करने का अवसर मिलना चाहिए।

व्हाट्सएप चैट्स भी बनीं अहम सबूत

सुनवाई के दौरान अदालत के सामने व्हाट्सएप चैट्स भी पेश की गईं। हाई कोर्ट ने कहा कि इन चैट्स को देखने के बाद यह नहीं कहा जा सकता कि मामले में केवल समर्थ सिंह की भूमिका है।

कोर्ट के अनुसार, चैट्स और अन्य डिजिटल साक्ष्य इस पूरे विवाद की गंभीरता को दर्शाते हैं। अदालत ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने इन पहलुओं का पर्याप्त विश्लेषण नहीं किया था।

CBI की दलील क्या थी?

CBI ने अदालत में कहा कि गिरिबाला सिंह से हिरासत में पूछताछ जरूरी है। जांच एजेंसी का कहना था कि मामले के कई पहलुओं को स्पष्ट करने के लिए पूछताछ आवश्यक है।

CBI ने यह भी दलील दी कि यदि आरोपी को अग्रिम जमानत का संरक्षण मिलता रहेगा तो जांच प्रभावित हो सकती है। जांच एजेंसी ने अदालत से कहा कि मामले की संवेदनशीलता और उपलब्ध साक्ष्यों को देखते हुए अग्रिम जमानत रद्द की जानी चाहिए।

हाई कोर्ट ने CBI की इन दलीलों को महत्वपूर्ण मानते हुए जमानत रद्द करने का फैसला सुनाया।

कानूनी विशेषज्ञों की नजर में बड़ा फैसला

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अदालत ने साफ संदेश दिया है कि हाई-प्रोफाइल मामलों में भी जांच प्रक्रिया को प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा।

विशेषज्ञों के अनुसार, अदालत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यदि किसी मामले में प्रथम दृष्टया पर्याप्त सामग्री मौजूद हो तो केवल सामाजिक हैसियत या पूर्व पद के आधार पर राहत नहीं दी जा सकती।

आगे क्या होगा?

अब CBI इस मामले में आगे की कार्रवाई कर सकती है। संभावना जताई जा रही है कि गिरिबाला सिंह से पूछताछ के बाद जांच एजेंसी कुछ और महत्वपूर्ण तथ्य सामने ला सकती है।

मामले पर पूरे मध्य प्रदेश की नजर बनी हुई है और आने वाले दिनों में यह केस और अधिक चर्चाओं में रह सकता है।

फिलहाल हाई कोर्ट के इस फैसले को ट्विशा शर्मा केस में एक बड़ा कानूनी मोड़ माना जा रहा है। अदालत के आदेश के बाद अब जांच एजेंसियों को आगे की कार्रवाई के लिए खुला रास्ता मिल गया है।

The Madhya Pradesh High Court has cancelled the anticipatory bail granted to former judge Giribala Singh in the high-profile Twisha Sharma case. The court observed that witness statements, WhatsApp chats, and other evidence indicated the need for a deeper CBI investigation. The case involves allegations of harassment, pressure for abortion, and dowry-related offences under BNS 2023 and the Dowry Prohibition Act. The Jabalpur High Court stated that the trial court failed to properly examine the facts before granting anticipatory bail.

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