AIN NEWS 1 | उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच वाराणसी से एक बड़ा मामला सामने आया है। सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) वाराणसी सेक्टर की एंटी करप्शन टीम ने जीएसटी (राज्य) सेक्टर-6 की डिप्टी कमिश्नर अंबिका सिंह को ₹50 हजार की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई चेतगंज थाना क्षेत्र स्थित दादा रेस्टोरेंट के पास की गई, जहां पहले से जाल बिछाकर विजिलेंस टीम आरोपी अधिकारी का इंतजार कर रही थी।
इस कार्रवाई के बाद जीएसटी विभाग सहित प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया। विजिलेंस ने मौके से रिश्वत की पूरी रकम बरामद कर ली है और आरोपी अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
मुख्य बातें
- जीएसटी सेक्टर-6 की डिप्टी कमिश्नर अंबिका सिंह ₹50 हजार की रिश्वत लेते गिरफ्तार।
- विजिलेंस टीम ने चेतगंज स्थित दादा रेस्टोरेंट के पास रंगे हाथ पकड़ा।
- भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज, जांच जारी।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता अजय कुमार मौर्य, जो वाराणसी के भेलूपुर थाना क्षेत्र स्थित लखरांव बजरडीहा के निवासी हैं और ब्लैक स्मिथ इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक हैं, ने सतर्कता अधिष्ठान में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी।
उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी कंपनी के फरवरी 2023 के लंबित जीएसटी रिटर्न और जीएसटी मूल्यांकन (Assessment) से जुड़े मामलों के निस्तारण के लिए जीएसटी सेक्टर-6 की डिप्टी कमिश्नर अंबिका सिंह ने ₹50 हजार की रिश्वत की मांग की थी।
शिकायतकर्ता का कहना था कि वह लंबे समय से विभागीय प्रक्रियाओं के कारण परेशान थे। जब कथित रूप से रिश्वत दिए बिना कार्य आगे बढ़ता नहीं दिखा, तब उन्होंने इसकी शिकायत विजिलेंस विभाग से करने का फैसला किया।
शिकायत मिलने के बाद विजिलेंस ने बनाई रणनीति
शिकायत की प्राथमिक जांच में आरोप सही प्रतीत होने पर सतर्कता अधिष्ठान की एंटी करप्शन टीम ने एक सुनियोजित ट्रैप (Trap Operation) तैयार किया।
योजना के तहत शिकायतकर्ता को निर्धारित समय और स्थान पर ₹50 हजार की राशि लेकर भेजा गया। वहीं दूसरी ओर विजिलेंस की टीम सादे कपड़ों में आसपास तैनात रही और पूरी गतिविधि पर नजर रखी।
जैसे ही आरोपी अधिकारी ने शिकायतकर्ता से कथित रूप से रिश्वत की रकम स्वीकार की, विजिलेंस टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उन्हें मौके पर ही पकड़ लिया।
दादा रेस्टोरेंट के पास हुई गिरफ्तारी
यह कार्रवाई चेतगंज क्षेत्र स्थित दादा रेस्टोरेंट के पास की गई। विजिलेंस अधिकारियों के अनुसार, जैसे ही रिश्वत का लेन-देन पूरा हुआ, पहले से मौजूद टीम ने आरोपी अधिकारी को घेर लिया।
मौके से ₹50 हजार की पूरी रिश्वत राशि बरामद की गई, जिसे इस मामले में महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में जब्त किया गया है।
गिरफ्तारी के दौरान हुआ हाई-वोल्टेज ड्रामा
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, गिरफ्तारी के समय सादे कपड़ों में मौजूद महिला पुलिसकर्मियों ने डिप्टी कमिश्नर अंबिका सिंह को हिरासत में लिया। इस दौरान उन्होंने खुद को छुड़ाने की कोशिश की और काफी देर तक विरोध करती रहीं।
हालांकि विजिलेंस टीम ने पूरी प्रक्रिया को शांतिपूर्वक और कानूनी तरीके से पूरा किया तथा आरोपी अधिकारी को अपने साथ ले गई। मौके पर मौजूद लोगों की भीड़ के कारण कुछ समय के लिए वहां हलचल का माहौल बन गया।
किस मामले में मांगी गई थी रिश्वत?
शिकायत के अनुसार, रिश्वत की मांग कंपनी के फरवरी 2023 के जीएसटी रिटर्न, विभागीय स्पष्टीकरण तथा जीएसटी मूल्यांकन से संबंधित फाइलों के निस्तारण के बदले की गई थी।
व्यापारी का आरोप था कि बिना रिश्वत दिए उनके लंबित मामलों का समाधान नहीं किया जा रहा था। इसी वजह से उन्होंने पूरे मामले की जानकारी सतर्कता अधिष्ठान को दी।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज हुआ मुकदमा
विजिलेंस की कार्रवाई के बाद आरोपी अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
सतर्कता अधिष्ठान वाराणसी सेक्टर के अधिकारियों का कहना है कि मामले की विस्तृत जांच जारी है। बरामद साक्ष्यों, शिकायतकर्ता के बयान और अन्य दस्तावेजों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यदि जांच में अन्य तथ्य सामने आते हैं, तो उनके आधार पर भी आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
विभाग में मचा हड़कंप
जीएसटी विभाग की एक वरिष्ठ अधिकारी की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तारी की खबर फैलते ही पूरे विभाग में हलचल मच गई। अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच इस कार्रवाई की चर्चा होती रही।
भ्रष्टाचार के मामलों में इस तरह की ट्रैप कार्रवाई को विभागीय जवाबदेही और पारदर्शिता की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने में मदद करती है और आम नागरिकों तथा कारोबारियों का सरकारी व्यवस्था पर विश्वास मजबूत होता है।
विजिलेंस की कार्रवाई क्यों मानी जा रही है महत्वपूर्ण?
उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार के मामलों पर लगातार निगरानी रखने वाली सतर्कता अधिष्ठान की यह कार्रवाई इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि इसमें एक वरिष्ठ राजपत्रित अधिकारी को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया।
ऐसी ट्रैप कार्रवाई में पहले शिकायत की जांच की जाती है, फिर पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए आरोपी को रिश्वत लेते समय गिरफ्तार किया जाता है।
इस मामले में भी शिकायतकर्ता के सहयोग से पूरी योजना बनाई गई और निर्धारित स्थान पर कार्रवाई को अंजाम दिया गया।
आगे क्या होगा?
अब इस मामले में विजिलेंस विभाग निम्न बिंदुओं पर जांच करेगा—
- रिश्वत मांगने और लेने के आरोपों से जुड़े सभी साक्ष्यों का परीक्षण।
- शिकायतकर्ता और संबंधित गवाहों के बयान दर्ज करना।
- जीएसटी विभाग से संबंधित फाइलों और दस्तावेजों की जांच।
- आवश्यक होने पर डिजिटल और तकनीकी साक्ष्यों का परीक्षण।
- जांच पूरी होने के बाद अदालत में आरोपपत्र (चार्जशीट) दाखिल करना।
जांच पूरी होने तक आरोपी अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी शुरू की जा सकती है, हालांकि इसका अंतिम निर्णय संबंधित सक्षम प्राधिकारी द्वारा लिया जाएगा।
वाराणसी में जीएसटी सेक्टर-6 की डिप्टी कमिश्नर अंबिका सिंह की ₹50 हजार की कथित रिश्वत लेते हुए गिरफ्तारी उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही कार्रवाई का एक बड़ा उदाहरण मानी जा रही है। शिकायतकर्ता की सूचना पर विजिलेंस द्वारा सुनियोजित ट्रैप ऑपरेशन के जरिए की गई इस कार्रवाई ने सरकारी विभागों में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर एक स्पष्ट संदेश दिया है।
फिलहाल आरोपी अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और मामले की विस्तृत जांच जारी है। जांच पूरी होने के बाद उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी।


















