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“वक्फ इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं, सिर्फ एक दान है: केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दी दलील”!

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Date:

Wakf Not an Essential Part of Islam, Just a Charitable Act: Centre Tells Supreme Court

“वक्फ इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं, यह सिर्फ दान है: केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दी सफाई”

AIN NEWS 1 नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में वक्फ से जुड़े एक अहम मामले में स्पष्ट किया है कि वक्फ इस्लाम का अनिवार्य धार्मिक अंग नहीं है, बल्कि यह एक प्रकार का दान है। यह बयान उस दौरान आया जब वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 की संवैधानिक वैधता को लेकर सुनवाई चल रही थी। इस सुनवाई के दौरान भारत सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अपना पक्ष रखा।

वक्फ क्या है और ‘वक्फ बाय यूजर’ क्या होता है?

वक्फ एक इस्लामी व्यवस्था है, जिसमें कोई संपत्ति धार्मिक या सामाजिक कार्यों के लिए समर्पित की जाती है। ‘वक्फ बाय यूजर’ का मतलब है कि कोई संपत्ति यदि लंबे समय से धार्मिक उद्देश्य से इस्तेमाल हो रही हो, तो उसे वक्फ मान लिया जाता है, भले ही उसके पास विधिक दस्तावेज़ न हों।

केंद्र का पक्ष: वक्फ इस्लाम का अनिवार्य अंग नहीं

तुषार मेहता ने कहा कि वक्फ इस्लामी परंपरा का हिस्सा है, लेकिन इसे इस्लाम का अनिवार्य धार्मिक कर्तव्य नहीं कहा जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि दान हर धर्म में होता है, लेकिन वह किसी धर्म का मुख्य या अनिवार्य हिस्सा नहीं होता।

वक्फ बाय यूजर से संपत्ति का अधिकार नहीं मिलता

सुप्रीम कोर्ट को संबोधित करते हुए मेहता ने कहा कि ‘वक्फ बाय यूजर’ कोई मौलिक अधिकार नहीं है। यह सिर्फ एक कानूनी अवधारणा है, जिसे कानून बनाकर मान्यता दी गई है और जिसे आवश्यकता पड़ने पर वापस भी लिया जा सकता है।

सरकारी भूमि पर वक्फ का दावा अमान्य

सरकार ने यह साफ किया कि कोई भी व्यक्ति या संस्था सरकारी भूमि पर वक्फ के नाम पर स्वामित्व का दावा नहीं कर सकता। अगर किसी संपत्ति पर वक्फ का दावा किया गया है, लेकिन दस्तावेज़ उपलब्ध नहीं हैं, तो सरकार उस संपत्ति को वापस ले सकती है।

सरकार 140 करोड़ लोगों की ओर से संरक्षक

केंद्र सरकार ने अदालत में यह भी कहा कि वह देश की सार्वजनिक संपत्तियों की संरक्षक है। उसकी यह जिम्मेदारी बनती है कि सार्वजनिक संसाधनों का गलत या अवैध उपयोग न हो। इसीलिए वक्फ के नाम पर सरकारी संपत्तियों पर कब्जे के मामलों को रोका जाना जरूरी है।

वक्फ अधिनियम में संशोधन क्यों?

सरकार ने वक्फ अधिनियम 2025 में संशोधन इसलिए किया क्योंकि पहले की व्यवस्था में कई खामियां थीं। वक्फ संपत्तियों के दुरुपयोग और कुप्रबंधन की घटनाएं सामने आती रही थीं। सरकार ने संयुक्त संसदीय समिति की सिफारिशों के आधार पर हितधारकों की राय लेकर यह संशोधन किया।

वक्फ बोर्ड की भूमिका धर्मनिरपेक्ष

सॉलिसिटर जनरल मेहता ने यह भी स्पष्ट किया कि वक्फ बोर्ड की भूमिका पूरी तरह से धर्मनिरपेक्ष है। यह बोर्ड किसी भी धार्मिक गतिविधि में भाग नहीं लेता। इसके विपरीत, हिंदू मंदिर ट्रस्ट मंदिर की धार्मिक गतिविधियों में सीधे तौर पर शामिल रहते हैं। यही दोनों के बीच मुख्य अंतर है।

कपिल सिब्बल ने जताई आपत्ति

वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने वक्फ अधिनियम में संशोधन का विरोध किया। उन्होंने कहा कि यह संशोधन मुस्लिम समुदाय के धार्मिक और संपत्ति संबंधी अधिकारों का उल्लंघन है। लेकिन केंद्र ने यह तर्क दिया कि कुछ याचिकाकर्ता पूरे मुस्लिम समुदाय का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकते।

यह मामला केवल एक कानूनी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इससे सरकारी संपत्तियों के भविष्य की सुरक्षा और धार्मिक अधिकारों की सीमाओं को लेकर स्पष्टता आएगी। सुप्रीम कोर्ट में चल रही यह सुनवाई आने वाले समय में देश की धर्मनिरपेक्ष व्यवस्था और सार्वजनिक संसाधनों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

The Central Government told the Supreme Court that Wakf is not an essential part of Islam but merely a charitable practice, like in other religions. During the hearing on the constitutional validity of the Wakf Law Amendment 2025, Solicitor General Tushar Mehta emphasized that no individual or group can claim ownership of government land through Wakf by user. He stated that the government has the right to reclaim such properties and clarified that the Wakf Board’s role is secular, not religious. This statement strengthens the legal foundation of public land protection and challenges misuse under religious pretext.

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1 COMMENT

  1. Jay Baba bhole ki fauz. Chaliye ji kuchh to. Hamare samaj mein. Sanvidhan ke protocol ka

    Aur state protocol ka bhi rule samajh mein aane Laga Hai. Kyunki sanvidhan ka rule hi uske protocol per depend karta hai ki aage ki karyvahi. Kanoon vidhi ke Aadhar per protocol De Gaya. Rules are regulation. Kanoon ko follow karna padega. Kyunki sanvidhan

    Samaj ki Suraksha ke liye Hai Samaj ki vyavastha ke liye Hai Samaj ke Swaraj aur rojgar badhane ke liye. Apna protocol nibhaega

    Yojana banana Yojana aage badhana yah अपने-अपने pad adhikariyon ke Adhikar Hain. Jinhen sanvidhan ke Aadhar per Apne Apne protocol nibhaen. Fir bhi Ham galat Charitra mein kaise Aaye. Is baat ka Arth Alibaba 40 chor ke Parivar se jarur poochha jaaye. Satya Sanatan Dharm ki maryada ko भिन्न-भिन्न karne Wale

    San 1984 Se lekar. 19 1991 Tak. Uske bad vyavasthaon ko भिन्न-भिन्न karne Wale yah Alibaba chalis chor ke Parivar Gandhi ke title per apni manmani Gandhi ke title per apni kattarta ka Bal chalate chale a rahe hain

    Aur inhin ki vajah se aiso ki vajah se hi
    Hamare Bharat mein hamare Bharat ke Ratan doctor APJ Abdul Kalam Ji Jaise Badnaam Ho jaate Hain. Dr Rizwan Ahmed Jaise bhi Badnaam Ho jaate Hain

    Kyunki Satya ko yah Charitra Jo Gandhi ji ke title per apni takat Banakar Bharat ko भिन्न-भिन्न kar raha hai. Sharm to hai hi nahin

    Jay Baba Mahakal

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