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दूध नहीं जहर पीता है इंडिया? 87% भारतीयों को 2035 तक कैंसर वाले दावे की पूरी सच्चाई

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AIN NEWS 1 नई दिल्ली: सोशल मीडिया और कुछ वेबसाइटों पर इन दिनों एक दावा तेजी से वायरल हो रहा है कि भारत में दूध की भारी मिलावट हो रही है और अगर इसे नहीं रोका गया तो 2035 तक देश की 87 प्रतिशत आबादी कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की चपेट में आ जाएगी। वायरल पोस्ट में इस दावे को विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO से जोड़ते हुए कहा जा रहा है कि संगठन ने भारत सरकार को इस संबंध में चेतावनी दी है।

दावे के साथ एक कथित “Money Bhaskar” रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट भी शेयर किया जा रहा है। इसमें “दूध नहीं जहर पीता है इंडिया” जैसी सनसनीखेज हेडलाइन के साथ दूध उत्पादन और खपत के आंकड़े भी दिए गए हैं। हालांकि, जब इस दावे की पड़ताल सरकारी दस्तावेजों और WHO से जुड़ी जानकारी के आधार पर की गई तो तस्वीर बिल्कुल अलग सामने आई।

87 फीसदी भारतीयों को कैंसर होने का दावा फर्जी

सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि क्या WHO ने वास्तव में भारत सरकार को ऐसी कोई चेतावनी दी है?

इसका जवाब नहीं है।

भारत सरकार ने जनवरी 2023 में इसी तरह के वायरल दावे को फर्जी और तथ्यों के विपरीत बताया था। सरकार के अनुसार WHO के भारत कार्यालय ने FSSAI को स्पष्ट किया था कि दूध और दूध उत्पादों में मिलावट को लेकर WHO ने भारत सरकार को ऐसी कोई एडवाइजरी जारी नहीं की थी।

यानी “अगर दूध में मिलावट नहीं रोकी गई तो 87 प्रतिशत भारतीय 2035 तक कैंसर के शिकार हो जाएंगे” वाली बात को WHO की चेतावनी बताना सही नहीं है।

यह दावा नया भी नहीं है। इसी तरह की पोस्ट पहले 2025 की समयसीमा के साथ वायरल हुई थी। बाद में उसी दावे को बदलकर 2035 कर दिया गया। अगस्त 2026 में भी यह दावा सोशल मीडिया पर दोबारा तेजी से फैलता देखा गया।

फिर 68.7 प्रतिशत दूध वाला आंकड़ा कहां से आया?

वायरल पोस्ट में एक और आंकड़ा दिया जाता है कि देश में बिकने वाला 68.7 प्रतिशत दूध और दूध से बने उत्पाद FSSAI के मानकों पर खरे नहीं उतरते।

यहां भी पूरे संदर्भ को समझना जरूरी है।

भारत में दूध की गुणवत्ता को लेकर पुराने सरकारी सर्वे में बड़ी संख्या में नमूने निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए थे। वर्ष 2011 के राष्ट्रीय सर्वे में 1,791 नमूनों की जांच की गई थी और 68.4 प्रतिशत नमूने निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए थे। लेकिन “मानक के अनुरूप नहीं” और “जहरीला” या “कैंसर पैदा करने वाला” एक ही बात नहीं है।

कई नमूनों में समस्या दूध में फैट और SNF जैसे गुणवत्ता मानकों से संबंधित थी। इसलिए इस पुराने आंकड़े को उठाकर यह कहना कि देश की करीब 70 प्रतिशत आबादी जहरीला दूध पी रही है, तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करना होगा।

FSSAI के 2018 सर्वे ने क्या बताया?

दूध की गुणवत्ता पर FSSAI का 2018 का National Milk Safety and Quality Survey इस मामले में काफी महत्वपूर्ण है।

इस सर्वे में देशभर से 6,432 दूध के नमूने लिए गए थे। FSSAI के मुताबिक इनमें से केवल 12 नमूनों में ऐसे मिलावटी पदार्थ पाए गए जो दूध को मानव सेवन के लिए असुरक्षित बनाते थे।

इन नमूनों में यूरिया, डिटर्जेंट, हाइड्रोजन पेरॉक्साइड और कुछ अन्य पदार्थों से संबंधित मिलावट सामने आई थी। इसका मतलब यह नहीं है कि दूध में मिलावट की समस्या खत्म हो गई है। बल्कि इसका अर्थ यह है कि मिलावट, गुणवत्ता में कमी और असुरक्षित मिलावट—इन तीनों को एक ही श्रेणी में रखकर आंकड़े पेश नहीं किए जा सकते।

FSSAI के सर्वे में बड़ी संख्या में नमूने गुणवत्ता संबंधी मानकों पर असफल पाए गए थे, लेकिन वे सभी नमूने स्वास्थ्य के लिए तत्काल असुरक्षित नहीं थे।

क्या भारत में दूध मिलावट की समस्या वास्तविक है?

हां। दूध में मिलावट और खराब गुणवत्ता एक वास्तविक खाद्य सुरक्षा समस्या है। सरकार और FSSAI लगातार इसकी निगरानी और जांच करते हैं।

मार्च 2026 में केंद्र सरकार ने दूध और खाद्य पदार्थों में मिलावट की जांच के लिए लोगों के स्तर पर जागरूकता बढ़ाने और FSSAI के Detect Adulteration with Rapid Test (DART) जैसे संसाधनों का इस्तेमाल करने की जानकारी भी दी थी।

इसलिए उपभोक्ताओं को भी दूध की गुणवत्ता को लेकर सतर्क रहना चाहिए। लेकिन सतर्कता और डर फैलाने के बीच फर्क समझना जरूरी है।

“14 करोड़ लीटर उत्पादन और 64 करोड़ लीटर खपत” वाला दावा भी संदिग्ध

वायरल पोस्ट में दावा किया गया है कि भारत में केवल करीब 14 करोड़ लीटर दूध प्रतिदिन पैदा होता है, जबकि खपत 64 करोड़ लीटर है।

यह आंकड़ा भारत के मौजूदा दूध उत्पादन की तस्वीर से मेल नहीं खाता। भारत दुनिया के सबसे बड़े दूध उत्पादक देशों में है और हाल के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश का दूध उत्पादन लगातार बढ़ा है। नवंबर 2025 में सरकार ने बताया था कि भारत वैश्विक दूध आपूर्ति में अपनी हिस्सेदारी लगातार बढ़ा रहा है और 2025-26 में लगभग 32 प्रतिशत वैश्विक दूध आपूर्ति में योगदान का अनुमान था।

इसलिए “14 करोड़ लीटर उत्पादन” को वर्तमान राष्ट्रीय उत्पादन बताना सही नहीं है।

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मिलावट से खतरा है, लेकिन कैंसर का आंकड़ा मनगढ़ंत है

यह बात जरूर समझनी चाहिए कि कुछ प्रकार की खाद्य मिलावट स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है। खराब गुणवत्ता वाला या हानिकारक रसायनों से मिलावटी दूध लंबे समय में स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।

लेकिन किसी विशेष मिलावट को सीधे देश की 87 प्रतिशत आबादी में कैंसर से जोड़ने के लिए वैज्ञानिक अध्ययन, स्पष्ट डेटा और विश्वसनीय स्वास्थ्य संस्था की रिपोर्ट जरूरी होगी।

WHO ने ऐसा कोई अनुमान जारी नहीं किया है। सरकार और WHO दोनों की ओर से इस वायरल दावे को खारिज किया जा चुका है।

2035 की तारीख ने भी बढ़ाया भ्रम

वायरल स्क्रीनशॉट में “September 19, 2035” जैसी तारीख दिखाई जाती है। यह अपने आप में बड़ा संकेत है कि सामग्री को पुराने वायरल दावे से बदलकर नए साल के साथ प्रसारित किया गया है।

2024 में भी इसी तरह के एक स्क्रीनशॉट की पड़ताल में पाया गया था कि दावा WHO की कथित 2025 चेतावनी पर आधारित था, जबकि WHO ने ऐसी कोई एडवाइजरी जारी नहीं की थी।

अब उसी कहानी में 2025 की जगह 2035 दिखाई दे रहा है। इससे यह स्पष्ट होता है कि सोशल मीडिया पर पुराने दावों को नए संदर्भ और तारीख के साथ दोबारा वायरल किया जा रहा है।

आम लोगों को क्या समझना चाहिए?

दूध खरीदते समय भरोसेमंद स्रोत और पैक्ड उत्पादों पर लेबल की जानकारी देखना बेहतर है। खुले दूध के मामले में स्वच्छता और विश्वसनीय सप्लायर पर ध्यान देना चाहिए। अगर किसी उत्पाद की गुणवत्ता पर संदेह हो तो संबंधित खाद्य सुरक्षा विभाग में शिकायत की जा सकती है।

लेकिन सोशल मीडिया पर चल रहे “87 प्रतिशत भारतीयों को कैंसर” जैसे डरावने दावों को बिना जांचे आगे बढ़ाना ठीक नहीं है।

“दूध नहीं जहर पीता है इंडिया” और “2035 तक 87 प्रतिशत भारतीयों को कैंसर होगा” वाला दावा भ्रामक है। भारत में दूध की गुणवत्ता और मिलावट को लेकर वास्तविक चुनौतियां जरूर हैं, लेकिन WHO ने ऐसी कोई चेतावनी जारी नहीं की है।

पुराने सरकारी सर्वे में दूध के कुछ नमूने गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे थे, लेकिन उन्हें सीधे जहरीला या कैंसरकारी बताना गलत है। 2018 के FSSAI सर्वे में 6,432 नमूनों में सिर्फ 12 नमूने ऐसे पाए गए थे जिनमें ऐसे adulterants थे जो दूध को मानव सेवन के लिए असुरक्षित बनाते थे।

इसलिए इस वायरल खबर को “फर्जी WHO चेतावनी” के रूप में समझना ज्यादा सही होगा। दूध में मिलावट के खिलाफ जागरूकता जरूरी है, लेकिन बिना प्रमाण के कैंसर का डर फैलाना नहीं।

फैक्ट चेक निष्कर्ष: वायरल दावा — भ्रामक/फर्जी।

The viral claim that WHO warned 87% of Indians could develop cancer by 2035 because of milk adulteration is false. Official PIB and WHO clarifications confirm that no such advisory was issued. FSSAI milk surveys have identified genuine milk quality and adulteration concerns, but the data does not support the viral cancer prediction. This fact check explains the truth about milk adulteration in India, FSSAI milk safety data, WHO warning claims and India’s milk production.

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