AIN NEWS 1: वाराणसी में भारत सेवाश्रम संघ के शताब्दी समारोह में बोले मुख्यमंत्री; धर्म, संस्कृति और राष्ट्र की रक्षा को बताया महत्वपूर्ण, शिक्षक-स्नातक सम्मेलन में सपा पर परिवारवाद और राज्यसभा उम्मीदवारों को लेकर उठाए सवाल
वाराणसी, 15 अक्टूबर। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को वाराणसी में आयोजित दो अलग-अलग कार्यक्रमों के दौरान धर्म, राष्ट्रवाद, सांस्कृतिक विरासत और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर अपनी बात रखी। भारत सेवाश्रम संघ की काशी शाखा के शताब्दी समारोह में उन्होंने कहा कि संन्यासी के जीवन का उद्देश्य धन कमाना नहीं, बल्कि धर्म और राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का पालन करना होना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश और धर्म की रक्षा के लिए आवश्यकता पड़ने पर संघर्ष करने से भी पीछे नहीं हटना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा, “धन के लिए धर्म नहीं त्यागूंगा, छिड़ गया युद्ध तो बम-गोले भी दागूंगा।” उन्होंने कहा कि देश और धर्म के लिए किया गया त्याग महान होता है। व्यक्ति को इसी भावना के साथ कार्य करना चाहिए और जरूरत पड़ने पर अपने व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठकर राष्ट्रहित के लिए समर्पित होना चाहिए।

इसी दिन संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में आयोजित शिक्षक-स्नातक महासम्मेलन में मुख्यमंत्री ने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा। उन्होंने राज्यसभा में उम्मीदवारों के चयन का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया कि पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यकों के प्रतिनिधित्व की बात करने वाली सपा ने अपने उम्मीदवारों के चयन में इन वर्गों को कितनी प्राथमिकता दी। इस दौरान उन्होंने परिवारवाद और धनाढ्य लोगों को तरजीह देने का आरोप भी लगाया।
राष्ट्र संकट में हो तो विरासत की रक्षा भी जरूरी: योगी
भारत सेवाश्रम संघ की काशी शाखा के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जब कोई राष्ट्र संकट का सामना करता है, तो केवल उसकी सीमाएं या राजनीतिक व्यवस्था ही प्रभावित नहीं होतीं, बल्कि उसकी ऐतिहासिक विरासत, आध्यात्मिक परंपराएं, सांस्कृतिक पहचान और आस्था के केंद्र भी खतरे में पड़ जाते हैं।
उन्होंने कहा कि भारत की सभ्यता और संस्कृति को सुरक्षित रखने के लिए समाज को अपनी ऐतिहासिक परिस्थितियों से सीखने की जरूरत है। मुख्यमंत्री ने काशी विश्वनाथ मंदिर, अयोध्या में रामजन्मभूमि और मथुरा में भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि का उल्लेख करते हुए कहा कि विदेशी आक्रांताओं के दौर में देश के धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्रों को नुकसान पहुंचाया गया।
योगी ने कहा कि यदि भारत का समाज अतीत में विभाजित नहीं हुआ होता, तो आक्रांताओं को देश की विरासत को नुकसान पहुंचाने के ऐसे अवसर नहीं मिलते। उन्होंने समाज की एकता को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि ऐतिहासिक गलतियों से सबक लेकर सांस्कृतिक पहचान और राष्ट्रीय स्वाभिमान को मजबूत करना चाहिए।
मुख्यमंत्री का कहना था कि देश की आध्यात्मिक और ऐतिहासिक धरोहर की रक्षा केवल किसी एक वर्ग की जिम्मेदारी नहीं है। इसके लिए समाज के विभिन्न वर्गों को अपनी भूमिका समझनी होगी। उन्होंने संतों और आध्यात्मिक संगठनों के योगदान को भी इसी व्यापक संदर्भ में रखा।
संतों ने आध्यात्मिक साधना के साथ राष्ट्र जागरण को भी जोड़ा
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में भारत सेवाश्रम संघ के संस्थापक स्वामी प्रणवानंद जी के योगदान का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश के अलग-अलग कालखंडों में संतों ने धार्मिक जागरण, सामाजिक चेतना और राष्ट्रहित से जुड़े कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
योगी आदित्यनाथ ने भारत सेवाश्रम संघ की सेवा परंपरा और राष्ट्रवादी विचारधारा की सराहना करते हुए कहा कि संस्था ने विपरीत परिस्थितियों में भी अपने मूल्यों और सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। उनके अनुसार, संगठन ने राष्ट्र की उन्नति को ही व्यक्तिगत और आध्यात्मिक उन्नति का माध्यम माना है।
उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक जीवन का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत साधना तक सीमित नहीं होना चाहिए। समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाना, जरूरतमंदों की सहायता करना और राष्ट्र के हित में काम करना भी इसी भावना का हिस्सा है।
मुख्यमंत्री ने संन्यासियों के त्याग और समर्पण का उल्लेख करते हुए कहा कि धन और व्यक्तिगत लाभ के लिए अपने सिद्धांतों से समझौता करना उचित नहीं है। उन्होंने राष्ट्र और धर्म के प्रति समर्पण को जीवन का महत्वपूर्ण उद्देश्य बताते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी अपने मूल्यों पर कायम रहना चाहिए।
उनके संबोधन में धर्म की रक्षा, राष्ट्र के प्रति कर्तव्य और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर विशेष जोर रहा। उन्होंने संत समाज की भूमिका को केवल धार्मिक गतिविधियों तक सीमित न मानते हुए उसे सामाजिक चेतना और राष्ट्रहित से भी जोड़ा।
शिक्षक-स्नातक महासम्मेलन में भाजपा प्रत्याशियों के समर्थन की अपील
भारत सेवाश्रम संघ के कार्यक्रम से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में आयोजित शिक्षक-स्नातक महासम्मेलन में शामिल हुए। यह कार्यक्रम वाराणसी खंड क्षेत्र के विधान परिषद चुनावों के संदर्भ में आयोजित किया गया था।
यहां मुख्यमंत्री ने भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशियों के समर्थन में जनसमर्थन जुटाने की कोशिश की। अपने संबोधन में उन्होंने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर निशाना साधा। हालांकि, उनके भाषण का प्रमुख राजनीतिक हमला सपा की पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक राजनीति पर केंद्रित रहा।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि समाजवादी पार्टी पिछड़ों, दलितों और अल्पसंख्यकों के हितों की बात करती है, लेकिन उम्मीदवारों के चयन में उसके दावों और फैसलों के बीच अंतर दिखाई देता है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि पार्टी वास्तव में इन वर्गों को प्रतिनिधित्व देना चाहती है, तो राज्यसभा के लिए उम्मीदवार चुनते समय इन समुदायों के अन्य नेताओं को अवसर क्यों नहीं दिया गया।
राज्यसभा उम्मीदवारों के चयन पर सपा से पूछे सवाल
मुख्यमंत्री ने राज्यसभा चुनाव का जिक्र करते हुए सपा नेता रामगोपाल यादव का नाम लिया। उन्होंने सवाल किया कि पूर्वांचल में यादव समाज के दूसरे नेताओं को राज्यसभा भेजने पर विचार क्यों नहीं किया गया। उन्होंने काशी, गाजीपुर और बलिया जैसे क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन इलाकों से भी किसी नेता को प्रतिनिधित्व दिया जा सकता था।
योगी आदित्यनाथ ने यह भी सवाल उठाया कि दूसरी सीट पर किसी दलित, मुस्लिम या पिछड़े वर्ग के नेता को उम्मीदवार क्यों नहीं बनाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि पीडीए के नाम पर राजनीति करने वाली सपा अपने ही उम्मीदवारों के चयन में उन वर्गों को अपेक्षित प्रतिनिधित्व नहीं दे रही है, जिनके हितों की बात वह सार्वजनिक मंचों से करती है।
मुख्यमंत्री ने तंज कसते हुए कहा कि पार्टी के उम्मीदवारों के चयन में परिवार के लोगों और धनाढ्य वर्ग को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने सपा के पीडीए नारे को छलावा बताते हुए कहा कि सामाजिक न्याय की राजनीति केवल नारों से नहीं, बल्कि फैसलों और वास्तविक प्रतिनिधित्व से साबित होती है।
यह मुख्यमंत्री का राजनीतिक आरोप और विपक्ष की नीतियों पर उनकी आलोचना थी। उम्मीदवारों के चयन को लेकर उनकी टिप्पणियां सपा की राजनीतिक रणनीति पर सवाल उठाने के उद्देश्य से की गईं।
धर्म और राजनीति के मुद्दों पर योगी के बयानों के मायने
वाराणसी में मुख्यमंत्री के दोनों कार्यक्रमों में अलग-अलग विषय प्रमुख रहे। भारत सेवाश्रम संघ के शताब्दी समारोह में उन्होंने धर्म, राष्ट्रवाद, संत परंपरा और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा पर जोर दिया। वहीं, शिक्षक-स्नातक महासम्मेलन में उन्होंने राज्यसभा में प्रतिनिधित्व और सपा की पीडीए राजनीति को लेकर विपक्ष पर हमला बोला।
धार्मिक कार्यक्रम में उनका संदेश संतों और आध्यात्मिक संस्थाओं की सामाजिक भूमिका से जुड़ा रहा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रहित के लिए समर्पण और अपने मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता आवश्यक है। राजनीतिक कार्यक्रम में उन्होंने भाजपा प्रत्याशियों के समर्थन का संदर्भ लेते हुए सपा के सामाजिक न्याय संबंधी दावों पर सवाल खड़े किए।
दोनों कार्यक्रमों के जरिए मुख्यमंत्री ने एक ओर राष्ट्र और संस्कृति के प्रति प्रतिबद्धता का संदेश दिया, तो दूसरी ओर आगामी शिक्षक-स्नातक विधान परिषद चुनावों के संदर्भ में राजनीतिक विरोधियों को निशाने पर लिया।
वाराणसी में दिए गए इन बयानों के बाद मुख्यमंत्री का धर्म और राष्ट्र की रक्षा से जुड़ा संदेश तथा सपा के पीडीए पर किया गया हमला चर्चा में रहा।
Uttar Pradesh Chief Minister Yogi Adityanath addressed the centenary celebrations of the Bharat Sevashram Sangha’s Kashi branch in Varanasi on October 14, 2026. Speaking about Dharma, nationalism, spiritual traditions and India’s cultural heritage, he said that a monk should not abandon Dharma for money and should be prepared to defend the nation when necessary. At a separate teachers and graduates convention at Sampurnanand Sanskrit University, Yogi Adityanath criticised the Samajwadi Party’s PDA politics, questioning its Rajya Sabha candidate selection and its claims of representing backward classes, Dalits and minorities. The speeches brought Dharma, national identity, social representation and Uttar Pradesh MLC elections into focus.



















