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गणतंत्र दिवस से पहले दिल्ली में अनोखी तैयारी: एयर शो की सुरक्षा के लिए चीलों को खिलाया जाएगा 1,270 किलो चिकन!

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AIN NEWS 1: दिल्ली में हर साल गणतंत्र दिवस समारोह देश की ताकत, अनुशासन और सांस्कृतिक विविधता का भव्य प्रदर्शन होता है। इस दिन राजधानी की सड़कों पर परेड निकलती है, राजपथ (कर्तव्य पथ) पर सेना की टुकड़ियां कदमताल करती हैं और आसमान में भारतीय वायुसेना के जांबाज पायलट हैरतअंगेज करतब दिखाते हैं। लेकिन इस बार गणतंत्र दिवस से पहले दिल्ली में तैयारियों का एक ऐसा पहलू सामने आया है, जिसने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।

दरअसल, गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान होने वाले एयर शो को सुरक्षित और निर्बाध तरीके से संपन्न कराने के लिए दिल्ली का वन विभाग एक अनोखी रणनीति अपनाने जा रहा है। इस योजना के तहत आसमान में उड़ने वाली चीलों की गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए उन्हें बड़ी मात्रा में मांस खिलाया जाएगा।

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एयर शो की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता

गणतंत्र दिवस के अवसर पर भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर और विशेष एरोबैटिक टीम आसमान में करतब दिखाती हैं। इस दौरान पक्षियों की मौजूदगी, खासकर बड़े आकार की चीलों और गिद्धों की, विमानों के लिए खतरा बन सकती है। ऐसे मामलों में ‘बर्ड हिट’ की आशंका रहती है, जिससे विमान को नुकसान पहुंच सकता है और पायलटों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है।

इसी जोखिम को ध्यान में रखते हुए दिल्ली वन विभाग ने एक व्यवहारिक और पर्यावरण के अनुकूल उपाय सुझाया है।

चीलों को खिलाया जाएगा 1,270 किलो से ज्यादा चिकन

वन विभाग की योजना के मुताबिक गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान दिल्ली और आसपास के इलाकों में चीलों को 1,270 किलोग्राम से अधिक बिना हड्डी वाला चिकन परोसा जाएगा। यह चिकन खास तौर पर चिन्हित स्थानों पर डाला जाएगा, ताकि चीलें उन्हीं इलाकों में सीमित रहें और एयर शो वाले मार्गों से दूर रहें।

अधिकारियों का कहना है कि यह तरीका चीलों को नुकसान पहुंचाए बिना उनकी उड़ान दिशा को नियंत्रित करने में मदद करेगा। साथ ही, इससे उन्हें भोजन की तलाश में संवेदनशील इलाकों की ओर उड़ने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

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पर्यावरण के साथ तालमेल की कोशिश

दिल्ली वन विभाग का यह कदम केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें पर्यावरणीय संतुलन का भी पूरा ध्यान रखा गया है। विभाग का मानना है कि किसी भी तरह की हिंसक या हानिकारक विधि अपनाने की बजाय यह तरीका ज्यादा मानवीय और वैज्ञानिक है।

वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, चीलें बेहद समझदार पक्षी होती हैं और भोजन की उपलब्धता उनके मूवमेंट को काफी हद तक प्रभावित करती है। अगर उन्हें पर्याप्त भोजन एक निश्चित क्षेत्र में मिल जाए, तो वे स्वाभाविक रूप से वहीं मंडराती हैं।

दिल्ली में चीलों की बढ़ती संख्या

पिछले कुछ वर्षों में दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र में चीलों की संख्या में इजाफा देखा गया है। इसके पीछे खुले कूड़ा घर, मांस बाजार और खाद्य अपशिष्ट जैसे कई कारण हैं। ये पक्षी ऊंची इमारतों और खुले मैदानों के आसपास ज्यादा नजर आते हैं।

गणतंत्र दिवस जैसे बड़े आयोजन के दौरान, जब आसमान में विमान लगातार उड़ान भरते हैं, तब इन पक्षियों की मौजूदगी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

कई एजेंसियों के बीच समन्वय

इस पूरी योजना को लागू करने में दिल्ली वन विभाग के साथ-साथ नागरिक उड्डयन विभाग, भारतीय वायुसेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियां भी समन्वय कर रही हैं। सभी का उद्देश्य एक ही है—समारोह को पूरी तरह सुरक्षित, सफल और बिना किसी बाधा के संपन्न कराना।

अधिकारियों का कहना है कि यह योजना पहले भी कुछ बड़े आयोजनों के दौरान अपनाई जा चुकी है और इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।

सुरक्षा के साथ जिम्मेदारी का संदेश

दिल्ली वन विभाग की यह पहल यह भी दिखाती है कि आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था में केवल तकनीक ही नहीं, बल्कि प्रकृति को समझकर लिए गए फैसले भी अहम भूमिका निभाते हैं। यह कदम इस बात का उदाहरण है कि कैसे इंसान और वन्यजीवों के बीच संतुलन बनाते हुए बड़े राष्ट्रीय आयोजनों को सुरक्षित बनाया जा सकता है।

गणतंत्र दिवस की तैयारियां अपने अंतिम चरण में

गणतंत्र दिवस को लेकर राजधानी दिल्ली पूरी तरह सज चुकी है। सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद है, रिहर्सल पूरी हो चुकी है और हर विभाग अपनी जिम्मेदारी निभाने में जुटा है। ऐसे में चीलों को लेकर बनाई गई यह अनोखी योजना भी तैयारियों का एक अहम हिस्सा बन गई है।

कुल मिलाकर, दिल्ली वन विभाग का यह कदम न सिर्फ सुरक्षा के लिहाज से जरूरी है, बल्कि यह सोच भी दिखाता है कि बड़े आयोजनों में पर्यावरण और वन्यजीवों की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

Ahead of Republic Day celebrations in Delhi, the Delhi Forest Department has introduced a unique wildlife management strategy to ensure smooth air show operations. By feeding over 1,270 kilograms of boneless chicken to eagles, authorities aim to control bird movement near sensitive aircraft routes. This innovative step reflects the capital’s focus on safety, coordination, and ecological balance during Republic Day events involving the Indian Air Force and large public gatherings.

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