AIN NEWS 1 नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर में सर्दियों की शुरुआत के साथ ही वायु प्रदूषण ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। बारिश के बाद कुछ दिनों तक साफ रही राजधानी की हवा नवंबर की शुरुआत में तेजी से खराब हो गई। प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए 1 नवंबर से नई पाबंदियां लागू की गईं, लेकिन इसके बावजूद दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) बढ़कर खराब श्रेणी में पहुंच गया। सोमवार, 2 नवंबर की सुबह स्थिति और बिगड़ गई, जब AQI 307 दर्ज किया गया और हवा बहुत खराब श्रेणी में पहुंच गई।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, रविवार 1 नवंबर को दिल्ली का 24 घंटे का औसत AQI 261 रहा। इससे एक दिन पहले, 31 अक्टूबर को यह 117 दर्ज किया गया था। यानी महज एक दिन में वायु गुणवत्ता सूचकांक में 144 अंकों की बढ़ोतरी हुई। लगातार बढ़ते प्रदूषण के कारण लोगों को आने वाले दिनों में सांस संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
बारिश के बाद फिर बढ़ने लगा प्रदूषण
अक्टूबर के अंतिम दिनों में हुई बारिश ने दिल्ली की हवा को काफी हद तक साफ किया था। बारिश के कारण वातावरण में मौजूद धूल और प्रदूषक कणों का स्तर कम हुआ, जिससे लोगों को कुछ समय के लिए राहत मिली। 30 अक्टूबर को दिल्ली का AQI 60 तक दर्ज किया गया था, जिसे अक्टूबर के दौरान साफ हवा वाले दिनों में शामिल किया गया।
हालांकि, यह राहत ज्यादा समय तक कायम नहीं रह सकी। मौसम में बदलाव, हवा की गति और प्रदूषकों के वातावरण में जमा होने जैसी परिस्थितियों के बीच प्रदूषण का स्तर दोबारा बढ़ने लगा। 31 अक्टूबर को AQI 117 था, लेकिन 1 नवंबर को यह बढ़कर 261 पहुंच गया।
इसके बाद सोमवार सुबह करीब 7 बजे दिल्ली का AQI 307 दर्ज किया गया। यह स्तर बहुत खराब श्रेणी में आता है। ऐसे में साफ है कि बारिश से मिली राहत के बाद राजधानी में प्रदूषण का संकट फिर गहराने लगा है।
कई इलाकों में बेहद खराब हवा, जहांगीरपुरी सबसे ज्यादा प्रभावित
दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में वायु गुणवत्ता की स्थिति एक जैसी नहीं रही। CPCB के निगरानी केंद्रों से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, 2 नवंबर की सुबह कई स्थानों पर AQI 300 से ऊपर पहुंच गया। जहांगीरपुरी में वायु गुणवत्ता सूचकांक 417 दर्ज किया गया, जो गंभीर श्रेणी में आता है।
इसके अलावा पंजाबी बाग, रोहिणी, अलीपुर, मुंडका, विवेक विहार, नरेला और आरके पुरम जैसे इलाकों में भी प्रदूषण का स्तर काफी अधिक रहा।
सुबह की रिपोर्ट में प्रमुख इलाकों के आंकड़े इस प्रकार रहे:
– जहांगीरपुरी: AQI 417
– पंजाबी बाग: AQI 398
– रोहिणी: AQI 397
– अलीपुर: AQI 379
– मुंडका: AQI 376
– विवेक विहार: AQI 374
– नरेला: AQI 371
– आरके पुरम: AQI 368
– बवाना: AQI 361
ये आंकड़े 2 नवंबर की सुबह के हैं। अलग-अलग समय पर निगरानी केंद्रों से मिलने वाली रीडिंग में बदलाव हो सकता है।
प्रदूषण नियंत्रण के लिए लागू हुईं नई पाबंदियां
दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए 1 नवंबर से शीतकालीन प्रदूषण नियंत्रण उपायों को लागू किया गया है। इनका उद्देश्य वाहनों से निकलने वाले धुएं, निर्माण कार्यों से पैदा होने वाली धूल और दूसरे प्रदूषण स्रोतों पर नियंत्रण करना है।
नई व्यवस्था के तहत दिल्ली के बाहर पंजीकृत कुछ पुराने, गैर-BS-VI वाहनों के प्रवेश और संचालन पर प्रतिबंध लगाए गए हैं। हालांकि, संबंधित नियमों में निर्धारित CNG, इलेक्ट्रिक और अन्य छूट प्राप्त वाहनों पर अलग प्रावधान लागू होते हैं।
इसके अलावा निर्माण और तोड़फोड़ से उड़ने वाली धूल को नियंत्रित करने के लिए भी कदम उठाए गए हैं। आवश्यक सार्वजनिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को निर्धारित छूट मिल सकती है। सरकारी और निजी कार्यालयों में 50 प्रतिशत कर्मचारियों की भौतिक उपस्थिति तथा बाकी कर्मचारियों के वर्क फ्रॉम होम की व्यवस्था भी शीतकालीन योजना का हिस्सा है। सरकारी कार्यालयों के समय में बदलाव और अधिकृत पार्किंग स्थलों पर शुल्क बढ़ाने जैसे उपाय भी शामिल हैं।
दिल्ली की सीमाओं पर वाहनों की जांच तेज की गई है। 1 नवंबर को अधिकारियों ने 15 हजार से अधिक वाहनों की जांच की और 1,539 वाहनों को वापस भेजा। प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र से जुड़े नियमों के उल्लंघन पर 566 चालान भी किए गए। इन कार्रवाइयों के बावजूद हवा की गुणवत्ता में तत्काल सुधार नहीं दिखा।
पराली और वाहनों का धुआं भी बढ़ा रहे परेशानी
दिल्ली में वायु प्रदूषण के पीछे कई कारण एक साथ काम करते हैं। इनमें वाहनों से निकलने वाला धुआं, सड़क और निर्माण स्थलों की धूल, औद्योगिक उत्सर्जन, ईंधन का इस्तेमाल और आसपास के राज्यों में पराली जलाने से निकलने वाले कण शामिल हैं।
वायु गुणवत्ता प्रबंधन से जुड़े निर्णय सहायता तंत्र के अनुमान के अनुसार, 1 नवंबर को दिल्ली के प्रदूषण में पराली जलाने का योगदान लगभग 18.5 प्रतिशत रहा। वहीं, परिवहन क्षेत्र का योगदान करीब 16.4 प्रतिशत बताया गया। ये अनुमान समय और मौसम की परिस्थितियों के साथ बदल सकते हैं।
दिल्ली की हवा में PM2.5 जैसे सूक्ष्म कण भी चिंता का विषय हैं। इनका आकार बहुत छोटा होता है, इसलिए ये सांस के साथ फेफड़ों के भीतर तक पहुंच सकते हैं। लंबे समय तक प्रदूषित हवा में रहने से स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ सकता है।
AQI की कौन-सी श्रेणी कितनी खतरनाक?
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड वायु गुणवत्ता सूचकांक को अलग-अलग श्रेणियों में बांटता है। इससे पता चलता है कि हवा कितनी प्रदूषित है और स्वास्थ्य पर उसका कितना असर पड़ सकता है।
– 0 से 50: अच्छा
– 51 से 100: संतोषजनक
– 101 से 200: मध्यम
– 201 से 300: खराब
– 301 से 400: बहुत खराब
– 401 से 500: गंभीर
इस वर्गीकरण के अनुसार, 1 नवंबर को दिल्ली का औसत AQI 261 खराब श्रेणी में था। वहीं, 2 नवंबर की सुबह 307 होने पर यह बहुत खराब श्रेणी में पहुंच गया। जहांगीरपुरी में 417 का स्तर गंभीर श्रेणी में दर्ज किया गया।
बहुत खराब हवा में लंबे समय तक रहने से सांस लेने में परेशानी और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। बच्चों, बुजुर्गों और पहले से सांस या हृदय संबंधी बीमारी से जूझ रहे लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
आने वाले दिनों में और बिगड़ सकते हैं हालात
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अंतर्गत भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान की वायु गुणवत्ता पूर्वानुमान प्रणाली ने 1 नवंबर के बुलेटिन में आने वाले दिनों के दौरान दिल्ली की हवा खराब से बहुत खराब श्रेणी में रहने की आशंका जताई थी। पूर्वानुमान में 4 नवंबर को हवा बहुत खराब श्रेणी में पहुंचने की संभावना भी व्यक्त की गई थी।
हालांकि, मौसम और प्रदूषण के वास्तविक आंकड़ों में बदलाव हो सकता है। इसलिए आने वाले दिनों की स्थिति का आकलन ताजा सरकारी बुलेटिन और निगरानी केंद्रों की रीडिंग के आधार पर ही किया जाना चाहिए।
फिलहाल दिल्ली-एनसीआर के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रदूषण के विभिन्न स्रोतों पर एक साथ प्रभावी नियंत्रण करना है। केवल पाबंदियां लागू करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उनका सख्ती से पालन, निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण, वाहनों के उत्सर्जन की जांच और क्षेत्रीय स्तर पर समन्वित कार्रवाई भी जरूरी है।
कुल मिलाकर, दिल्ली में नवंबर की शुरुआत प्रदूषण के बढ़ते संकट के साथ हुई है। एक दिन में AQI का 117 से 261 तक पहुंचना और फिर सोमवार सुबह 307 दर्ज होना बताता है कि बारिश से मिली राहत अस्थायी थी। अब सबकी नजरें सरकारी उपायों, मौसम में बदलाव और आने वाले दिनों के वायु गुणवत्ता पूर्वानुमान पर टिकी हैं।
Delhi air pollution worsened on November 2, 2026, as the Delhi AQI reached 307, placing the capital in the very poor air quality category. The Central Pollution Control Board reported a 24-hour average AQI of 261 on November 1, up from 117 on October 31. Jahangirpuri recorded a severe AQI of 417, while several other Delhi areas reported high pollution levels. Despite the implementation of winter pollution control measures, vehicle restrictions, construction dust controls and enforcement drives, air quality remained a major concern. Follow the latest Delhi NCR pollution news, CPCB AQI updates, PM2.5 levels and air quality forecasts.



















