Powered by : PIDIT KO NYAY ( RNI - UPBIL/25/A1914)

spot_imgspot_img

असाराम की जमानत पर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती: नाबालिग पीड़िता ने मांगी जमानत रद्द करने की कार्रवाई!

spot_img

Date:

AIN NEWS 1: असाराम से जुड़े मामले में नाबालिग पीड़िता ने एक बार फिर न्याय की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। पीड़िता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा दी गई जमानत को रद्द करने की अपील की है। उनका कहना है कि असाराम को मिली यह राहत न सिर्फ गलत है बल्कि केस की संवेदनशीलता को देखते हुए बेहद चिंता का विषय भी है।

राजस्थान हाईकोर्ट का निर्णय बना विवाद का कारण

29 अक्टूबर को राजस्थान हाईकोर्ट ने असाराम को इलाज से जुड़े कारणों का हवाला देते हुए छह महीने की अंतरिम जमानत प्रदान की थी। अदालत ने माना था कि उनकी उम्र और स्वास्थ्य के चलते मेडिकल ट्रीटमेंट के लिए अस्थायी जमानत देना आवश्यक है। इसी आदेश का असर गुजरात हाईकोर्ट के निर्णय पर भी देखा गया, जिसने बाद में असाराम को एक अन्य मामले में इसी आधार पर राहत दे दी।

पीड़िता का कहना है कि यह जमानत उसके लिए मानसिक और भावनात्मक रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण हो गई है। वह अब फिर से डर और असुरक्षा महसूस कर रही है, क्योंकि असाराम एक प्रभावशाली व्यक्ति हैं और पहले भी गवाहों पर दबाव बनाए जाने जैसी बातें सामने आ चुकी हैं।

पीड़िता की याचिका में क्या कहा गया है

सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में पीड़िता ने स्पष्ट रूप से कहा है कि असाराम को दी गई जमानत किसी भी तरह से उचित नहीं है। उनका तर्क है कि:

असाराम का “इलाज” कई बार जमानत लेने का आधार बन चुका है, और यह एक पैटर्न जैसा प्रतीत होता है।

यदि उन्हें छह महीने की जमानत मिल भी गई है, तो इस बीच उनकी गतिविधियों की उचित निगरानी नहीं की जा सकेगी।

जमानत पर रहते हुए असाराम या उनका नेटवर्क केस पर प्रभाव डालने की कोशिश कर सकता है, जिससे न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

पीड़िता की ओर से यह भी कहा गया है कि कोर्ट को इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि असाराम पहले ही गंभीर आरोपों और सजा का सामना कर रहे हैं। ऐसे में उन्हें किसी भी प्रकार की राहत देना पीड़िता की सुरक्षा और न्याय, दोनों को खतरे में डाल सकता है।

गुजरात हाईकोर्ट के फैसले पर भी सवाल

राजस्थान हाईकोर्ट के निर्णय का हवाला देते हुए गुजरात हाईकोर्ट ने भी असाराम को राहत दे दी थी। अब पीड़िता का कहना है कि यदि राजस्थान हाईकोर्ट का आधार ही न्यायसंगत नहीं है, तो गुजरात हाईकोर्ट का फैसला भी स्वतः संदिग्ध हो जाता है। इसलिए सुप्रीम कोर्ट को पूरे मामले की पुनर्समीक्षा करनी चाहिए।

पीड़िता ने यह भी कहा कि असाराम के स्वास्थ्य से जुड़े दावे कई बार पहले भी किए गए हैं, लेकिन हर बार यह देखा गया है कि जमानत मिलते ही उनकी “गंभीर बीमारियाँ” अचानक ठीक होने लगती हैं। यह पैटर्न न्याय के साथ खिलवाड़ जैसा प्रतीत होता है।

असाराम का प्रभाव और खतरे की आशंका

असाराम का प्रभाव देशभर में एक समय काफी बड़ा था। हजारों की संख्या में उनके अनुयायी थे और कई जगहों पर उनका नेटवर्क आज भी सक्रिय माना जाता है। इसी वजह से पीड़िता ने अपनी याचिका में यह चिंता जताई है कि जमानत का दुरुपयोग कर असाराम या उनके समर्थक केस को प्रभावित करने की कोशिश कर सकते हैं।

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से यह भी आग्रह किया है कि न्याय मिलने तक असाराम को किसी भी तरह की राहत न दी जाए, ताकि केस पर बाहरी दबाव या भय का असर न पड़े।

कानूनी विशेषज्ञों की राय

कई कानूनी विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसे मामलों में मेडिकल जमानत बेहद संवेदनशील मुद्दा होता है। अदालतों को यह सुनिश्चित करना होता है कि व्यक्ति को इलाज मिले, लेकिन साथ ही यह भी कि वह न्यायिक प्रक्रिया में बाधा न बने। वहीं, पीड़िता के अधिकार और सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

इस मामले में एक और पहलू यह है कि असाराम को पहले ही अपराध सिद्ध होने के बाद सजा सुनाई जा चुकी है। इसलिए उन्हें मिलने वाली कोई भी राहत कहीं अधिक गंभीर कानूनी जांच का विषय बन जाती है।

सुप्रीम कोर्ट का अगला कदम महत्वपूर्ण

अब मामला सुप्रीम कोर्ट के सामने है और देशभर की नज़रें इस पर टिकी हैं। यह देखा जाना बाकी है कि कोर्ट पीड़िता की दलीलों को किस तरह से लेता है और क्या वह हाईकोर्ट के फैसले को पलटकर जमानत रद्द करता है या नहीं।

पीड़िता की ओर से किए गए तर्क यह संकेत देते हैं कि यह सिर्फ कानूनी लड़ाई नहीं बल्कि उनके जीवन और सुरक्षा का सवाल भी है। वहीं, अदालत को दोनों पक्षों की दलीलें सुनकर एक संतुलित, न्यायपूर्ण और संवेदनशील फैसला लेना होगा।

The Asaram bail challenge in the Supreme Court has gained national attention after the minor survivor approached the apex court seeking cancellation of his medical bail granted earlier by the Rajasthan High Court. The petition argues that Asaram’s six-month relief was misused and also influenced the Gujarat High Court’s decision to grant similar bail. This case highlights crucial legal debates surrounding medical bail, survivor rights, and ongoing safety concerns, making it a key topic in India’s legal and crime news landscape.

spot_img
spot_imgspot_img

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

spot_imgspot_img

Share post:

New Delhi
fog
11.1 ° C
11.1 °
11.1 °
100 %
0kmh
99 %
Mon
26 °
Tue
26 °
Wed
27 °
Thu
26 °
Fri
23 °
Video thumbnail
सदन में PM मोदी के इस धाकड़ भाषण ने पाकिस्तान में तहलका मचा दिया, अचानक सुनने लगे 57 मुस्लिम देश!
14:53
Video thumbnail
बात Modi की आई... सदन में भड़के Sudhanshu Trivedi ने विरोधियों की क्लास लगा दी ! Modi | Latest
08:09
Video thumbnail
Tamil Nadu में हिन्दुओं को पीटा तो सदन में गुस्से से लाल Anurag Thakur ने M K Stalin को उधेड़ दिया!
10:50
Video thumbnail
Delhi की ज़हरीली हवा- पानी, AQI पर भड़के Sanjay Singh, Rekha Gupta को क्या कह दिया?
00:40
Video thumbnail
‘TMC सांसद पर Anurag Thakur ने लगाए ई-सिगरेट पीने के आरोप’ सुनिए क्या कहा..
01:19
Video thumbnail
संसद में Amit Shah का दिखा रौद्र रूप… जैसे ही कांग्रेस ने उकसाया सीधे सोनिया तक पहुंच गये Amit Shah!
15:15
Video thumbnail
बात वन्दे मातरम् के सम्मान की आई तो सदन में खरगे पर जमकर दहाड़े JP Nadda, खोल दिए काले चिट्ठे !
12:36
Video thumbnail
11254
00:29
Video thumbnail
चेयरमैन रजुद्दीन को पद से हटाने पर बोले जयंत चौधरी
00:17
Video thumbnail
Amit Shah on RSS and Indira Gandhi, "असम की गलियां सूनी है, इंदिरा गांधी..."
00:42

Subscribe

spot_img
spot_imgspot_img

Popular

spot_img

More like this
Related

🚨 दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण का कहर: लागू हुआ GRAP स्टेज-IV, सांस लेना हुआ मुश्किल!

AIN NEWS 1: दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR)...