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ईरान में फंसे भारतीय छात्र, पासपोर्ट जब्त और वापसी पर रोक: ओवैसी ने विदेश मंत्रालय से इवैक्यूएशन प्लान की मांग की!

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AIN NEWS 1: ईरान में तेजी से बिगड़ते राजनीतिक हालात और बढ़ती हिंसा के बीच वहां पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्रों की सुरक्षा को लेकर चिंता गहराती जा रही है। इस गंभीर मुद्दे को लेकर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्र सरकार और विदेश मंत्रालय से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है। ओवैसी का कहना है कि ईरान में हालात अब सिर्फ कूटनीतिक स्तर तक सीमित नहीं रहे, बल्कि जमीन पर हालात बेहद डरावने हो चुके हैं।

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छात्रों की शिकायतें: पासपोर्ट रोके गए, बाहर निकलने की अनुमति नहीं

ओवैसी ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक बयान के जरिए कहा कि ईरान में पढ़ रहे कई भारतीय छात्रों से उन्हें सीधे संपर्क के जरिए गंभीर जानकारियां मिली हैं। छात्रों का आरोप है कि उनकी यूनिवर्सिटीज़ ने उनके पासपोर्ट अपने पास रख लिए हैं और उन्हें देश छोड़ने की अनुमति नहीं दी जा रही। कुछ छात्रों ने यह भी बताया कि स्थानीय प्रशासन और शैक्षणिक संस्थानों की सख्ती के कारण वे अपने हॉस्टल या कैंपस तक सीमित होकर रह गए हैं।

छात्रों का कहना है कि वे लगातार डर और अनिश्चितता के माहौल में जी रहे हैं। बाहर गोलीबारी, प्रदर्शन और हिंसा की खबरें सामने आ रही हैं, लेकिन उन्हें न तो सही जानकारी मिल पा रही है और न ही सुरक्षित बाहर निकलने का कोई रास्ता।

ओवैसी की विदेश मंत्रालय से सीधी अपील

असदुद्दीन ओवैसी ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से अपील करते हुए कहा कि सरकार को सिर्फ बयान देने के बजाय एक स्पष्ट और व्यावहारिक इवैक्यूएशन प्लान सामने रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह कोई सामान्य स्थिति नहीं है, बल्कि भारतीय नागरिकों, खासकर छात्रों की जान का सवाल है।

ओवैसी ने यह भी माना कि विदेश मंत्री द्वारा ईरानी अधिकारियों से बातचीत एक सकारात्मक कदम है, लेकिन उन्होंने साफ कहा कि कूटनीतिक बातचीत का असर तब तक अधूरा है, जब तक जमीन पर फंसे छात्रों को सुरक्षित बाहर नहीं निकाला जाता।

ईरान में हालात क्यों हैं इतने चिंताजनक?

बीते कुछ समय से ईरान में राजनीतिक अस्थिरता और आंतरिक तनाव लगातार बढ़ रहा है। सरकार विरोधी प्रदर्शन, सुरक्षा बलों की कार्रवाई, इंटरनेट पाबंदियां और बाहरी दबावों के चलते आम नागरिकों के साथ-साथ विदेशी नागरिक भी मुश्किल में फंस गए हैं।

भारतीय छात्र, जो मेडिकल और तकनीकी शिक्षा के लिए बड़ी संख्या में ईरान जाते हैं, अचानक इस संकट के केंद्र में आ गए हैं। कई छात्रों के परिवार भारत में लगातार विदेश मंत्रालय, दूतावास और नेताओं से संपर्क साधने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है।

छात्रों और अभिभावकों की बढ़ती बेचैनी

भारत में बैठे छात्रों के माता-पिता बेहद परेशान हैं। उनका कहना है कि बच्चों से कभी-कभी ही बात हो पा रही है और हर कॉल डर के साथ खत्म होती है। कई परिवारों ने आरोप लगाया कि उन्हें सिर्फ आश्वासन मिल रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई मदद नहीं पहुंची है।

ओवैसी ने इस मुद्दे को मानवीय दृष्टिकोण से देखने की अपील करते हुए कहा कि सरकार को यह समझना चाहिए कि ये छात्र सिर्फ आंकड़े नहीं हैं, बल्कि परिवारों की उम्मीद और देश का भविष्य हैं।

क्या पहले भी हुआ है ऐसा इवैक्यूएशन?

भारत सरकार इससे पहले यूक्रेन, सूडान और अफगानिस्तान जैसे संकटग्रस्त देशों से अपने नागरिकों को सुरक्षित निकाल चुकी है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि ईरान के मामले में देरी क्यों हो रही है।

ओवैसी ने कहा कि अगर पहले ऑपरेशन गंगा और ऑपरेशन कावेरी जैसे मिशन सफल हो सकते हैं, तो ईरान के लिए भी एक विशेष अभियान तुरंत शुरू किया जाना चाहिए।

सरकार से क्या हैं मुख्य मांगें?

ओवैसी और छात्रों की ओर से सरकार से मुख्य रूप से ये मांगें रखी गई हैं:

ईरान में फंसे सभी भारतीय छात्रों की सही संख्या सार्वजनिक की जाए

छात्रों के पासपोर्ट वापस दिलाने के लिए ईरानी प्रशासन से तुरंत बात की जाए

इमरजेंसी हेल्पलाइन और ऑन-ग्राउंड सहायता टीम सक्रिय की जाए

जरूरत पड़ने पर विशेष विमानों के जरिए सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की जाए

राजनीति से ऊपर मानवता का सवाल

ओवैसी ने साफ कहा कि यह मुद्दा किसी पार्टी या विचारधारा का नहीं है। यह भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और सम्मान से जुड़ा सवाल है। उन्होंने सरकार से अपील की कि इस मामले में राजनीति से ऊपर उठकर तुरंत कार्रवाई की जाए।

उन्होंने यह भी कहा कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो हालात और बिगड़ सकते हैं और इसका जिम्मेदार कोई एक नहीं, बल्कि पूरा सिस्टम होगा।

नज़रें अब सरकार के अगले कदम पर

अब सबकी नजरें विदेश मंत्रालय और केंद्र सरकार के अगले फैसले पर टिकी हैं। क्या सरकार जल्द कोई आधिकारिक इवैक्यूएशन प्लान घोषित करेगी, या छात्र और उनके परिवार अभी और इंतजार करेंगे—यह आने वाले दिनों में साफ होगा।

फिलहाल, ईरान में फंसे भारतीय छात्रों की चिंता देश के भीतर एक बड़ा मुद्दा बनती जा रही है, और ओवैसी की यह आवाज़ उस चिंता को संसद और सरकार तक पहुंचाने की एक अहम कोशिश मानी जा रही है।

Asaduddin Owaisi has urged the Ministry of External Affairs to announce a clear evacuation plan for Indian students stuck in Iran amid growing political instability and violence. With reports of passports being withheld and universities restricting students from leaving, concerns over student safety in Iran have intensified. The situation highlights the urgent need for India to ensure the protection and evacuation of its citizens during international crises.

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