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खाने में कीड़े, शिकायत पर धमकी: खंडवा के आदिवासी कन्या छात्रावास की छात्राओं का 8 किलोमीटर पैदल मार्च, जांच के आदेश!

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AIN NEWS 1: मध्य प्रदेश के खंडवा जिले से सामने आई एक घटना ने सरकारी छात्रावासों की व्यवस्था और वहां रहने वाली छात्राओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सीनियर जनजातीय कन्या छात्रावास में रहने वाली छात्राओं को उस समय गहरा झटका लगा, जब उनके खाने में करीब तीन इंच लंबी इल्लियां (कीड़े) मिलीं। यह कोई एक बार की घटना नहीं थी, बल्कि छात्राओं का आरोप है कि लंबे समय से भोजन की गुणवत्ता बेहद खराब थी, लेकिन शिकायत करने पर उन्हें डराया और चुप कराया जाता रहा।

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खाने में कीड़े मिलने से भड़की छात्राएं

छात्राओं के अनुसार, रोज़मर्रा के खाने में सड़े हुए अनाज, बदबूदार सब्जियां और साफ-सफाई की भारी कमी पहले से ही समस्या बनी हुई थी। लेकिन जब थाली में साफ तौर पर बड़ी इल्लियां दिखाई दीं, तो सब्र का बांध टूट गया। कई छात्राओं की तबीयत बिगड़ गई, कुछ को उल्टी और घबराहट की शिकायत हुई।

छात्राओं ने जब इस गंभीर लापरवाही की शिकायत वार्डन से की, तो उन्हें समाधान मिलने की उम्मीद थी। लेकिन आरोप है कि वार्डन ने उनकी बात सुनने के बजाय उल्टा उन्हें धमकाना शुरू कर दिया।

वार्डन पर गंभीर आरोप: “घरवालों को प्राइवेट बातें बता दूंगी”

छात्राओं का कहना है कि वार्डन ने शिकायत करने वाली लड़कियों को यह कहकर डराया कि अगर वे ज्यादा बोलेंगी या बाहर शिकायत करेंगी, तो उनकी निजी बातें उनके परिवार वालों को बता दी जाएंगी।

एक छात्रा ने नाम न छापने की शर्त पर बताया,

“हम यहां पढ़ने आए हैं, लेकिन डर के माहौल में जीने को मजबूर हैं। खाने की शिकायत करना भी गुनाह बना दिया गया।”

इस तरह की धमकियों ने छात्राओं को मानसिक रूप से तोड़ दिया। कई लड़कियां रोने लगीं और खुद को असुरक्षित महसूस करने लगीं।

8 किलोमीटर पैदल मार्च कर पहुंचीं कलेक्ट्रेट

जब छात्रावास स्तर पर उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई, तो छात्राओं ने असाधारण कदम उठाने का फैसला किया। दर्जनों छात्राएं खंडवा शहर तक करीब 8 किलोमीटर पैदल मार्च करती हुई कलेक्ट्रेट पहुंचीं और वहां धरने पर बैठ गईं।

तेज धूप और थकान के बावजूद छात्राओं का कहना था कि

“अगर आज नहीं बोले, तो कल हालात और खराब होंगे।”

धरने के दौरान छात्राओं ने हाथों में तख्तियां लेकर नारे लगाए और प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की।

प्रशासन हरकत में आया, जांच के आदेश

छात्राओं के धरने की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन में हलचल मच गई। अपर कलेक्टर आईएएस सृष्टि देशमुख मौके पर पहुंचीं और छात्राओं से सीधे बातचीत की। उन्होंने छात्राओं की शिकायतों को गंभीरता से सुना और भरोसा दिलाया कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी।

आईएएस सृष्टि देशमुख ने स्पष्ट कहा कि

“छात्राओं की सेहत और सम्मान से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। यदि आरोप सही पाए गए, तो दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी।”

उन्होंने भोजन व्यवस्था, छात्रावास की साफ-सफाई और वार्डन के व्यवहार की अलग-अलग जांच कराने के निर्देश दिए।

भोजन व्यवस्था और छात्रावास प्रबंधन पर सवाल

यह घटना सिर्फ एक छात्रावास तक सीमित नहीं मानी जा रही। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी छात्रावासों में नियमित निरीक्षण की कमी, ठेकेदारों की मनमानी और जवाबदेही के अभाव के कारण ऐसी समस्याएं बार-बार सामने आती हैं।

छात्राओं ने मांग की है कि

भोजन की गुणवत्ता की नियमित जांच हो

वार्डन को बदला जाए

शिकायत के लिए सुरक्षित और गोपनीय व्यवस्था बनाई जाए

दोषियों पर लिखित कार्रवाई की जाए

छात्राओं की शिक्षा और सम्मान का सवाल

जनजातीय कन्या छात्रावासों का उद्देश्य आदिवासी बेटियों को सुरक्षित माहौल में शिक्षा देना है। लेकिन खंडवा की यह घटना बताती है कि कहीं न कहीं सिस्टम अपने उद्देश्य से भटक रहा है।

छात्राओं का कहना है कि वे सिर्फ अच्छा खाना नहीं, बल्कि सम्मान और सुरक्षा भी चाहती हैं। एक छात्रा ने भावुक होकर कहा,

“हम गरीब घरों से आते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हमें खराब खाना और अपमान सहना पड़े।”

जांच के बाद क्या?

फिलहाल प्रशासन ने जांच समिति गठित कर दी है। रिपोर्ट आने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि छात्राओं के आरोपों में कितनी सच्चाई है। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया है कि अगर छात्राएं एकजुट होकर आवाज उठाएं, तो व्यवस्था को झुकना ही पड़ता है।

The Khandwa girls hostel controversy has raised serious concerns about food safety and student welfare in Madhya Pradesh government hostels. Tribal girl students alleged that worms were found in hostel food and that the warden threatened them when they protested. The incident escalated when students walked 8 kilometers to the collectorate, prompting IAS Srushti Deshmukh to order an official inquiry. This case highlights ongoing issues of hostel management, warden harassment, and the need for strict monitoring of girls hostels in India.

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