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दिल्ली-एनसीआर में लागू हुआ GRAP-3: वायु प्रदूषण पर काबू पाने के लिए कड़े प्रतिबंध

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AIN NEWS 1 | दिल्ली और एनसीआर में लगातार बढ़ते प्रदूषण स्तर ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। हवा इतनी ज़हरीली हो चुकी है कि सांस लेना तक मुश्किल हो गया है। इसी बिगड़ती स्थिति को देखते हुए पर्यावरण प्रदूषण (रोकथाम और नियंत्रण) प्राधिकरण (CAQM) ने GRAP-3 (Graded Response Action Plan – Stage 3) लागू कर दिया है।
इस चरण में ऐसे सख्त प्रतिबंध लगाए जाते हैं जो वायु प्रदूषण के सबसे बड़े स्रोतों — धूल, वाहनों, और औद्योगिक गतिविधियों — को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। आइए विस्तार से समझते हैं कि GRAP-3 के तहत कौन-कौन से नियम लागू हुए हैं और उनका आम जनता पर क्या असर पड़ेगा।

 1. गैर-जरूरी निर्माण और तोड़फोड़ पर पूरी तरह रोक

GRAP-3 लागू होने के बाद अब दिल्ली-एनसीआर में सभी गैर-जरूरी निर्माण और विध्वंस कार्यों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसमें मिट्टी खुदाई, पाइलिंग, ट्रेंचिंग, और खुले में चलने वाले Ready-Mix Concrete (RMC) प्लांट्स का संचालन भी शामिल है।
इसका मकसद निर्माण स्थलों से उड़ने वाली धूल को रोकना है, क्योंकि यह हवा में PM 2.5 और PM 10 कणों को कई गुना बढ़ा देती है।

 2. पुरानी गाड़ियों पर रोक

प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने BS-3 पेट्रोल और BS-4 डीज़ल चार पहिया वाहनों के चलने पर रोक लगा दी है।
यह प्रतिबंध न केवल दिल्ली में, बल्कि आसपास के एनसीआर ज़िलों जैसे गाज़ियाबाद, नोएडा, गुरुग्राम और फरीदाबाद में भी लागू रहेगा।
जो वाहन आवश्यक सेवाओं में नहीं आते, उन्हें सड़कों से पूरी तरह हटाने के निर्देश दिए गए हैं।

 3. निर्माण सामग्री के परिवहन पर रोक

धूल नियंत्रण के लिए रेत, सीमेंट और मिट्टी जैसी निर्माण सामग्रियों को ढोने वाले ट्रकों पर भी रोक लगा दी गई है, खासकर उन रास्तों पर जो कच्चे या अधूरे बने हैं।
यह फैसला इसलिए लिया गया है क्योंकि ऐसे ट्रक चलते समय बड़ी मात्रा में धूल उड़ाते हैं, जिससे आस-पास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता और खराब हो जाती है।

 4. पत्थर क्रशर, माइनिंग और हॉट-मिक्स प्लांट्स बंद

GRAP-3 के तहत अब ऐसे सभी उद्योग और संयंत्र बंद कर दिए गए हैं जो साफ़ ईंधन (clean fuel) पर नहीं चल रहे।
इसमें पत्थर क्रशर, हॉट-मिक्स प्लांट्स और माइनिंग गतिविधियाँ शामिल हैं। इनसे निकलने वाला धुआँ और सूक्ष्म कण वायु प्रदूषण के सबसे बड़े कारणों में से एक हैं।

 5. डीज़ल जनरेटर के उपयोग पर रोक

अब डीज़ल जनरेटर (DG sets) चलाने पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। केवल आपातकालीन सेवाओं जैसे अस्पताल, एयरपोर्ट, मेट्रो या जरूरी सरकारी संस्थान को ही इससे छूट दी गई है।
निजी सोसाइटी, दफ्तर या कार्यक्रमों में डीज़ल जनरेटर का उपयोग करने पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

 6. इंटर-स्टेट डीज़ल बसों पर पाबंदी

दिल्ली की सीमाओं में अब अन्य राज्यों से आने वाली डीज़ल बसों के प्रवेश पर भी रोक लगा दी गई है।
इसके पीछे मकसद है दिल्ली में बाहरी वाहनों से होने वाले धुएं को कम करना। केवल CNG, इलेक्ट्रिक या अन्य स्वच्छ ईंधन से चलने वाली बसों को ही प्रवेश की अनुमति होगी।

 7. निजी कंपनियों को ‘वर्क फ्रॉम होम’ की सलाह

वाहनों की संख्या कम करने के लिए सरकार ने निजी कंपनियों से अपील की है कि वे अपने कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम या हाइब्रिड मोड में काम करने की सुविधा दें।
इस कदम से ऑफिस जाने वाली गाड़ियों की संख्या घटेगी और सड़कों पर निकलने वाले प्रदूषण में कमी आएगी।

 8. पांचवीं तक के स्कूल बंद

सबसे संवेदनशील वर्ग यानी बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सरकार ने कक्षा 5 तक के स्कूलों को बंद करने का आदेश दिया है।
इन कक्षाओं की पढ़ाई अब ऑनलाइन माध्यम से होगी ताकि बच्चों को जहरीली हवा से बचाया जा सके।
वहीं, उच्च कक्षाओं में वायु गुणवत्ता की स्थिति देखकर आगे निर्णय लिया जाएगा।

9. क्यों जरूरी है GRAP-3

GRAP-3 दरअसल एक आपातकालीन योजना है जो तब लागू की जाती है जब AQI (Air Quality Index) “Severe” श्रेणी यानी 400 से ऊपर पहुँच जाता है।
इस स्तर पर हवा इतनी जहरीली हो जाती है कि स्वस्थ व्यक्ति को भी सांस लेने में तकलीफ, आंखों में जलन, और गले में खराश जैसी दिक्कतें होने लगती हैं।
ऐसे में केवल प्रशासनिक उपाय नहीं, बल्कि नागरिकों की भागीदारी भी बेहद ज़रूरी हो जाती है।

 10. नागरिकों के लिए जरूरी सलाह

  • सुबह या देर शाम के समय बाहर टहलने से बचें।

  • N-95 मास्क का इस्तेमाल करें।

  • घरों में एयर प्यूरिफायर या पौधे लगाएं।

  • वाहन का अनावश्यक उपयोग न करें, कारपूल या पब्लिक ट्रांसपोर्ट अपनाएं।

  • बच्चों और बुजुर्गों को बाहरी गतिविधियों से दूर रखें।

GRAP-3 सिर्फ एक सरकारी आदेश नहीं, बल्कि हम सभी के लिए चेतावनी है कि अगर हम अब भी प्रदूषण के प्रति लापरवाह रहे तो आने वाले दिनों में स्थिति और भयावह हो सकती है।
हमें अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी — चाहे वह धूल उड़ाने से बचना हो, गाड़ी कम चलाना हो, या आसपास हरियाली बढ़ाना हो।
दिल्ली-एनसीआर को फिर से सांस लेने लायक बनाने की जिम्मेदारी प्रशासन के साथ-साथ हम सभी नागरिकों की भी है।

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