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बीजापुर के जंगलों में बड़ा एनकाउंटर: DRG जवान शहीद, सुरक्षा बलों ने पांच नक्सलियों को किया ढेर!

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AIN NEWS 1: छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा बल लगातार अभियान चला रहे हैं। बुधवार सुबह बीजापुर जिले के घने जंगलों में एक ऐसा ही एंटी-नक्सल ऑपरेशन शुरू किया गया था। शुरुआत में यह एक सामान्य तलाशी अभियान की तरह था, लेकिन धीरे-धीरे हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए और यह मिशन एक बड़े मुठभेड़ में बदल गया।

सुबह-सुबह ऑपरेशन शुरू, जंगलों में हलचल तेज

बीजापुर का इलाका लंबे समय से नक्सल गतिविधियों के लिए कुख्यात रहा है। इसी क्षेत्र में जिला रिज़र्व गार्ड (DRG), स्थानीय पुलिस और CRPF की संयुक्त टीम नक्सलियों की मौजूदगी की सूचना मिलने के बाद अभियान पर निकली थी। बताया गया कि सुरक्षा बलों को लगातार यह इनपुट मिल रहा था कि कुछ नक्सली गांवों और जंगलों की ओर सक्रिय रूप से मूवमेंट कर रहे हैं और किसी बड़ी वारदात की साजिश रच रहे हैं।

जैसे ही टीम जंगल के अंदर गहराई में पहुंची, उन्हें कुछ संदिग्ध आवाजें सुनाई दीं। सुरक्षा बलों ने तुरंत खुद को युद्धक स्थिति में डाल दिया। तभी अचानक घात लगाकर बैठे नक्सलियों ने गोलीबारी शुरू कर दी।

घेराबंदी के बीच घंटों चली मुठभेड़

दोनों ओर से लगातार फायरिंग होती रही। DRG और अन्य बलों ने बेहद संयम के साथ जवाबी कार्रवाई की। यह मुठभेड़ कई घंटों तक चली, जिसमें नक्सलियों ने अपनी ओर से सुरक्षा बलों को भारी नुकसान पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन संयुक्त दल ने मोर्चा संभाले रखा।

एक-एक करके सुरक्षा बलों ने फायरिंग को काउंटर किया और नक्सलियों को दबोचते हुए आगे बढ़े। इसी दौरान पांच नक्सली मारे गए। उनके पास से हथियार, गोला-बारूद और कई महत्वपूर्ण सामग्री भी बरामद हुई।

एक जवान शहीद – सबसे बड़ी कीमत

इस मुठभेड़ में जिले के बहादुर जवानों ने साहस का अद्भुत प्रदर्शन किया। लेकिन दुर्भाग्य से DRG का एक जवान गोलीबारी के दौरान गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे तुरंत बाहर निकालने की कोशिश की गई, लेकिन उसकी हालत इतनी गंभीर थी कि उसने अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ दिया।

जवान की शहादत ने पूरे सुरक्षा बल को भावुक कर दिया। साथी जवानों ने बताया कि वह हमेशा हर ऑपरेशन में सबसे आगे रहता था और अपने काम के प्रति बेहद समर्पित था।

जंगल से मिले सुराग – और बड़ी कार्रवाई की उम्मीद

मुठभेड़ स्थल की तलाशी लेने पर पता चला कि नक्सलियों के पास से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और हथियार मिले हैं। इनसे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि नक्सली किसी बड़ी योजना पर काम कर रहे थे। सुरक्षा बलों का मानना है कि क्षेत्र में अभी भी कुछ और नक्सली छिपे हो सकते हैं। फिलहाल पूरे इलाके को घेरकर सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया गया है।

बीजापुर में नक्सलियों की गतिविधियां क्यों बढ़ती हैं?

बीजापुर जिला नक्सलियों के लिए एक प्रमुख गढ़ माना जाता है। यहां घने जंगल, ऊबड़-खाबड़ जमीन और गांवों के बीच दूरी के कारण सुरक्षा बलों को ऑपरेशन में काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। नक्सली इन प्राकृतिक परिस्थितियों का फायदा उठाते हुए सुरक्षा बलों पर घात लगाकर हमला करते हैं।

हालांकि पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षा बलों ने कई सफल ऑपरेशनों के जरिए नक्सलियों की ताकत को काफी कमजोर किया है। लेकिन अभी भी कुछ बड़े मॉड्यूल इस इलाके में सक्रिय हैं, जिन्हें खत्म करने के लिए लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं।

लोगों में डर, लेकिन सुरक्षा बलों पर भरोसा

मुठभेड़ की खबर फैलते ही आसपास के गांवों में डर का माहौल बन गया। ग्रामीणों ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से जंगलों में अजीब गतिविधियां देखी जा रही थीं। उन्हें डर था कि नक्सली फिर कुछ बड़ी वारदात कर सकते हैं, लेकिन ऑपरेशन ने उनकी योजना को विफल कर दिया।

कई ग्रामीणों ने सुरक्षा बलों को धन्यवाद देते हुए कहा कि वे तभी सुरक्षित महसूस करते हैं जब पुलिस और DRG गांवों के पास मौजूद रहते हैं।

सरकार और पुलिस का बयान

छत्तीसगढ़ पुलिस ने मुठभेड़ की पुष्टि करते हुए कहा कि ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा। पांच नक्सलियों का मारा जाना नक्सल नेटवर्क के लिए बड़ा झटका है। पुलिस अधिकारियों ने शहीद जवान के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की और कहा कि उसकी शहादत को हमेशा याद रखा जाएगा।

राज्य सरकार ने भी इसे एक महत्वपूर्ण कदम बताया और कहा कि सरकार नक्सलवाद को पूरी तरह खत्म करने के लिए हरसंभव कदम उठा रही है।

बीजापुर का यह एन्काउंटर नक्सलियों की कमर तोड़ने की दिशा में एक और अहम सफलता है। सुरक्षा बलों ने अपनी जान जोखिम में डालकर न केवल पांच खतरनाक नक्सलियों को ढेर किया, बल्कि एक बड़ी साजिश को भी नाकाम कर दिया। हालांकि, इस बहादुरी की कीमत एक जवान की शहादत के रूप में चुकानी पड़ी।

राज्य के नक्सल प्रभावित इलाकों में ऐसी सफलता यह दिखाती है कि सुरक्षा बल पूरी तत्परता के साथ हर खतरे का मुकाबला करने को तैयार हैं।

The Bijapur encounter in Chhattisgarh turned into a major anti-Naxal operation where security forces eliminated five Naxalites, while a DRG jawan was martyred during the intense gunfight. This incident highlights the ongoing anti-Naxal operations, rising Naxalite activities, and the dedication of DRG and security forces in restoring peace in Chhattisgarh’s sensitive regions. The operation in the dense Bijapur forests reflects the strong commitment of forces to counter Naxal insurgency.

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