AIN NEWS 1 | मुंबई में फुटपाथ से हटाए जा रहे फेरीवालों के पुनर्वासन की मांग तेज हो गई है। शिवसेना उत्तर भारतीय संगठन मुंबई के उपाध्यक्ष संतोष सिंह ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और मुंबई की महापौर रितु तावडे को पत्र लिखकर प्रभावित फेरीवालों के लिए पुनर्वासन नीति लागू करने की मांग की है।
संतोष सिंह ने अपने पत्र में कहा कि मुंबई में अवैध अतिक्रमण हटाने और शहर को स्वच्छ, सुंदर तथा सुव्यवस्थित बनाने के लिए फुटपाथ से फेरीवालों को हटाने की कार्रवाई की जा रही है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कई फेरीवाले वर्षों से फुटपाथ पर छोटे व्यवसाय के माध्यम से अपने परिवार का भरण पोषण कर रहे थे। ऐसे में अचानक हटाए जाने से हजारों परिवारों की आजीविका पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
उन्होंने कहा कि फेरीवालों की कमाई पर ही उनके परिवार का पूरा खर्च चलता है, जिसमें बच्चों की शिक्षा, घर का किराया और दैनिक जीवन की आवश्यकताएं शामिल हैं। कार्रवाई के बाद इन परिवारों के सामने आर्थिक अस्थिरता की स्थिति बन गई है और कई बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित होने की आशंका है।
संतोष सिंह के अनुसार प्रभावित फेरीवालों में बड़ी संख्या उत्तर भारतीय समुदाय के लोगों की है, जो लंबे समय से मुंबई में छोटे स्तर के व्यापार के माध्यम से जीवनयापन कर रहे हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के साथ-साथ फेरीवालों के पुनर्वासन की स्पष्ट व्यवस्था भी की जाए, ताकि उनकी रोजी-रोटी पूरी तरह समाप्त न हो।
उन्होंने सुझाव दिया कि महानगरपालिका और राज्य सरकार संयुक्त रूप से वैकल्पिक बाजार क्षेत्र, निर्धारित वेंडिंग जोन और नियोजित व्यापार स्थल विकसित कर सकती है, जहां इन फेरीवालों को स्थान देकर उनके रोजगार को सुरक्षित किया जा सके। इससे शहर में व्यवस्था भी बनी रहेगी और गरीब परिवारों की आजीविका भी सुरक्षित रहेगी।
पत्र में उन्होंने यह भी कहा कि मानवीय आधार पर पुनर्वासन की व्यवस्था करना प्रशासन की सामाजिक जिम्मेदारी है। यदि प्रभावित फेरीवालों को वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराया जाता है तो यह कदम न केवल उनके परिवारों को आर्थिक संकट से बचाएगा बल्कि शहर में संतुलित और मानवीय शहरी विकास का उदाहरण भी बनेगा।
संतोष सिंह ने राज्य सरकार और मुंबई महानगरपालिका से आग्रह किया है कि फेरीवालों के पुनर्वासन के लिए शीघ्र ठोस नीति बनाई जाए, जिससे हजारों छोटे व्यापारियों और उनके परिवारों को स्थायी आजीविका का अवसर मिल सके।


















