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उत्तर प्रदेश में लागू होगी हफ्ते में 2 दिन वर्क फ्रॉम होम व्यवस्था, अलग-अलग शिफ्ट में खुलेंगे दफ्तर!

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AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश में बदलते हालात और बढ़ती ईंधन चुनौतियों के बीच राज्य सरकार अब नई कार्यसंस्कृति की ओर कदम बढ़ा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अपील के बाद उत्तर प्रदेश के श्रम विभाग ने बड़ा निर्णय लिया है। राज्य में अब सप्ताह में दो दिन “वर्क फ्रॉम होम” व्यवस्था लागू करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। इसके साथ ही सरकारी और बड़े निजी संस्थानों में अलग-अलग शिफ्ट में कार्यालय संचालन पर भी जोर दिया जाएगा।

रविवार को आयोजित श्रम विभाग की अहम बैठक में इस नई व्यवस्था को लेकर कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। सरकार का उद्देश्य सिर्फ कर्मचारियों को सुविधा देना नहीं है, बल्कि ईंधन की बचत, ट्रैफिक नियंत्रण, प्रदूषण में कमी और डिजिटल कार्यसंस्कृति को बढ़ावा देना भी है।

क्या है नई वर्क फ्रॉम होम व्यवस्था?

श्रम विभाग द्वारा तैयार की गई योजना के अनुसार, उत्तर प्रदेश में बड़े संस्थानों और 50 से अधिक कर्मचारियों वाली कंपनियों में सप्ताह में कम से कम दो दिन कर्मचारियों को घर से काम करने की सुविधा दी जाएगी। इसे चरणबद्ध तरीके से लागू करने की तैयारी की जा रही है।

सरकार का मानना है कि इससे कर्मचारियों पर यात्रा का दबाव कम होगा और पेट्रोल-डीजल की खपत में भी बड़ी बचत हो सकेगी। खासतौर पर ऐसे समय में जब पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों को लेकर चिंता बढ़ रही है।

अलग-अलग शिफ्ट में खुलेंगे दफ्तर

वर्क फ्रॉम होम के साथ-साथ कार्यालयों में अलग-अलग शिफ्ट लागू करने पर भी जोर दिया गया है। इसका उद्देश्य एक ही समय पर बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही को कम करना है।

नई गाइडलाइन के अनुसार:

कुछ दफ्तर सुबह जल्दी खुल सकते हैं।

कुछ कार्यालय दोपहर या शाम की शिफ्ट में संचालित होंगे।

कर्मचारियों को अलग-अलग समय पर बुलाने की योजना बनाई जाएगी।

भीड़भाड़ वाले इलाकों में ट्रैफिक कम करने की कोशिश होगी।

सरकार को उम्मीद है कि इससे शहरों में जाम की समस्या कम होगी और सार्वजनिक परिवहन पर दबाव भी घटेगा।

सार्वजनिक परिवहन के इस्तेमाल पर जोर

राज्य सरकार ने सिर्फ वर्क फ्रॉम होम तक ही सीमित रहने की बजाय लोगों को सार्वजनिक परिवहन अपनाने के लिए भी प्रेरित किया है। श्रम विभाग की बैठक में यह सुझाव दिया गया कि कर्मचारी निजी वाहनों की जगह मेट्रो, बस, ई-रिक्शा और कारपूलिंग का अधिक उपयोग करें।

इसके पीछे सरकार का मकसद ईंधन बचाना और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है। आने वाले समय में इसको लेकर जागरूकता अभियान भी चलाए जा सकते हैं।

CM योगी ने पहले ही दिए थे संकेत

दरअसल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 13 मई को हुई कैबिनेट बैठक में इस दिशा में संकेत दे दिए थे। मंत्रिमंडल विस्तार के बाद आयोजित पहली बैठक में उन्होंने राज्य में नई कार्यप्रणाली लागू करने पर चर्चा की थी।

मुख्यमंत्री ने कहा था कि:

सप्ताह में दो दिन वर्क फ्रॉम होम व्यवस्था लागू की जाए।

कर्मचारियों को सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया जाए।

डिजिटल और हाइब्रिड कार्यसंस्कृति को बढ़ावा दिया जाए।

सरकारी वाहनों की संख्या में कमी लाई जाए।

मुख्यमंत्री ने यह भी सुझाव दिया था कि 50 से अधिक कर्मचारियों वाले संस्थानों में यह व्यवस्था प्राथमिकता के आधार पर लागू की जाए।

ईंधन बचत अभियान पर सरकार का फोकस

उत्तर प्रदेश सरकार इस समय बड़े स्तर पर “फ्यूल सेविंग मॉडल” पर काम कर रही है। इसके तहत कई अहम निर्देश जारी किए गए हैं।

सरकार के प्रमुख निर्देश

सरकारी वाहनों के बेड़े में 50 प्रतिशत तक कटौती

वर्चुअल मीटिंग्स को बढ़ावा

कारपूलिंग को प्रोत्साहन

साइकिलिंग को बढ़ावा

इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग पर जोर

विदेश यात्राओं में कमी

डिजिटल ऑफिस सिस्टम को मजबूत करना

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों से भी अपील की है कि वे सप्ताह में कम से कम एक दिन सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करें।

औद्योगिक इकाइयों में भी लागू हो सकती है व्यवस्था

जानकारी के मुताबिक, सरकार इस नीति को सिर्फ सरकारी दफ्तरों तक सीमित नहीं रखना चाहती। औद्योगिक इकाइयों और निजी कंपनियों में भी इसे लागू करने पर चर्चा चल रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इससे:

कर्मचारियों की उत्पादकता बढ़ सकती है।

कार्यालय खर्च में कमी आएगी।

बिजली और ईंधन की बचत होगी।

ट्रैफिक और प्रदूषण में राहत मिलेगी।

हालांकि कुछ सेक्टर ऐसे भी हैं जहां वर्क फ्रॉम होम पूरी तरह लागू करना आसान नहीं होगा। ऐसे में सरकार हाइब्रिड मॉडल पर जोर दे रही है।

कर्मचारियों को मिल सकती है बड़ी राहत

दिल्ली-एनसीआर और उत्तर प्रदेश के बड़े शहरों में काम करने वाले लाखों कर्मचारियों को इस फैसले से राहत मिलने की उम्मीद है। रोजाना घंटों ट्रैफिक में फंसने वाले लोगों को अब सप्ताह में दो दिन घर से काम करने का मौका मिल सकता है।

इसके अलावा:

यात्रा खर्च कम होगा

मानसिक तनाव घटेगा

परिवार के साथ समय बढ़ेगा

कार्य-जीवन संतुलन बेहतर होगा

विशेषज्ञों का कहना है कि कोविड महामारी के बाद वर्क फ्रॉम होम मॉडल ने अपनी उपयोगिता साबित की है और अब कई राज्य इसे स्थायी व्यवस्था की तरह अपनाने पर विचार कर रहे हैं।

डिजिटल इंडिया और हाइब्रिड संस्कृति को मिलेगा बढ़ावा

सरकार का यह कदम डिजिटल इंडिया अभियान को भी मजबूती देगा। वर्चुअल मीटिंग्स, ऑनलाइन फाइल सिस्टम और डिजिटल प्रशासन को बढ़ावा मिलने से सरकारी कामकाज अधिक आधुनिक और तेज हो सकता है।

हाइब्रिड वर्क मॉडल को भविष्य की कार्यसंस्कृति माना जा रहा है। इसमें कर्मचारी कुछ दिन ऑफिस और कुछ दिन घर से काम करते हैं। इससे संस्थानों को भी संसाधनों का बेहतर उपयोग करने में मदद मिलती है।

आने वाले समय में जारी हो सकती हैं विस्तृत गाइडलाइन

फिलहाल श्रम विभाग ने इस दिशा में शुरुआती गाइडलाइन जारी की है। आने वाले दिनों में विभाग विस्तृत नियम और लागू करने की प्रक्रिया भी जारी कर सकता है।

संभावना है कि:

विभागवार शिफ्ट तय की जाएंगी

संस्थानों को रिपोर्टिंग सिस्टम देना होगा

कर्मचारियों की उपस्थिति डिजिटल तरीके से दर्ज होगी

हाइब्रिड मॉडल के लिए अलग SOP तैयार होगी

राज्य सरकार का लक्ष्य है कि नई व्यवस्था से प्रशासनिक कामकाज प्रभावित हुए बिना ईंधन बचत और पर्यावरण संरक्षण दोनों को बढ़ावा मिले।

The Uttar Pradesh government has announced a major work from home policy allowing employees in large organizations to work remotely for two days a week. Under the leadership of Chief Minister Yogi Adityanath, the state is also introducing staggered office shifts, promoting public transport, hybrid work culture, fuel conservation, virtual meetings, and digital governance. The UP Labor Department’s latest decision aims to reduce traffic congestion, save petrol and diesel consumption, and modernize workplace systems across Uttar Pradesh.

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