AIN NEWS 1 : उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले से एक चौंकाने वाला घोटाला सामने आया है, जिसने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक साधारण पद पर तैनात चपरासी इलहाम-उर-रहमान शम्सी ने अपनी चालाकी और सिस्टम की कमजोरियों का फायदा उठाकर करोड़ों रुपये का गबन कर लिया। इस मामले में पुलिस ने अब बड़ी कार्रवाई करते हुए आरोपी की दो पत्नियों समेत कई रिश्तेदारों को गिरफ्तार किया है।
कैसे सामने आया पूरा मामला
यह पूरा मामला फरवरी 2026 में उस समय उजागर हुआ, जब बैंक ऑफ बड़ौदा के एक शाखा प्रबंधक को संदिग्ध लेन-देन का पता चला। उन्होंने पीलीभीत के जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह को एक पत्र लिखकर जानकारी दी कि ट्रेजरी से 1 करोड़ 15 लाख रुपये एक निजी खाते में ट्रांसफर किए गए हैं। यह ट्रांजैक्शन सामान्य प्रक्रिया से अलग और संदिग्ध था।
इस सूचना को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने तुरंत तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया। जब जांच शुरू हुई तो धीरे-धीरे एक बड़े फर्जीवाड़े की परतें खुलने लगीं।
मास्टरमाइंड निकला चपरासी इलहाम
जांच में सामने आया कि इस पूरे घोटाले का मास्टरमाइंड इलहाम-उर-रहमान शम्सी है, जो बीसलपुर इंटर कॉलेज में तैनात था। यह कॉलेज जिला मुख्यालय से लगभग 40 किलोमीटर दूर स्थित है।
करीब आठ साल पहले उसने जुगाड़ के जरिए जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) कार्यालय में अपना अटैचमेंट करा लिया। यहीं से उसे सिस्टम तक पहुंच मिली और उसने फर्जीवाड़े की शुरुआत की।
फर्जी सैलरी टोकन से खेल
इलहाम ने अपनी स्थिति का फायदा उठाते हुए सैलरी टोकन जनरेट करने की जिम्मेदारी अपने हाथ में ले ली। उसने फर्जी शिक्षकों और कर्मचारियों के नाम पर टोकन बनाकर सरकारी खजाने से पैसे निकलवाने शुरू कर दिए।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि खातों में जिन लोगों के नाम दिखाए गए, वे असली कर्मचारी नहीं थे। असल में पैसे उसके अपने परिवार और रिश्तेदारों के खातों में भेजे जा रहे थे।
परिवार को बनाया फर्जी कर्मचारी
इलहाम ने अपने इस अवैध नेटवर्क में अपने परिवार के कई लोगों को शामिल किया। उसने अपनी तीन पत्नियों, सास, साली और अन्य रिश्तेदारों को कागजों में शिक्षक, क्लर्क और ठेकेदार तक बना दिया।
इन सभी के नाम पर फर्जी भुगतान दिखाकर करोड़ों रुपये उनके खातों में ट्रांसफर किए गए। यह खेल पिछले करीब आठ साल से लगातार चलता रहा।
53 बैंक खातों का इस्तेमाल
जांच के दौरान पुलिस को अब तक 53 ऐसे बैंक खाते मिले हैं, जिनमें घोटाले की रकम भेजी गई थी। इनमें से जिन सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है, उनके खातों में ही करीब 8 करोड़ 15 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए थे।
यह पैसा सरकारी वेतन और फर्जी कामों के भुगतान के नाम पर भेजा गया था।
5.5 करोड़ रुपये फ्रीज
पुलिस और प्रशासन ने मिलकर त्वरित कार्रवाई करते हुए अलग-अलग बैंक खातों में जमा लगभग 5 करोड़ 50 लाख रुपये को फ्रीज कर दिया है, ताकि आगे कोई लेन-देन न हो सके।
गिरफ्तारियां और आरोप
इस मामले में पुलिस ने अब तक कई लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें शामिल हैं:
लुबना (पत्नी)
अजारा खान (पत्नी)
फातिमा (साली)
नाहिद (सास)
आफिया खान (रिश्तेदार)
परवीन खातून (परिचित)
आशकारा परवीन (परिचित)
इससे पहले इलहाम की पहली पत्नी अर्शी खातून को भी गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका था, जो फिलहाल जमानत पर बाहर है।
सिस्टम की बड़ी चूक
यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति की चालाकी नहीं, बल्कि सिस्टम की बड़ी लापरवाही को भी उजागर करता है। इतने लंबे समय तक फर्जी सैलरी टोकन बनना और करोड़ों रुपये का ट्रांसफर होना इस बात का संकेत है कि निगरानी व्यवस्था कमजोर थी।
अगर बैंक स्तर पर यह मामला सामने नहीं आता, तो संभव है कि यह घोटाला और लंबे समय तक चलता रहता।
आगे की जांच जारी
पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या इस घोटाले में और भी अधिकारी या कर्मचारी शामिल थे। साथ ही, जिन खातों में पैसे ट्रांसफर हुए हैं, उनकी पूरी जांच की जा रही है।
संभावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
The Pilibhit scam of 2026 highlights a major corruption case in Uttar Pradesh where Ilham ur Rahman Shamsi, a peon linked to the DIOS office, orchestrated an ₹8 crore fraud using fake salary tokens and ghost teachers. The scam involved multiple bank accounts, relatives, and fraudulent financial transactions, exposing serious loopholes in the education department and treasury system.


















