AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश की राजनीति में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर चर्चाएं अभी से तेज होने लगी हैं। इसी बीच ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने एक ऐसा बयान दिया है, जिसने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। इटावा पहुंचे शंकराचार्य ने साफ कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव में वही राजनीतिक दल सत्ता तक पहुंचेगा, जो गोमाता की रक्षा को अपनी प्राथमिकता बनाएगा और गोसंरक्षण के लिए ईमानदारी से कार्य करेगा।
शंकराचार्य का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब प्रदेश में विभिन्न राजनीतिक दल 2027 के चुनावी समीकरण तैयार करने में जुटे हैं। उन्होंने कहा कि देश और प्रदेश के मतदाताओं को केवल नारों और वादों के आधार पर निर्णय नहीं लेना चाहिए, बल्कि यह देखना चाहिए कि कौन-सी राजनीतिक पार्टी वास्तव में गोसंरक्षण के लिए काम कर रही है। उनके अनुसार, गोमाता भारतीय संस्कृति, आस्था और सनातन परंपरा का केंद्र है, इसलिए गोरक्षा केवल धार्मिक विषय नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक जिम्मेदारी भी है।
वर्तमान सरकार पर साधा निशाना
अपने संबोधन के दौरान शंकराचार्य ने बिना किसी दल का नाम लिए मौजूदा सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जो लोग स्वयं को हिंदू हितों का सबसे बड़ा रक्षक बताते हैं, वे हिंदू धर्म के मूल सिद्धांतों को ही भूल चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावों के दौरान गोरक्षा के नाम पर जनता से बड़े-बड़े वादे किए गए थे, लेकिन सत्ता में आने के बाद उन वादों को पूरी तरह लागू नहीं किया गया।
शंकराचार्य ने कहा कि यदि कोई सरकार वास्तव में हिंदू मूल्यों की बात करती है, तो उसे गोवंश संरक्षण के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाने चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि केवल धार्मिक भावनाओं का राजनीतिक लाभ उठाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर परिणाम दिखाई देने चाहिए।
गोरक्षा यात्रा के जरिए जनता तक पहुंच रहे शंकराचार्य
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बताया कि उन्होंने 3 मई से गोरखपुर से अपनी गोरक्षा यात्रा की शुरुआत की है। यह यात्रा उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से होकर गुजर रही है और इसका उद्देश्य लोगों को गोसंरक्षण के महत्व के प्रति जागरूक करना है।
उन्होंने कहा कि यात्रा के दौरान वे गांव-गांव और शहर-शहर जाकर लोगों से संवाद कर रहे हैं। लोगों को यह समझाने का प्रयास किया जा रहा है कि मतदान केवल जाति, धर्म, क्षेत्र या राजनीतिक नारों के आधार पर नहीं होना चाहिए, बल्कि उन मुद्दों पर होना चाहिए जो समाज और संस्कृति से जुड़े हों। उनके अनुसार, गोसंरक्षण ऐसा ही एक महत्वपूर्ण विषय है।
शंकराचार्य ने कहा कि उनकी यात्रा किसी राजनीतिक दल के पक्ष या विपक्ष में नहीं है। इसका मुख्य उद्देश्य समाज में जागरूकता पैदा करना और गोमाता की रक्षा के लिए जनसमर्थन जुटाना है।
भाजपा पर वादा पूरा न करने का आरोप
अपने वक्तव्य में शंकराचार्य ने भारतीय जनता पार्टी पर भी अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सत्ता में आने से पहले गोरक्षा को लेकर बड़े दावे किए गए थे, लेकिन उन दावों के अनुरूप कार्य नहीं हुए।
उन्होंने गोवंश की स्थिति और गोमांस निर्यात जैसे मुद्दों का उल्लेख करते हुए कहा कि जिन लोगों ने गोरक्षा के नाम पर समर्थन दिया था, वे आज कई सवाल पूछ रहे हैं। उनके अनुसार, यदि सरकारें अपने वादों पर अमल नहीं करतीं, तो जनता को भी उनके कार्यों का मूल्यांकन करना चाहिए।
सैफई में यादव परिवार से मुलाकात
इटावा दौरे के दौरान शंकराचार्य की यात्रा सैफई भी पहुंची, जहां समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के परिवार के कई सदस्य उनसे मिलने पहुंचे। इस अवसर पर सांसद डिंपल यादव, वरिष्ठ नेता शिवपाल सिंह यादव, सांसद आदित्य यादव तथा विधायक तेज प्रताप यादव ने उनका स्वागत किया और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।
इस मुलाकात के बाद राजनीतिक चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। कई लोगों ने इसे आगामी चुनावों से जोड़कर देखा, लेकिन शंकराचार्य ने तुरंत स्थिति स्पष्ट कर दी।
उन्होंने कहा कि उन्होंने किसी राजनीतिक दल को समर्थन नहीं दिया है। उनका आशीर्वाद केवल परिवार के सदस्यों के लिए था, न कि किसी पार्टी के लिए। उन्होंने दोहराया कि उनका अभियान धार्मिक और सामाजिक उद्देश्य से चलाया जा रहा है तथा इसका किसी दल विशेष से कोई संबंध नहीं है।
डिंपल यादव और शिवपाल यादव ने जताया समर्थन
सैफई में हुई मुलाकात के दौरान समाजवादी पार्टी से जुड़े नेताओं ने गोरक्षा के मुद्दे पर अपनी राय भी रखी। डिंपल यादव और शिवपाल सिंह यादव ने गोसंरक्षण को महत्वपूर्ण विषय बताते हुए इस अभियान के प्रति समर्थन व्यक्त किया।
दोनों नेताओं ने कहा कि समाज में पशुधन संरक्षण और गोसंरक्षण के मुद्दों पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने इस दिशा में जागरूकता बढ़ाने के प्रयासों की सराहना भी की।
शिवपाल यादव का सरकार पर हमला
इस मौके पर शिवपाल सिंह यादव ने भाजपा सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार संत समाज और धार्मिक नेताओं की बातों को गंभीरता से नहीं ले रही है।
शिवपाल ने कहा कि संत समाज का देश और समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इसलिए उनकी बातों को केवल धार्मिक दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक संदर्भ में भी देखा जाना चाहिए।
क्या 2027 के चुनाव में गोरक्षा बनेगा बड़ा मुद्दा?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की गोरक्षा यात्रा आगामी विधानसभा चुनाव से पहले एक महत्वपूर्ण जनचर्चा का विषय बन सकती है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में धार्मिक और सामाजिक मुद्दों का हमेशा से प्रभाव रहा है। ऐसे में गोसंरक्षण को केंद्र में रखकर चलाया जा रहा यह अभियान आने वाले समय में राजनीतिक दलों पर दबाव बना सकता है।
हालांकि, यह देखना दिलचस्प होगा कि राजनीतिक दल इस मुद्दे पर किस प्रकार प्रतिक्रिया देते हैं और जनता इसे किस नजरिए से देखती है। फिलहाल इतना तय है कि शंकराचार्य का बयान 2027 के चुनावी माहौल में नई चर्चा को जन्म दे चुका है।
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने स्पष्ट संदेश दिया है कि जनता को केवल चुनावी घोषणाओं पर नहीं, बल्कि वास्तविक कार्यों पर भरोसा करना चाहिए। उनके अनुसार, जो दल गोमाता की रक्षा और गोसंरक्षण के लिए ईमानदारी से कार्य करेगा, वही जनता का विश्वास जीतकर सत्ता तक पहुंच सकता है। उनकी गोरक्षा यात्रा और हालिया बयान ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नए विमर्श को जन्म दिया है, जिसकी गूंज आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है।
Shankaracharya Avimukteshwaranand has sparked political discussions ahead of the Uttar Pradesh Assembly Election 2027 by stating that the political party committed to genuine cow protection will form the next government. During his Goraksha Yatra across Uttar Pradesh, he criticized unfulfilled promises related to cow welfare, raised concerns over cattle protection policies, and emphasized the importance of Goraksha as a key electoral issue. His visit to Saifai and meeting with Dimple Yadav, Shivpal Yadav, and other members of the Yadav family has further intensified political speculation surrounding the 2027 UP elections.


















