AIN NEWS 1 मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ में दलित छात्रा ललिता गौतम हत्याकांड के विरोध में हुए प्रदर्शन के बाद शुरू हुआ विवाद अब पुलिस की कार्यप्रणाली और हिरासत में कथित मारपीट के आरोपों तक पहुंच गया है। किसान नेता और सपा से जुड़े दिग्विजय भाटी तथा मोहित जाटव ने तत्कालीन मेरठ SSP अविनाश पांडेय और SOG टीम पर गंभीर आरोप लगाए हैं। दोनों का दावा है कि पुलिस कार्यालय और SOG कार्यालय में उनके साथ मारपीट की गई और कथित तौर पर थर्ड डिग्री दी गई। दूसरी ओर पुलिस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए चोटों की वजह स्कूटी दुर्घटना बताई है। इस पूरे विवाद के बीच उत्तर प्रदेश सरकार ने SSP अविनाश पांडेय को मेरठ से हटाकर लखनऊ मुख्यालय से संबद्ध कर दिया है।
क्या है पूरा मामला?
मामला मेरठ में दलित छात्रा ललिता गौतम की हत्या के विरोध में हुए प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई और तत्कालीन SSP अविनाश पांडेय के व्यवहार को लेकर पहले भी विवाद खड़ा हो चुका था। प्रदर्शन के दौरान SSP द्वारा कुछ प्रदर्शनकारियों को थप्पड़ मारने का वीडियो सामने आने के बाद मामला राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा में आया था।

अब इसी घटनाक्रम से जुड़े किसान नेता दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पुलिस कार्रवाई के दौरान उनके साथ ऐसा व्यवहार किया गया, जिसे सामान्य पूछताछ या कानूनी कार्रवाई नहीं कहा जा सकता।
दिग्विजय भाटी ने क्या आरोप लगाए?
दिग्विजय भाटी का आरोप है कि उन्हें बातचीत के लिए पुलिस कार्यालय बुलाया गया था। उनके मुताबिक, SSP के चैंबर में उनके साथ कथित तौर पर गाली-गलौज और मारपीट की गई। उन्होंने करीब डेढ़ घंटे तक पीटे जाने का दावा किया है। इसके बाद उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें SOG के हवाले किया गया, जहां भी कथित रूप से मारपीट की गई।
भाटी ने यह भी आरोप लगाया कि SOG कार्यालय में उनके पैर बांधकर उल्टा लटकाया गया और लाठी-डंडे या फट्टों से पीटा गया। उनके शरीर पर चोट के निशान और आंख के आसपास सूजन दिखाई देने की बात विभिन्न रिपोर्टों में सामने आई है। हालांकि, इन आरोपों को अभी जांच के अंतिम निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जा सकता।
यानी फिलहाल पत्रकारिता की दृष्टि से यह कहना सही होगा कि दिग्विजय भाटी ने पुलिस पर हिरासत में बर्बरता के आरोप लगाए हैं, न कि यह कि पुलिस द्वारा थर्ड डिग्री दिया जाना साबित हो चुका है।
मोहित जाटव ने भी लगाए आरोप
दिग्विजय भाटी के साथ मोहित जाटव ने भी पुलिस पर मारपीट के आरोप लगाए हैं। दोनों का कहना है कि पुलिस कार्यालय में उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया और बाद में SOG कार्यालय में भी कथित रूप से प्रताड़ित किया गया। मामले की जानकारी सामने आने के बाद समाजवादी पार्टी से जुड़े नेताओं ने भी पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए और निष्पक्ष जांच की मांग की।
सपा विधायक अतुल प्रधान समेत अन्य नेताओं द्वारा इस मामले को उठाए जाने की खबरें भी सामने आई हैं। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिग्विजय भाटी को कई घंटे हिरासत में रखने, मारपीट और धमकी दिए जाने जैसे आरोप लगाए गए। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है।
पुलिस का पक्ष क्या है?
पुलिस ने दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव द्वारा लगाए गए आरोपों को खारिज किया है। पुलिस के मुताबिक, दोनों के खिलाफ पहले से आपराधिक मामले दर्ज हैं और उन्हें हिस्ट्रीशीटर बताया गया है।
पुलिस का दावा है कि 19 अगस्त को दोनों एक मामले के सिलसिले में पुलिस कार्यालय आए थे। वापस जाते समय स्कूटी फिसलने से उन्हें चोटें लगीं। पुलिस ने इसी दुर्घटना को चोटों की वजह बताया है।
यही इस पूरे मामले का सबसे अहम विवाद है। पीड़ित पक्ष चोटों को कथित पुलिस पिटाई से जोड़ रहा है, जबकि पुलिस इसे सड़क दुर्घटना का परिणाम बता रही है। इसलिए अब स्वतंत्र जांच और मेडिकल रिकॉर्ड की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
ADG स्तर पर जांच की बात सामने आई
मामला बढ़ने के बाद ADG स्तर से जांच के आदेश दिए जाने की रिपोर्ट सामने आई है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, तत्कालीन SSP अविनाश पांडेय के खिलाफ भी जांच शुरू की गई। पुलिस ने आरोपों को खारिज किया है, लेकिन जांच शुरू होना इस बात को दिखाता है कि मामला विभागीय स्तर पर गंभीरता से लिया गया।
ऐसी स्थिति में CCTV फुटेज, पुलिस कार्यालय में प्रवेश और निकास का रिकॉर्ड, GD, मेडिकल रिपोर्ट, संबंधित पुलिसकर्मियों के बयान और उस दिन की पूरी घटनाक्रम रिपोर्ट जांच के लिए अहम हो सकती है।
अचानक हुआ SSP का तबादला
विवाद के बीच उत्तर प्रदेश सरकार ने 20 अगस्त की देर रात नौ IPS अधिकारियों के तबादले किए। इसमें मेरठ के SSP अविनाश पांडेय का नाम भी शामिल था। उन्हें मेरठ SSP के पद से हटाकर लखनऊ मुख्यालय से संबद्ध किया गया है।
उनकी जगह IPS बीबीजीटीएस मूर्ति को मेरठ का नया SSP बनाया गया है। मूर्ति इससे पहले झांसी में SSP की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
हालांकि, सरकार की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि अविनाश पांडेय का तबादला केवल दिग्विजय भाटी के आरोपों के कारण किया गया। इसलिए तबादले को सीधे आरोपों की पुष्टि मानना उचित नहीं होगा।
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चंद्रशेखर आजाद ने भी उठाए सवाल
मामले पर नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने पुलिस हिरासत में कथित बर्बरता पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच और दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। राजनीतिक दलों और किसान संगठनों की ओर से भी मामले को लेकर आवाज उठाई जा रही है।
अब सबसे बड़ा सवाल क्या है?
पूरे मामले में अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव को लगी चोटें आखिर कैसे आईं?
अगर चोटें पुलिस हिरासत में मारपीट के कारण लगीं, तो जिम्मेदार पुलिसकर्मियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। वहीं अगर पुलिस का दुर्घटना वाला दावा सही है, तो उसके समर्थन में मेडिकल रिकॉर्ड, CCTV और अन्य साक्ष्यों से स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
इसीलिए इस मामले में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच जरूरी है।
मेरठ का यह मामला केवल एक पुलिस अधिकारी के तबादले तक सीमित नहीं है। यह पुलिस हिरासत में लोगों के साथ व्यवहार, अधिकारियों की जवाबदेही और कानून के शासन से जुड़ा गंभीर विषय बन चुका है।
फिलहाल SSP अविनाश पांडेय का तबादला और दिग्विजय भाटी-मोहित जाटव द्वारा लगाए गए गंभीर आरोप पुष्ट रूप से सामने आए हैं, जबकि कथित थर्ड डिग्री और उल्टा लटकाकर पीटने के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। इसलिए खबर को आरोप और पुलिस के जवाब दोनों पक्षों के साथ प्रस्तुत करना ही तथ्यपरक पत्रकारिता होगी।
Meerut News has been dominated by allegations of custodial assault involving farmer leader Digvijay Bhati, SP leader Mohit Jatav, former Meerut SSP Avinash Pandey, and the SOG Meerut team. Following serious allegations of police brutality and third-degree torture, Avinash Pandey was removed as Meerut SSP and attached to the Lucknow headquarters. The allegations are under scrutiny, while Meerut Police has denied the charges and attributed the injuries to a scooter accident. The case is linked to the Lalita Gautam murder protest, making the demand for an impartial investigation and police accountability a major issue in Uttar Pradesh.



















