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नेशनल कॉन्फ्रेंस में बढ़ी अंदरूनी कलह, सांसद आगा रुहुल्लाह मेहदी ने सीएम उमर अब्दुल्ला पर साधा निशाना, बीजेपी के एजेंडे पर चलने का लगाया आरोप!

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नेशनल कॉन्फ्रेंस में बढ़ी अंदरूनी कलह, सांसद आगा रुहुल्लाह मेहदी ने सीएम उमर अब्दुल्ला पर साधा निशाना, बीजेपी के एजेंडे पर चलने का लगाया आरोप

 AIN NEWS 1 श्रीनगर/अनंतनाग: जम्मू-कश्मीर की सियासत में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के श्रीनगर से सांसद आगा रुहुल्लाह मेहदी ने अपनी ही पार्टी के उपाध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की कार्यशैली और राजनीतिक रुख पर खुलकर सवाल उठाए हैं। अनंतनाग जिले में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान दिए गए उनके भाषण ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।

रुहुल्लाह मेहदी ने आरोप लगाया कि पार्टी का मौजूदा नेतृत्व जम्मू-कश्मीर के लोगों के मूल मुद्दों से ध्यान हटाकर केवल राज्य का दर्जा (Statehood) बहाल कराने तक सीमित हो गया है। उनका कहना था कि लोगों की असली मांग संविधान के अनुच्छेद 370 और 35A की बहाली, जम्मू-कश्मीर की पहचान और अधिकारों की पुनर्स्थापना है, लेकिन इन मुद्दों को अब पीछे छोड़ दिया गया है।

क्या कहा आगा रुहुल्लाह मेहदी ने?

अनंतनाग में आयोजित सभा को संबोधित करते हुए आगा रुहुल्लाह मेहदी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों ने नेशनल कॉन्फ्रेंस को केवल राज्य का दर्जा वापस दिलाने के लिए नहीं चुना था। जनता ने पार्टी पर इसलिए भरोसा जताया था क्योंकि उसने अनुच्छेद 370 और 35A की बहाली, भूमि और रोजगार के अधिकारों की रक्षा तथा जम्मू-कश्मीर की विशेष पहचान को बहाल करने का वादा किया था।

उन्होंने कहा कि यदि अब केवल राज्य का दर्जा ही सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है, तो यह वही एजेंडा है जिसे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) भी आगे बढ़ा रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर किसका एजेंडा लागू किया जा रहा है।

उमर अब्दुल्ला पर अप्रत्यक्ष हमला

अपने भाषण में आगा रुहुल्लाह मेहदी ने सीधे नाम लेने से अधिक राजनीतिक संकेतों का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि जो लोग जनता के मूल अधिकारों की लड़ाई छोड़कर केवल राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग कर रहे हैं, वे अनजाने में या जानबूझकर भाजपा के राजनीतिक नैरेटिव को मजबूत कर रहे हैं।

हालांकि, उपलब्ध वीडियो और विश्वसनीय रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने सीधे शब्दों में “उमर अब्दुल्ला बीजेपी के एजेंट हैं” ऐसा स्पष्ट बयान नहीं दिया। लेकिन उनके भाषण को मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला पर तीखा राजनीतिक हमला माना जा रहा है।

राज्य का दर्जा बनाम अनुच्छेद 370

आगा रुहुल्लाह मेहदी का कहना है कि जम्मू-कश्मीर की जनता का संघर्ष केवल पूर्ण राज्य का दर्जा हासिल करने तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा 5 अगस्त 2019 के बाद हुए संवैधानिक बदलावों की समीक्षा और जम्मू-कश्मीर की विशेष संवैधानिक स्थिति से जुड़े अधिकारों की बहाली है।

उन्होंने कहा कि यदि राजनीतिक दल इन मूल मुद्दों को छोड़ देंगे तो जनता का भरोसा कमजोर होगा।

क्यों बढ़ी राजनीतिक चर्चा?

2019 में केंद्र सरकार द्वारा अनुच्छेद 370 और 35A को समाप्त करने तथा जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने के बाद से राज्य की राजनीति लगातार इन्हीं मुद्दों के इर्द-गिर्द घूमती रही है।

हाल के महीनों में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला लगातार राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को प्राथमिकता देते रहे हैं। उनका तर्क है कि राज्य का दर्जा वापस मिलने के बाद लोकतांत्रिक संस्थाएं और प्रशासनिक अधिकार मजबूत होंगे, जिससे आगे अन्य मुद्दों पर भी प्रभावी तरीके से बातचीत संभव होगी।

(देखें वीडियो) वाराणसी में GST डिप्टी कमिश्नर अंबिका सिंह ₹50 हजार की रिश्वत लेते गिरफ्तार, विजिलेंस ने रंगे हाथ दबोचा

दूसरी ओर, आगा रुहुल्लाह मेहदी का मानना है कि यदि अनुच्छेद 370 और 35A की बहाली की मांग कमजोर पड़ गई तो जनता के साथ किए गए राजनीतिक वादों का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा।

क्या है नेशनल कॉन्फ्रेंस की आधिकारिक लाइन?

नेशनल कॉन्फ्रेंस की आधिकारिक नीति अब भी यह रही है कि पार्टी अनुच्छेद 370 और 35A की बहाली के लिए संवैधानिक और कानूनी लड़ाई जारी रखेगी। साथ ही वह जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा वापस दिलाने की भी मांग कर रही है।

हालांकि, हाल के बयानों से यह संकेत मिला है कि राज्य का दर्जा फिलहाल पार्टी की प्रमुख राजनीतिक प्राथमिकताओं में शामिल है। इसी बात को लेकर पार्टी के भीतर अलग-अलग राय सामने आ रही है।

क्या पार्टी में बढ़ रहा है मतभेद?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगा रुहुल्लाह मेहदी का बयान केवल व्यक्तिगत असहमति नहीं बल्कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर मौजूद वैचारिक मतभेदों का संकेत भी हो सकता है।

पार्टी के एक वर्ग का मानना है कि पहले राज्य का दर्जा बहाल कराया जाए और उसके बाद अन्य संवैधानिक मुद्दों पर संघर्ष आगे बढ़ाया जाए। जबकि दूसरा वर्ग चाहता है कि अनुच्छेद 370 और 35A की बहाली को ही सबसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाए रखा जाए।

विपक्ष को मिला नया मुद्दा

रुहुल्लाह मेहदी के बयान के बाद विपक्षी दलों को भी सरकार और नेशनल कॉन्फ्रेंस पर सवाल उठाने का मौका मिल गया है। भाजपा पहले से ही राज्य का दर्जा बहाल करने के मुद्दे पर अलग रुख रखती रही है, जबकि पीडीपी समेत अन्य दल अनुच्छेद 370 की बहाली को प्राथमिकता देने की बात करते रहे हैं।

ऐसे में नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर सामने आए मतभेद आने वाले समय में जम्मू-कश्मीर की राजनीति को नया मोड़ दे सकते हैं।

आगे क्या?

फिलहाल मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला या नेशनल कॉन्फ्रेंस नेतृत्व की ओर से आगा रुहुल्लाह मेहदी के बयान पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि इस विवाद पर जल्द स्पष्टता नहीं आई तो पार्टी के भीतर असंतोष की चर्चा और तेज हो सकती है।

आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पार्टी नेतृत्व इस मतभेद को किस तरह संभालता है और क्या दोनों नेताओं के बीच संवाद के जरिए स्थिति सामान्य हो पाती है या नहीं।

आगा रुहुल्लाह मेहदी के ताजा बयान ने जम्मू-कश्मीर की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। एक ओर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला राज्य का दर्जा बहाल कराने को प्राथमिकता दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उनकी ही पार्टी के सांसद का कहना है कि जनता की मूल अपेक्षाएं अनुच्छेद 370, 35A और जम्मू-कश्मीर की विशेष पहचान की बहाली से जुड़ी हैं। यह विवाद केवल दो नेताओं के बीच मतभेद नहीं बल्कि नेशनल कॉन्फ्रेंस की भविष्य की राजनीतिक दिशा को लेकर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

Aga Ruhullah Mehdi has intensified the political debate in Jammu and Kashmir by criticizing Chief Minister Omar Abdullah over the National Conference’s priorities regarding Article 370, Article 35A, and the restoration of statehood. The growing internal differences within the National Conference have sparked fresh discussions about Kashmir politics, constitutional rights, and the future political direction of Jammu and Kashmir. This latest controversy has become one of the most discussed developments in Indian political news.

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