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अयोध्या की सरयू में बंद हुई 12 करोड़ की वाटर मेट्रो, तय रूट पर नहीं चल पाई सेवा; जानिए पूरी वजह!

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अयोध्या की सरयू में 12 करोड़ की वाटर मेट्रो बंद, गुप्तार घाट तक नहीं पहुंच पाई सेवा; जानिए क्या रही वजह

AIN NEWS 1: अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई बड़े प्रोजेक्ट शुरू किए गए। इन्हीं योजनाओं में से एक थी सरयू नदी में शुरू की गई वाटर मेट्रो सेवा। करीब 12 करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह आधुनिक नाव सेवा लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी थी, लेकिन अब यही वाटर मेट्रो सवालों के घेरे में है।

कोच्चि से लाई गई यह वाटर मेट्रो पिछले करीब तीन महीनों से लगभग एक ही स्थान पर खड़ी है। जिस उद्देश्य से इसे अयोध्या लाया गया था, वह पूरा नहीं हो सका। योजना थी कि यह सेवा राम घाट से गुप्तार घाट तक करीब 14 किलोमीटर के रूट पर नियमित रूप से चलेगी और श्रद्धालुओं व पर्यटकों को सरयू नदी के रास्ते सफर का नया अनुभव मिलेगा।

लेकिन तकनीकी और प्राकृतिक चुनौतियों के कारण यह वाटर मेट्रो अपने निर्धारित रूट पर नियमित संचालन नहीं कर पाई। कुछ समय तक इसे तुलसी घाट (नया घाट) के आसपास करीब 2 किलोमीटर के सीमित क्षेत्र में ही चलाया गया। अब पूरी तरह से इसका संचालन बंद हो चुका है।

पुल की ऊंचाई बनी बड़ी समस्या

वाटर मेट्रो से जुड़े कर्मचारियों के अनुसार, शुरुआत में इसका रूट राम घाट से गुप्तार घाट तक तय किया गया था। लेकिन बाद में पता चला कि अयोध्या और गोंडा को जोड़ने वाले पुल के नीचे से गुजरने में यह परेशानी का सामना करती है।

कर्मचारी सुधाकर के मुताबिक, वाटर मेट्रो की ऊंचाई सामान्य नावों की तुलना में अधिक है। इसी कारण पुल के नीचे से इसे निकालना संभव नहीं हो पा रहा है। इस तकनीकी समस्या के चलते इसे गुप्तार घाट तक ले जाना मुश्किल हो गया और संचालन को सीमित क्षेत्र तक ही रखना पड़ा।

सरयू में गाद भी बनी चुनौती

वाटर मेट्रो संचालन में दूसरी बड़ी समस्या सरयू नदी में जमा होने वाली गाद यानी सिल्ट है। नदी में लगातार गाद जमा होने के कारण पानी की गहराई और रास्ते में बदलाव आता रहता है।

कर्मचारियों का कहना है कि नदी की सफाई कराने के कुछ समय बाद ही दोबारा गाद जमा हो जाती है। बारिश के मौसम में नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ परिस्थितियां और जटिल हो जाती हैं। पानी का स्तर बढ़ने से पुलों के नीचे उपलब्ध जगह कम हो जाती है, जिससे वाटर मेट्रो के संचालन में परेशानी आती है।

इन्हीं कारणों की वजह से फिलहाल गुप्तार घाट तक नियमित रूप से वाटर मेट्रो चलाना संभव नहीं हो पाया है।

किराया बढ़ने से यात्रियों की संख्या घटी

वाटर मेट्रो की कम यात्रियों वाली समस्या भी चर्चा का विषय रही है। शुरुआत में जब इसका संचालन पर्यटन विभाग के पास था, तब इसका किराया करीब 150 रुपये प्रति यात्री रखा गया था। उस समय पर्यटकों और स्थानीय लोगों में इसे लेकर रुचि भी दिखाई दी थी।

बाद में संचालन की जिम्मेदारी जेएस क्लीनटेक प्राइवेट लिमिटेड को दी गई। इसके बाद किराया बढ़ाकर करीब 300 रुपये प्रति यात्री कर दिया गया। किराया बढ़ने के बाद यात्रियों की संख्या में कमी आने लगी।

स्थानीय लोगों का कहना है कि अयोध्या आने वाले ज्यादातर श्रद्धालु धार्मिक यात्रा के उद्देश्य से आते हैं। ऐसे में अतिरिक्त खर्च बढ़ने पर कई लोग वाटर मेट्रो की जगह सामान्य साधनों को प्राथमिकता देते हैं।

पर्यटन को बढ़ावा देने की योजना को झटका

अयोध्या में राम मंदिर के उद्घाटन के बाद शहर में पर्यटन सुविधाओं को आधुनिक बनाने पर जोर दिया जा रहा है। वाटर मेट्रो को भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना गया था।

इसका उद्देश्य था कि श्रद्धालु और पर्यटक सरयू नदी के सुंदर दृश्य के साथ एक अलग अनुभव प्राप्त कर सकें। साथ ही नदी आधारित परिवहन को बढ़ावा मिले और अयोध्या की पहचान आधुनिक पर्यटन केंद्र के रूप में मजबूत हो।

हालांकि, मौजूदा परिस्थितियों ने इस परियोजना के सामने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी नदी परिवहन परियोजना के लिए नदी की गहराई, पुलों की ऊंचाई, जल प्रवाह और रखरखाव व्यवस्था का पहले से बेहतर आकलन जरूरी होता है।

अब आगे क्या?

फिलहाल वाटर मेट्रो सेवा बंद है और इसे दोबारा शुरू करने को लेकर कोई स्पष्ट समयसीमा सामने नहीं आई है। माना जा रहा है कि संचालन शुरू करने से पहले रूट की तकनीकी जांच, गाद की समस्या का समाधान और किराये को लेकर नई रणनीति पर विचार करना होगा।

अयोध्या जैसे तेजी से विकसित हो रहे धार्मिक पर्यटन शहर में ऐसी परियोजनाओं की सफलता के लिए केवल शुरुआत करना ही नहीं, बल्कि लंबे समय तक सुचारू संचालन भी जरूरी है।

अब देखना होगा कि प्रशासन और संबंधित एजेंसियां इन चुनौतियों का समाधान किस तरह निकालती हैं, ताकि करोड़ों रुपये की लागत से तैयार यह वाटर मेट्रो दोबारा सरयू में पर्यटकों को सफर करा सके।

Ayodhya Water Metro project on the Saryu River has become a major topic of discussion after the Rs 12 crore service stopped operations. The Kochi-built Water Metro was planned to connect Ram Ghat and Guptar Ghat on a 14-kilometer route to boost Ayodhya tourism. However, problems like heavy silt deposits, river water level changes, bridge height restrictions, and increased ticket prices affected regular operations. The Ayodhya Water Metro project highlights the challenges of developing modern river transport infrastructure in Uttar Pradesh.

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