AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में बारिश और जलभराव से प्रभावित ग्रामीणों के नुकसान के सर्वे के दौरान रुपये लिए जाने का मामला सामने आया है। अतर्रा तहसील क्षेत्र के बल्लान गांव के मजरा डंगरा पुरवा में तैनात लेखपाल संध्या सिंह पर ग्रामीणों से पैसे लेने का आरोप लगा है। इस पूरे मामले का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासन हरकत में आया। मामले को गंभीरता से लेते हुए अतर्रा के एसडीएम ने लेखपाल को निलंबित कर दिया है और विभागीय जांच शुरू कराई गई है।
प्रशासन की कार्रवाई के बाद अब यह जांच की जा रही है कि ग्रामीणों से रुपये किस परिस्थिति में लिए गए, क्या यह राशि सरकारी सर्वे या राहत से संबंधित काम के बदले ली गई थी और इस मामले में लेखपाल की वास्तविक भूमिका क्या रही। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
बारिश से हुए नुकसान के सर्वे के दौरान सामने आया मामला
दरअसल, हाल में हुई बारिश और जलभराव के कारण जिले के कई इलाकों में लोगों को नुकसान उठाना पड़ा है। ऐसे प्रभावित परिवारों के नुकसान का सर्वे कर रिपोर्ट तैयार की जा रही है, ताकि पात्र लोगों को सरकारी सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
इसी सर्वे के दौरान अतर्रा तहसील क्षेत्र के बल्लान गांव में तैनात लेखपाल संध्या सिंह पर ग्रामीणों से पैसे लेने के आरोप लगाए गए। ग्रामीणों का कहना है कि नुकसान की रिपोर्ट लगाए जाने और सरकारी मदद से संबंधित प्रक्रिया के नाम पर उनसे रुपये लिए गए।

मामले का वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर इसकी चर्चा तेज हो गई। वायरल वीडियो में कुछ ग्रामीण रुपये वापस किए जाने की मांग करते हुए नजर आए। इसके बाद मामला प्रशासन के संज्ञान में पहुंचा।
वायरल वीडियो के बाद प्रशासन ने लिया संज्ञान
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया। अधिकारियों ने पूरे प्रकरण की जानकारी जुटाई और संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी।
रिपोर्टों के मुताबिक, ग्रामीणों से लिए गए बताए जा रहे रुपये वापस किए गए। इसके बाद प्रशासन ने लेखपाल संध्या सिंह के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की। हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि विभागीय जांच अभी पूरी नहीं हुई है। इसलिए फिलहाल रुपये लेने के आरोप को अंतिम रूप से साबित हुआ मामला नहीं माना जा सकता।
प्रशासन अब वायरल वीडियो और ग्रामीणों की शिकायत समेत दूसरे तथ्यों की जांच कर रहा है।
100-200 रुपये लेने का आरोप
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि उनसे छोटी-छोटी रकम ली गई थी। कुछ ग्रामीणों ने करीब 100 से 200 रुपये लिए जाने की बात कही।
ग्रामीणों का आरोप है कि उनसे नुकसान की रिपोर्ट और सरकारी सहायता से जुड़ी प्रक्रिया में मदद के नाम पर पैसे मांगे गए। हालांकि, इन आरोपों की पूरी सच्चाई विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।
मामले में सामने आए वीडियो को जांच का एक अहम हिस्सा माना जा रहा है। अधिकारियों की ओर से यह भी देखा जा रहा है कि वीडियो कब और किस परिस्थिति में बनाया गया तथा उसमें दिखाई दे रही घटनाओं का वास्तविक संदर्भ क्या है।
लेखपाल ने आरोपों को बताया साजिश
दूसरी तरफ, लेखपाल संध्या सिंह ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को स्वीकार नहीं किया है। उन्होंने आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया है कि उनके खिलाफ साजिश के तहत वीडियो बनाया और वायरल किया गया।
उनका कहना है कि पूरे मामले को एक अलग संदर्भ में पेश किया गया है। इसलिए जांच में सभी पक्षों को सुना जाना जरूरी है।
यही वजह है कि प्रशासन ने भी मामले की विभागीय जांच कराने का फैसला किया है, ताकि वायरल वीडियो और ग्रामीणों के आरोपों के साथ लेखपाल का पक्ष भी रिकॉर्ड पर लिया जा सके।
निलंबन के साथ विभागीय जांच शुरू
मामले में अतर्रा के एसडीएम शैलेंद्र कुमार मिश्रा ने लेखपाल संध्या सिंह को निलंबित कर दिया है। जांच की जिम्मेदारी नायब तहसीलदार शिवदीप मिश्रा को दी गई है। उन्हें निर्धारित अवधि में जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
जांच के दौरान ग्रामीणों के बयान लिए जा सकते हैं। इसके अलावा वायरल वीडियो, सर्वे से जुड़े दस्तावेज और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की भी जांच की जाएगी।
जांच रिपोर्ट में यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो विभागीय नियमों के तहत आगे की कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, यदि आरोपों में पर्याप्त तथ्य नहीं मिलते हैं तो स्थिति उसी के अनुसार स्पष्ट होगी।
नुकसान के सर्वे पर भी उठे सवाल
यह मामला केवल रुपये लेने के आरोप तक सीमित नहीं है। ग्रामीणों ने बारिश और जलभराव से हुए नुकसान के सर्वे में भी गड़बड़ी के आरोप लगाए हैं।
प्रभावित ग्रामीणों की चिंता इस बात को लेकर है कि वास्तविक नुकसान का सही आकलन हो और पात्र परिवारों को सरकारी सहायता मिल सके। ऐसे में प्रशासन ने सर्वे की प्रक्रिया को भी गंभीरता से देखने की बात कही है।
बताया गया है कि आवश्यकता पड़ने पर नुकसान का दोबारा सर्वे कराया जा सकता है, ताकि किसी पात्र व्यक्ति का नाम छूट न जाए और वास्तविक नुकसान का सही आकलन हो सके।
आरोप साबित होने से पहले निष्कर्ष निकालना उचित नहीं
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि लेखपाल के खिलाफ प्रशासन ने निलंबन की कार्रवाई जरूर की है, लेकिन विभागीय जांच अभी जारी है। निलंबन को अंतिम दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता।
वायरल वीडियो और ग्रामीणों के आरोपों के आधार पर प्रशासन ने प्रारंभिक कार्रवाई की है। अब जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि रुपये किस उद्देश्य से लिए गए थे और क्या सरकारी कार्य के बदले पैसे लेने के आरोप सही हैं।
इसलिए मामले में फिलहाल “रिश्वत लेने का आरोप” या “रुपये लेने के आरोप में निलंबित” कहना तथ्यात्मक रूप से अधिक उचित है।
प्रशासन की कार्रवाई से बढ़ी जवाबदेही की उम्मीद
बारिश और जलभराव जैसी प्राकृतिक आपदा के बाद सरकारी सहायता उन परिवारों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है, जिनके घर, खेत या अन्य संपत्ति प्रभावित होती है। ऐसे में सर्वे और राहत से जुड़ी सरकारी प्रक्रिया में पारदर्शिता बेहद जरूरी है।
बांदा के इस मामले में प्रशासन की ओर से तत्काल निलंबन और विभागीय जांच शुरू किए जाने से यह संकेत जरूर मिला है कि शिकायतों को नजरअंदाज नहीं किया जा रहा। अब लोगों की नजर जांच रिपोर्ट पर है।
अगर जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित कर्मचारी के खिलाफ नियमों के तहत और कड़ी कार्रवाई हो सकती है। वहीं, यदि आरोप गलत या भ्रामक पाए जाते हैं तो प्रशासन की जांच के बाद वास्तविक स्थिति भी सामने आ जाएगी।
फिलहाल संध्या सिंह निलंबित हैं और मामले की विभागीय जांच जारी है। जांच पूरी होने के बाद ही इस पूरे प्रकरण में अंतिम तस्वीर साफ होगी।
The Banda Lekhpal Sandhya Singh case has drawn attention after a viral video surfaced showing allegations of money being taken from villagers during a rain and waterlogging damage survey. Sandhya Singh was suspended by the Atarra SDM, while a departmental inquiry has been initiated to verify the allegations. The case has raised concerns about transparency in government relief surveys and the process of providing assistance to rain-affected families in Uttar Pradesh.



















