spot_imgspot_img

क्या चेवांग नोरफेल ही हैं कृत्रिम ग्लेशियरों के असली जनक? जानिए सोनम वांगचुक और आइस स्तूप विवाद की पूरी सच्चाई!

spot_img

Date:

क्या चेवांग नोरफेल ही हैं कृत्रिम ग्लेशियरों के असली जनक? जानिए सोनम वांगचुक और आइस स्तूप विवाद की पूरी सच्चाई

AIN NEWS 1: हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट तेजी से वायरल हो रही है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि लद्दाख के प्रसिद्ध शिक्षा सुधारक और नवाचारकर्ता सोनम वांगचुक को कृत्रिम ग्लेशियर (Artificial Glacier) और आइस स्तूप (Ice Stupa) तकनीक का श्रेय गलत तरीके से दिया गया है। पोस्ट में कहा गया है कि इस तकनीक के वास्तविक जनक लद्दाख के वरिष्ठ सिविल इंजीनियर चेवांग नोरफेल हैं, जबकि सोनम वांगचुक ने केवल उनके विचार को नया रूप देकर लोकप्रिय बनाया।

इस दावे ने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि इस दावे में कितनी सच्चाई है और वास्तव में चेवांग नोरफेल तथा सोनम वांगचुक के योगदान में क्या अंतर है।

कौन हैं चेवांग नोरफेल?

चेवांग नोरफेल भारत के प्रतिष्ठित सिविल इंजीनियर हैं, जिन्हें “आइस मैन ऑफ इंडिया” या “ग्लेशियर मैन” के नाम से जाना जाता है। उन्होंने लद्दाख जैसे ठंडे और शुष्क क्षेत्र में पानी की कमी से जूझ रहे किसानों की समस्या को समझते हुए 1980 के दशक में एक अनोखा समाधान विकसित किया।

उस समय लद्दाख में खेती पूरी तरह प्राकृतिक ग्लेशियरों के पिघलने वाले पानी पर निर्भर थी। लेकिन जलवायु परिवर्तन और बढ़ते तापमान के कारण प्राकृतिक ग्लेशियर तेजी से सिकुड़ने लगे। परिणामस्वरूप किसानों को अप्रैल और मई के दौरान सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता था।

नोरफेल ने इस समस्या का समाधान खोजते हुए सर्दियों में बहने वाले अतिरिक्त पानी को छोटे-छोटे अवरोधों और कृत्रिम जलमार्गों की मदद से छायादार क्षेत्रों में पहुंचाया, जहां वह धीरे-धीरे जमकर कृत्रिम ग्लेशियर का रूप ले लेता था।

गर्मी शुरू होते ही ये कृत्रिम ग्लेशियर पिघलते और खेती के लिए समय पर पानी उपलब्ध कराते थे। इस तकनीक ने लद्दाख के कई गांवों में खेती और पेयजल की समस्या को काफी हद तक कम किया।

बताया जाता है कि उन्होंने 15 से अधिक कृत्रिम ग्लेशियर विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे भूजल स्तर में सुधार हुआ और कई सूख चुके जल स्रोत दोबारा सक्रिय हुए।

पद्म श्री से सम्मानित हुए चेवांग नोरफेल

चेवांग नोरफेल के इस अनूठे योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें वर्ष 2015 में देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म श्री से सम्मानित किया। उनके कार्यों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा गया और कई शोध संस्थानों ने उन्हें जल संरक्षण के क्षेत्र में अग्रणी नवाचारकर्ता माना।

सोनम वांगचुक ने क्या नया किया?

सोनम वांगचुक का नाम दुनिया भर में “आइस स्तूप” परियोजना के कारण प्रसिद्ध हुआ। वर्ष 2013 के आसपास उन्होंने और उनकी टीम ने ऐसी तकनीक विकसित की, जिसमें पानी को ऊंचाई से फव्वारे की तरह छोड़ा जाता है। अत्यधिक ठंड में यह पानी शंकु (Cone) के आकार में जमता है और विशाल “आइस स्तूप” बन जाता है।

इस तकनीक का सबसे बड़ा लाभ यह है कि शंकु का आकार कम सतह क्षेत्र (Surface Area) के कारण अपेक्षाकृत धीमी गति से पिघलता है। परिणामस्वरूप गर्मियों तक पानी सुरक्षित रहता है और गांवों को लंबे समय तक जल उपलब्ध होता है।

यानी, सोनम वांगचुक ने कृत्रिम ग्लेशियर की मूल अवधारणा को नए इंजीनियरिंग डिजाइन के साथ अधिक प्रभावी बनाने का प्रयास किया।

क्या आइस स्तूप पूरी तरह नया आविष्कार था?

विशेषज्ञों के अनुसार इसका उत्तर “पूरी तरह हां” या “पूरी तरह नहीं” दोनों नहीं है।

जल संरक्षण पर प्रकाशित कई शोधपत्रों और तकनीकी अध्ययनों में माना गया है कि आइस स्तूप की प्रेरणा लद्दाख में पहले से किए गए कृत्रिम ग्लेशियर प्रयोगों से जुड़ी थी, जिनमें चेवांग नोरफेल का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण था।

हालांकि, यह भी तथ्य है कि आइस स्तूप का डिजाइन, निर्माण प्रणाली और पानी को शंकु के आकार में जमा करने की प्रक्रिया एक अलग इंजीनियरिंग समाधान थी, जिसने इस तकनीक को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई।

इसलिए यह कहना अधिक उचित होगा कि आइस स्तूप कृत्रिम ग्लेशियर तकनीक का विकसित और उन्नत संस्करण है, न कि केवल उसकी साधारण नकल।

क्या सोनम वांगचुक ने चेवांग नोरफेल का श्रेय छीन लिया?

सोशल मीडिया पर यही सबसे बड़ा आरोप लगाया जा रहा है, लेकिन इसकी पुष्टि करने वाला कोई ठोस सार्वजनिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है।

उपलब्ध इंटरव्यू, शोधपत्रों और कई समाचार रिपोर्टों में यह उल्लेख मिलता है कि सोनम वांगचुक ने कई अवसरों पर चेवांग नोरफेल के कार्यों का उल्लेख किया है और उन्हें प्रेरणा स्रोत माना है।

इसलिए यह कहना कि उन्होंने जानबूझकर पूरा श्रेय अपने नाम कर लिया, तथ्यात्मक रूप से सिद्ध नहीं किया जा सकता।

पेटेंट को लेकर वायरल दावा कितना सही?

वायरल पोस्ट में दावा किया गया है कि सोनम वांगचुक ने “आइस स्तूप” का पेटेंट अपने नाम कराने की कोशिश की या किसी प्रकार का “ओपन पेटेंट” या “डिफेंसिव पब्लिकेशन” कराया।

हालांकि उपलब्ध सार्वजनिक रिकॉर्ड में ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला है कि आइस स्तूप तकनीक का कोई सामान्य पेटेंट सोनम वांगचुक या उनकी संस्था SECMOL के नाम दर्ज हो।

इसी तरह “डिफेंसिव रजिस्ट्रेशन” वाले दावे का समर्थन करने वाला भी कोई आधिकारिक दस्तावेज सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।

इसलिए इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है।

क्या कृत्रिम ग्लेशियर की परंपरा पहले से मौजूद थी?

इतिहासकारों और जल विशेषज्ञों के अनुसार हिमालय और काराकोरम क्षेत्र के कई समुदाय सदियों से स्थानीय स्तर पर बर्फ संरक्षण और कृत्रिम रूप से बर्फ जमा करने जैसी पारंपरिक तकनीकों का उपयोग करते रहे हैं।

इन्हें अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग नामों से जाना जाता है। हालांकि आधुनिक वैज्ञानिक तरीके से इन्हें व्यवस्थित रूप देकर कृषि और जल प्रबंधन में लागू करने का श्रेय चेवांग नोरफेल को व्यापक रूप से दिया जाता है।

मारुति सुजुकी को बड़ा झटका: रायपुर उपभोक्ता आयोग ने डॉक्टर को नई Grand Vitara देने का दिया आदेश, कंपनी ने फैसले को दी चुनौती!

विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

जल प्रबंधन विशेषज्ञों का मानना है कि चेवांग नोरफेल और सोनम वांगचुक दोनों का योगदान अलग-अलग स्तर पर महत्वपूर्ण है।

चेवांग नोरफेल ने कृत्रिम ग्लेशियरों को व्यवहारिक रूप देकर किसानों की समस्या का समाधान किया।

सोनम वांगचुक ने उसी क्षेत्र में नई इंजीनियरिंग अवधारणा प्रस्तुत करते हुए आइस स्तूप तकनीक विकसित की, जिसने वैश्विक स्तर पर ध्यान आकर्षित किया।

दोनों के कार्यों का उद्देश्य लद्दाख में जल संकट का समाधान करना रहा है।

वायरल पोस्ट में चेवांग नोरफेल के योगदान को लेकर कही गई अधिकांश बातें तथ्यात्मक रूप से सही हैं। वे वास्तव में लद्दाख में कृत्रिम ग्लेशियर तकनीक के अग्रणी विशेषज्ञ माने जाते हैं और उनके कार्यों ने हजारों लोगों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डाला है।

लेकिन पोस्ट में लगाए गए कई आरोप—जैसे कि सोनम वांगचुक ने केवल नकल की, पूरा श्रेय हड़प लिया या चालाकी से तकनीक अपने नाम कर ली—इन दावों के समर्थन में कोई ठोस सार्वजनिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है।

तथ्यों के आधार पर देखा जाए तो चेवांग नोरफेल और सोनम वांगचुक दोनों ने लद्दाख के जल संकट के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। जहां नोरफेल ने कृत्रिम ग्लेशियरों की नींव मजबूत की, वहीं सोनम वांगचुक ने आइस स्तूप जैसी नई तकनीक विकसित कर इस क्षेत्र को वैश्विक पहचान दिलाने का प्रयास किया।

Chewang Norphel, popularly known as the Ice Man of India, pioneered artificial glacier technology in Ladakh during the 1980s to address seasonal water shortages. Sonam Wangchuk later introduced the innovative Ice Stupa concept, which improved water storage using a conical ice structure. This fact check explores the differences between Artificial Glaciers and Ice Stupas, examines claims regarding patents and SECMOL, and explains the real contributions of Chewang Norphel and Sonam Wangchuk in solving Ladakh’s water crisis through sustainable innovation and climate adaptation.

spot_img
spot_imgspot_img

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

spot_imgspot_img

Share post:

New Delhi
broken clouds
30.1 ° C
30.1 °
30.1 °
84 %
3.6kmh
65 %
Fri
35 °
Sat
37 °
Sun
37 °
Mon
35 °
Tue
31 °
Video thumbnail
लाल किला ब्लास्ट पर UNSC रिपोर्ट का बड़ा खुलासा! AQIS का नाम सामने आया, AI से आतंकी साजिश?
03:07
Video thumbnail
Rahul Gandhi : "मुझे मोदी जी के ऑफिस के अंदर सेइनफार्मेशन मिलती है..."
00:40
Video thumbnail
क्या सरकारी निर्माण कार्यों में प्लास्टिक का सरिया उपयोग किया जा रहा है?
03:00
Video thumbnail
सयोनी घोष का विपक्ष पर निशाना, बोलीं- गृह मंत्री जवाब देने को तैयार थे,विपक्ष जवाब सुनने से बचता रहा
00:58
Video thumbnail
Nitin Gaddkari : "अमेरिका का लाओ, हेडिंग हटाओ, ठप्पा मारो और घोषित कर दो"
00:53
Video thumbnail
Rahul Gandhi का ज़ोरदार हमला बोले - “इनको हम पागल कर देंगे” | Congress
23:44
Video thumbnail
Rahul Gandhi on PM Modi's Foreign Policy | मोदी की विदेश नीति पर राहुल गांधी का तंज
00:14
Video thumbnail
मोदी की विदेश नीति पर राहुल गांधी का तंज
00:14
Video thumbnail
PM मोदी प्रेस कॉन्फ्रेंस क्यों नहीं करते?राहुल गांधी ने बताई वजह
00:45
Video thumbnail
Rahul Gandhi on Amit Shah : "अमित शाह...वो भाग गया"
00:23

Subscribe

spot_img
spot_imgspot_img

Popular

spot_img

More like this
Related