अब घर बैठे करें उपभोक्ता आयोग में ऑनलाइन शिकायत, बिना वकील के भी मिलेगा न्याय; जानिए e-Daakhil और NCH की पूरी प्रक्रिया
AIN NEWS 1 नई दिल्ली। यदि आपने कोई सामान खरीदा है, ऑनलाइन ऑर्डर किया है या किसी कंपनी की सेवा ली है और आपको खराब उत्पाद, गलत बिलिंग, धोखाधड़ी, सेवा में लापरवाही या रिफंड न मिलने जैसी समस्या का सामना करना पड़ रहा है, तो अब न्याय पाने के लिए बार-बार सरकारी दफ्तरों या अदालतों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं है। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत सरकार ने ऐसी डिजिटल व्यवस्था विकसित की है, जिसके माध्यम से उपभोक्ता अपने घर बैठे ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
आज देशभर में लाखों उपभोक्ता e-Daakhil Portal और National Consumer Helpline (NCH) के माध्यम से अपनी शिकायतों का समाधान प्राप्त कर रहे हैं। खास बात यह है कि अधिकांश मामलों में शिकायत दर्ज कराने के लिए वकील रखना अनिवार्य नहीं है। यदि आपके पास आवश्यक दस्तावेज मौजूद हैं तो आप स्वयं अपनी शिकायत प्रस्तुत कर सकते हैं।

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 ने आसान बनाया न्याय का रास्ता
उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए लागू Consumer Protection Act, 2019 ने शिकायत दर्ज कराने की पूरी प्रक्रिया को पहले की तुलना में काफी सरल बना दिया है। इस कानून के तहत उपभोक्ता किसी भी उत्पाद या सेवा से जुड़ी शिकायत ऑनलाइन दर्ज कर सकते हैं। डिजिटल व्यवस्था के कारण अब शिकायत दर्ज करने, दस्तावेज जमा करने और केस की स्थिति जानने के लिए अलग-अलग कार्यालयों में जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती।
सरकार ने इसके लिए दो प्रमुख प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराए हैं—National Consumer Helpline (NCH) और e-Daakhil Portal। दोनों की भूमिका अलग-अलग है और उपभोक्ता अपनी आवश्यकता के अनुसार इनमें से किसी का भी उपयोग कर सकते हैं।
क्या है National Consumer Helpline (NCH)?
National Consumer Helpline यानी NCH उपभोक्ताओं की शुरुआती शिकायतों के समाधान के लिए बनाई गई व्यवस्था है। यदि किसी कंपनी ने आपका रिफंड रोक रखा है, गलत सामान भेजा है, वारंटी का पालन नहीं किया है, ऑनलाइन खरीदारी में धोखाधड़ी हुई है या किसी सेवा में लापरवाही बरती गई है, तो सबसे पहले NCH के माध्यम से शिकायत दर्ज की जा सकती है।
NCH संबंधित कंपनी से संपर्क कर मामले का समाधान कराने का प्रयास करता है। बड़ी संख्या में शिकायतों का निपटारा इसी स्तर पर हो जाता है, जिससे उपभोक्ता को अदालत जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती।
हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि NCH पर पहले शिकायत करना कानूनी रूप से अनिवार्य नहीं है। यदि कोई उपभोक्ता चाहे तो वह सीधे उपभोक्ता आयोग में भी मामला दर्ज कर सकता है।
NCH पर शिकायत कैसे करें?
उपभोक्ता कई माध्यमों से अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
आधिकारिक वेबसाइट पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज की जा सकती है।
हेल्पलाइन नंबर 1915 पर कॉल करके शिकायत की जा सकती है।
WhatsApp नंबर 8800001915 पर संदेश भेजकर भी शिकायत प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।
UMANG App और NCH App के माध्यम से भी शिकायत दर्ज करने की सुविधा उपलब्ध है।
शिकायत दर्ज करते समय खरीदारी से जुड़े सभी दस्तावेज और ऑर्डर की जानकारी अपने पास रखना लाभदायक रहता है।
e-Daakhil Portal क्या है?
यदि किसी मामले का समाधान बातचीत या NCH के माध्यम से नहीं हो पाता, या उपभोक्ता सीधे कानूनी कार्रवाई करना चाहता है, तो वह e-Daakhil Portal के माध्यम से संबंधित उपभोक्ता आयोग में ऑनलाइन केस दर्ज कर सकता है।
यह भारत सरकार की डिजिटल सेवा है, जिसके जरिए उपभोक्ता बिना अदालत पहुंचे अपने मामले की ऑनलाइन फाइलिंग कर सकते हैं। शिकायत दर्ज होने के बाद केस की प्रगति भी ऑनलाइन देखी जा सकती है।
e-Daakhil पर शिकायत दर्ज करने की पूरी प्रक्रिया
सबसे पहले e-Daakhil पोर्टल पर जाकर नया अकाउंट बनाना होता है। इसके लिए मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी और अन्य आवश्यक जानकारी दर्ज कर OTP के माध्यम से सत्यापन किया जाता है।
इसके बाद शिकायतकर्ता को आवश्यक दस्तावेज तैयार रखने होते हैं।
इन दस्तावेजों में शामिल हैं—
खरीद का बिल या इनवॉइस
भुगतान की रसीद
बैंक ट्रांजैक्शन या UPI भुगतान का प्रमाण
कंपनी के साथ हुई ईमेल या चैट
यदि भेजा गया हो तो लीगल नोटिस
शिकायत का विस्तृत विवरण
आधार कार्ड, वोटर आईडी या अन्य पहचान पत्र
सभी दस्तावेज PDF प्रारूप में अपलोड किए जाते हैं।
इसके बाद शिकायतकर्ता संबंधित जिला, राज्य या राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग का चयन करता है। शिकायत का पूरा विवरण भरने के बाद विपक्षी पक्ष यानी कंपनी या सेवा प्रदाता की जानकारी दर्ज की जाती है।
सभी दस्तावेज अपलोड करने और निर्धारित कोर्ट फीस जमा करने के बाद आवेदन ऑनलाइन सबमिट कर दिया जाता है।
आवेदन सफलतापूर्वक जमा होने पर एक Acknowledgement Number या Application Number जारी किया जाता है, जिसकी सहायता से पूरे मामले की ऑनलाइन ट्रैकिंग की जा सकती है।
कोर्ट फीस कितनी देनी होगी?
उपभोक्ता संरक्षण नियमों के अनुसार ₹5 लाख तक के दावों पर कोई कोर्ट फीस नहीं ली जाती।
इससे अधिक राशि के मामलों में निर्धारित शुल्क लागू होता है, जो दावे की राशि के अनुसार तय किया जाता है।
किस आयोग में होगी सुनवाई?
दावे की राशि के आधार पर संबंधित उपभोक्ता आयोग का अधिकार क्षेत्र निर्धारित होता है।
जिला उपभोक्ता आयोग – ₹1 करोड़ तक के दावे।
राज्य उपभोक्ता आयोग – ₹1 करोड़ से अधिक और ₹10 करोड़ तक के दावे।
राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग (NCDRC) – ₹10 करोड़ से अधिक के दावे।
शिकायत दर्ज करते समय किन बातों का रखें ध्यान?
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी उपभोक्ता विवाद में दस्तावेज सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्य होते हैं। इसलिए खरीदारी का बिल, ऑर्डर आईडी, भुगतान की रसीद, बैंक स्टेटमेंट, ईमेल, चैट, डिलीवरी का प्रमाण और कंपनी के साथ हुई पूरी बातचीत सुरक्षित रखें।
यदि कंपनी से फोन पर बातचीत हुई है तो उसकी तारीख और समय भी नोट कर लें। लिखित शिकायत और सभी दस्तावेज व्यवस्थित तरीके से जमा करने से मामले की सुनवाई आसान हो जाती है।
क्या बिना वकील के केस लड़ा जा सकता है?
हाँ। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत उपभोक्ता स्वयं अपनी ओर से शिकायत प्रस्तुत कर सकते हैं। सामान्य मामलों में वकील रखना अनिवार्य नहीं है। हालांकि यदि मामला जटिल हो या बड़ी राशि का विवाद हो, तो कानूनी सलाह लेना उपयोगी हो सकता है।
डिजिटल व्यवस्था से बढ़ी उपभोक्ताओं की सुविधा
डिजिटल प्लेटफॉर्म आने के बाद उपभोक्ताओं के लिए न्याय प्राप्त करना पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान हो गया है। अब शिकायत दर्ज करने से लेकर दस्तावेज अपलोड करने, फीस जमा करने और केस की स्थिति जानने तक की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन उपलब्ध है। इससे समय और धन दोनों की बचत होती है तथा आम नागरिकों को अपने अधिकारों की रक्षा करने का प्रभावी माध्यम मिलता है।
यदि किसी कंपनी, ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट, बैंक, बीमा कंपनी, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म या किसी अन्य सेवा प्रदाता ने आपके साथ अनुचित व्यवहार किया है, तो अब चुप रहने की आवश्यकता नहीं है। National Consumer Helpline (NCH) के माध्यम से शुरुआती समाधान का प्रयास किया जा सकता है, जबकि आवश्यकता पड़ने पर e-Daakhil Portal के जरिए सीधे उपभोक्ता आयोग में ऑनलाइन शिकायत दर्ज की जा सकती है।
सरकार की यह डिजिटल व्यवस्था उपभोक्ताओं को तेज, पारदर्शी और सुविधाजनक न्याय उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। सही दस्तावेजों और उचित जानकारी के साथ कोई भी उपभोक्ता अपने अधिकारों की रक्षा के लिए आसानी से कानूनी प्रक्रिया शुरू कर सकता है।
Consumers in India can now file an online consumer complaint through the e-Daakhil Portal under the Consumer Protection Act, 2019. The National Consumer Helpline (NCH), Consumer Commission, online grievance redressal, consumer rights, digital complaint filing, consumer court process, e-Daakhil registration, complaint tracking, consumer dispute resolution, and online legal services have made it easier for consumers to seek justice without hiring a lawyer. Understanding the complaint process, required documents, court fees, and jurisdiction helps consumers resolve disputes quickly and effectively.



















