उज्जैन में इंटरकास्ट लव मैरिज के बाद परिवार ने बेटी का किया प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार, रिश्ते तोड़ने का किया ऐलान
AIN NEWS 1 उज्जैन (मध्य प्रदेश):
मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले से सामने आई एक घटना ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। यहां एक युवती द्वारा अपनी पसंद से अंतरजातीय (इंटरकास्ट) प्रेम विवाह करने के बाद उसके परिवार ने ऐसा कदम उठाया, जिसने सामाजिक और कानूनी दोनों स्तरों पर बहस छेड़ दी है। परिवार ने अपनी जीवित बेटी को मृत मानते हुए उसका प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार कर दिया और सार्वजनिक रूप से उससे सभी रिश्ते खत्म करने की घोषणा कर दी।
यह मामला उज्जैन जिले के खाचरौद क्षेत्र का बताया जा रहा है, जहां परिवार और समाज के लोगों की मौजूदगी में बेटी की तस्वीर रखकर अंतिम संस्कार जैसी रस्में निभाई गईं। इस घटना के वीडियो और तस्वीरें सामने आने के बाद मामला पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया है।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, खाचरौद क्षेत्र की रहने वाली एक 18 वर्षीय युवती ने अपनी इच्छा से अपनी पसंद के युवक के साथ प्रेम विवाह कर लिया। दोनों अलग-अलग जातियों से संबंध रखते हैं, जिसके कारण युवती के परिवार ने इस रिश्ते का शुरू से ही विरोध किया।
परिजनों का कहना है कि उन्होंने बेटी को कई बार समझाने का प्रयास किया, लेकिन वह अपने फैसले पर अडिग रही। मामला पुलिस थाने तक भी पहुंचा, जहां युवती ने स्पष्ट रूप से कहा कि उसने अपनी इच्छा से विवाह किया है और वह अपने पति के साथ ही रहना चाहती है।
बताया जा रहा है कि युवती ने पुलिस के सामने अपने बालिग होने की पुष्टि की और परिवार के साथ वापस जाने से इनकार कर दिया।
परिवार ने उठाया हैरान करने वाला कदम
जब युवती अपने फैसले से पीछे नहीं हटी तो परिवार ने समाज के लोगों और रिश्तेदारों की बैठक बुलाई। इसके बाद परिवार ने बेटी की तस्वीर रखकर उसे मृत घोषित करने की प्रतीकात्मक रस्में निभाईं।
परिवार ने तस्वीर पर फूल चढ़ाए, शोक सभा आयोजित की और बाद में तस्वीर को आग के हवाले कर दिया। इसके साथ ही परिवार ने यह घोषणा की कि अब उनका बेटी से कोई संबंध नहीं रहेगा।
बताया जा रहा है कि इस दौरान समुदाय की एक पारंपरिक रस्म ‘गोरनी’ भी निभाई गई, जिसे सामाजिक रूप से किसी सदस्य से संबंध समाप्त करने का प्रतीक माना जाता है।
‘गोरनी’ रस्म क्या होती है?
कुछ समुदायों में ‘गोरनी’ ऐसी सामाजिक परंपरा मानी जाती है, जिसके जरिए किसी व्यक्ति को प्रतीकात्मक रूप से परिवार और समाज से अलग घोषित किया जाता है। हालांकि इस रस्म का कोई कानूनी महत्व नहीं होता।
भारत का कानून किसी भी बालिग व्यक्ति को अपनी इच्छा से विवाह करने का अधिकार देता है। इसलिए ऐसी सामाजिक रस्में किसी व्यक्ति के कानूनी अधिकारों को प्रभावित नहीं करतीं।
पुलिस थाने तक पहुंचा था मामला
सूत्रों के अनुसार, परिवार ने पहले युवती को वापस लाने की कोशिश की थी। मामला पुलिस के पास भी पहुंचा, लेकिन वहां युवती ने साफ शब्दों में कहा कि उसने अपनी मर्जी से विवाह किया है और वह किसी दबाव में नहीं है।
पुलिस ने उसकी उम्र और बयान के आधार पर उसे अपने पति के साथ रहने की अनुमति दी। क्योंकि युवती बालिग थी, इसलिए कानून के अनुसार पुलिस उसके निर्णय में हस्तक्षेप नहीं कर सकती थी।
कानून क्या कहता है?
भारतीय संविधान प्रत्येक बालिग नागरिक को अपनी पसंद से जीवनसाथी चुनने का अधिकार देता है। सर्वोच्च न्यायालय भी कई फैसलों में स्पष्ट कर चुका है कि बालिग युवक-युवती अपनी इच्छा से विवाह कर सकते हैं और इसमें परिवार की असहमति कानूनी आधार नहीं बन सकती।
यदि कोई बालिग महिला अपनी इच्छा से विवाह करती है, तो उसे रोकना या जबरन घर ले जाना कानून के खिलाफ माना जा सकता है।
समाज में फिर शुरू हुई बहस
इस घटना के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।
कुछ लोगों ने परिवार की भावनाओं और सामाजिक परंपराओं का हवाला देते हुए उनके फैसले को व्यक्तिगत मामला बताया, जबकि बड़ी संख्या में लोगों ने इसे महिलाओं की स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों के खिलाफ मानसिकता का प्रतीक बताया।
विशेषज्ञों का कहना है कि आज भी देश के कई हिस्सों में अंतरजातीय विवाह को लेकर सामाजिक स्वीकार्यता पूरी तरह विकसित नहीं हो सकी है। इसी कारण ऐसे मामले समय-समय पर सामने आते रहते हैं।
क्या इस मामले में कोई कानूनी कार्रवाई हुई?
अब तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार, परिवार द्वारा किए गए प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार को लेकर कोई अलग आपराधिक मामला दर्ज होने की पुष्टि नहीं हुई है।
हालांकि पुलिस ने युवती के बयान के आधार पर यह स्पष्ट किया कि वह अपनी इच्छा से विवाह कर चुकी है और सुरक्षित है। इसलिए फिलहाल मामला परिवार और युवती के व्यक्तिगत संबंधों तक सीमित माना जा रहा है।
महिलाओं के अधिकार और समाज
विशेषज्ञ मानते हैं कि शिक्षा और जागरूकता बढ़ने के बावजूद अंतरजातीय और प्रेम विवाह को लेकर समाज के कुछ वर्गों में अब भी विरोध देखने को मिलता है।
ऐसी घटनाएं इस बात की ओर संकेत करती हैं कि कानूनी अधिकार मिलने के बावजूद सामाजिक स्वीकार्यता का दायरा अभी भी पूरी तरह व्यापक नहीं हो पाया है। महिलाओं को अपने जीवन से जुड़े निर्णय लेने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है और ऐसे मामलों में कानून उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
उज्जैन के खाचरौद की यह घटना केवल एक परिवार का मामला नहीं, बल्कि समाज में मौजूद सोच, परंपराओं और व्यक्तिगत अधिकारों के बीच चल रहे संघर्ष की भी तस्वीर पेश करती है। एक ओर परिवार अपनी सामाजिक मान्यताओं और परंपराओं का हवाला दे रहा है, वहीं दूसरी ओर कानून प्रत्येक बालिग नागरिक को अपनी पसंद से विवाह करने और स्वतंत्र जीवन जीने का अधिकार देता है।
यह घटना एक बार फिर इस सवाल को सामने लाती है कि बदलते समाज में व्यक्तिगत स्वतंत्रता, पारिवारिक सम्मान और सामाजिक परंपराओं के बीच संतुलन कैसे स्थापित किया जाए। आने वाले समय में इस मुद्दे पर सामाजिक जागरूकता और संवाद की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक महसूस की जा रही है।
A shocking incident from Ujjain, Madhya Pradesh, has sparked nationwide discussion after a family reportedly performed the symbolic last rites of their living daughter following her inter-caste love marriage. The incident, which took place in Khachrod, has raised questions about family honor, social traditions, and individual rights. Read the complete report on the family’s reaction, police involvement, legal perspective, and the growing debate over love marriage, inter-caste marriage, women’s rights, and social acceptance in India.



















