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देहरादून फ्लैट घोटाला: दुबई से गिरफ्तार राखी मित्तल, भारत लाने की तैयारी तेज!

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AIN NEWS 1: देहरादून में सामने आया बहुचर्चित फ्लैट घोटाला एक बार फिर सुर्खियों में है। लंबे समय से फरार चल रही आरोपी राखी मित्तल की दुबई में गिरफ्तारी ने इस मामले में नई उम्मीद जगा दी है। अब उत्तराखंड पुलिस उसे भारत लाने के लिए कानूनी प्रक्रिया में जुट चुकी है। इस पूरे मामले ने न सिर्फ निवेशकों के सपनों को तोड़ा, बल्कि रियल एस्टेट सेक्टर में भरोसे पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

क्या है पूरा मामला?

देहरादून के सहस्रधारा रोड पर “ऑर्किड पार्क” नाम से एक ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट शुरू किया गया था। इस परियोजना को पुष्पांजलि इंफ्राटेक कंपनी द्वारा विकसित किया जा रहा था, जिसके संचालक दीपक मित्तल और उनकी पत्नी राखी मित्तल थे। शुरुआत में इस प्रोजेक्ट को आधुनिक सुविधाओं और आकर्षक लोकेशन के साथ पेश किया गया, जिससे बड़ी संख्या में लोगों ने इसमें निवेश किया।

करीब 90 खरीदारों ने अपने जीवन की जमा-पूंजी इस परियोजना में लगा दी। लेकिन समय बीतने के साथ निर्माण कार्य धीमा पड़ गया और आखिरकार पूरी तरह रुक गया। निवेशकों को दिए गए वादे पूरे नहीं हुए और उनके सपनों का घर अधूरा रह गया।

45 करोड़ की ठगी, फिर फरारी

जांच में सामने आया कि इस प्रोजेक्ट के नाम पर करीब 45 करोड़ रुपये जुटाए गए थे। लेकिन 2018 के बाद निर्माण कार्य लगभग ठप हो गया। इसके बावजूद निवेशकों को आश्वासन दिए जाते रहे।

साल 2020 में अचानक दीपक मित्तल और उनका परिवार रातों-रात गायब हो गया। इसके बाद निवेशकों को एहसास हुआ कि वे एक बड़े धोखे का शिकार हो चुके हैं। मामला पुलिस तक पहुंचा और जांच शुरू हुई।

खंडहर में बदला ड्रीम प्रोजेक्ट

आज “ऑर्किड पार्क” की हालत बेहद खराब है। जहां कभी लोगों ने अपने सपनों का घर बसाने की उम्मीद की थी, वहां अब अधूरी इमारतें और जर्जर ढांचे नजर आते हैं। यह दृश्य उन निवेशकों के लिए बेहद दर्दनाक है, जिन्होंने अपनी जिंदगी की बचत इस परियोजना में लगा दी थी।

इंटरपोल की मदद से गिरफ्तारी

कई सालों तक फरार रहने के बाद आखिरकार राखी मित्तल को दुबई में गिरफ्तार कर लिया गया। यह कार्रवाई इंटरपोल के रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर की गई। दुबई पुलिस ने उसे हिरासत में लिया है और अब भारतीय एजेंसियां उसे देश वापस लाने की प्रक्रिया में जुटी हैं।

प्रत्यर्पण की प्रक्रिया शुरू

देहरादून पुलिस ने राखी मित्तल के प्रत्यर्पण (Extradition) की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके तहत दोनों देशों के बीच कानूनी औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही उसे भारत लाकर पूछताछ की जाएगी।

ईडी और एसटीएफ की जांच

इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) और स्पेशल टास्क फोर्स (STF) भी सक्रिय हैं।

ईडी मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच कर रही है

अब तक करोड़ों रुपये की संपत्ति अटैच की जा चुकी है

एसटीएफ ने पहले ही दीपक मित्तल के पिता अश्वनी मित्तल को गिरफ्तार किया है

प्रोजेक्ट के पार्टनर राजपाल वालिया भी जेल जा चुके हैं

घोटाले से जुड़े अहम तथ्य

कुल ठगी: लगभग 45 करोड़ रुपये

पीड़ित खरीदार: करीब 90

बैंक लोन: 21 करोड़ रुपये (PNB) – NPA घोषित

कुल मुकदमे: करीब 10 केस दर्ज

जमीन की अनुमानित कीमत: 150 करोड़ रुपये

पैसों के लेन-देन पर बड़ा खुलासा

जांच के दौरान यह भी पता चला है कि फरार होने से पहले कंपनी के खाते से करीब 7.46 करोड़ रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किए गए थे। यह ट्रांजेक्शन कई सवाल खड़े करता है और जांच एजेंसियां अब इस पैसे के पीछे की पूरी कहानी खंगाल रही हैं।

बड़े नामों के जुड़ने की आशंका

पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इस घोटाले में कुछ प्रभावशाली लोगों की भी भूमिका हो सकती है। राखी मित्तल से पूछताछ के बाद ऐसे नाम सामने आ सकते हैं, जिन्होंने इस फर्जीवाड़े को अंजाम देने में मदद की।

मुख्य आरोपी अभी भी फरार

हालांकि राखी मित्तल की गिरफ्तारी एक बड़ी सफलता मानी जा रही है, लेकिन मुख्य आरोपी दीपक मित्तल अभी भी फरार है। पुलिस को उम्मीद है कि राखी से पूछताछ के बाद उसके ठिकाने और नेटवर्क के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।

पुलिस का क्या कहना है?

उत्तराखंड पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, यह गिरफ्तारी मामले में एक अहम मोड़ है। अब जांच और तेज होगी और बाकी आरोपियों तक पहुंचने में मदद मिलेगी। पुलिस का कहना है कि दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।

निवेशकों की उम्मीदें फिर जागीं

इस गिरफ्तारी के बाद पीड़ित निवेशकों में एक बार फिर उम्मीद जगी है कि उन्हें न्याय मिलेगा। कई लोग सालों से अपने पैसे और घर दोनों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। अब उन्हें उम्मीद है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी और उनका नुकसान किसी हद तक पूरा हो सकेगा।

The Dehradun flat scam involving Pushpanjali Infratech has gained fresh attention after the arrest of Rakhi Mittal in Dubai under an Interpol Red Corner Notice. The case, linked to a ₹45 crore fraud affecting around 90 homebuyers in the Orchid Park project, highlights serious concerns in India’s real estate sector. Authorities including the Enforcement Directorate (ED) and STF are actively investigating money laundering angles, while extradition proceedings are underway to bring the आरोपी back to India and track the main accused Deepak Mittal.

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