AIN NEWS 1 नई दिल्ली: दक्षिणी दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला PG इमारत गिरने और सात लोगों की मौत के बाद राजधानी में पेइंग गेस्ट (PG) इमारतों की सुरक्षा को लेकर नगर निगम दिल्ली (MCD) ने अपनी जांच तेज कर दी है। हादसे के बाद शुरू किए गए सुरक्षा सर्वे में अब तक राजधानी की 1,355 PG इमारतों को शामिल किया जा चुका है। शुरुआती जांच में ज्यादातर इमारतें देखने में सुरक्षित मिली हैं, लेकिन कुछ भवनों की हालत ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।
MCD की अब तक की जांच में 1,304 PG इमारतें ऐसी मिली हैं, जिन्हें दिखाई देने वाली स्थिति के आधार पर सुरक्षित माना गया है। इन इमारतों में करीब 26,917 लोग रह रहे हैं। वहीं, तीन इमारतों को दिखाई देने के स्तर पर खतरनाक पाया गया है। इन तीनों इमारतों में कुल 69 लोग रह रहे थे। तीनों खतरनाक इमारतें साउथ जोन-I में मिली हैं और इस जोन में सर्वे अभी जारी है।
सत्य निकेतन हादसे के बाद शुरू हुआ बड़ा सर्वे
दिल्ली के सत्य निकेतन में हाल ही में एक पांच मंजिला PG इमारत ढह गई थी। इस हादसे में सात लोगों की मौत हुई थी। घटना के बाद राजधानी में PG और दूसरी बहुमंजिला इमारतों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे। इसके बाद MCD ने PG इमारतों का व्यापक सर्वे शुरू किया।
इस सर्वे का मकसद केवल इमारतों की बाहरी स्थिति देखना नहीं, बल्कि यह पता लगाना भी है कि किन भवनों में लोग रह रहे हैं, कौन-सी इमारतें मरम्मत मांगती हैं और किन जगहों पर सुरक्षा को लेकर तत्काल कार्रवाई की जरूरत है।
MCD की जांच में अभी तक सामने आए आंकड़े बताते हैं कि सभी इमारतों की स्थिति एक जैसी नहीं है। बड़ी संख्या में भवन सुरक्षित श्रेणी में मिले हैं, लेकिन कुछ इमारतों में गंभीर या मध्यम स्तर की कमियां भी सामने आई हैं।
तीन इमारतें सबसे ज्यादा चिंता का कारण
सर्वे में तीन PG इमारतों को visibly dangerous यानी देखने में ही खतरनाक श्रेणी में रखा गया है। इन तीनों भवनों में कुल 69 लोग रह रहे थे। खास बात यह है कि तीनों इमारतें साउथ जोन-I में मिली हैं।
इन इमारतों को लेकर अब सबसे बड़ी चिंता वहां रहने वाले लोगों की सुरक्षा है। किसी भवन को खतरनाक पाए जाने के बाद संबंधित विभाग के सामने यह चुनौती होती है कि वहां रहने वाले लोगों को सुरक्षित कैसे हटाया जाए और भवन के संबंध में आगे क्या कार्रवाई की जाए।
यह आंकड़ा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सत्य निकेतन में हुई घटना ने दिखाया है कि किसी इमारत की खराब स्थिति को नजरअंदाज करने का परिणाम कितना गंभीर हो सकता है।
9 PG इमारतों को बड़ी मरम्मत की जरूरत
MCD के सर्वे में केवल तीन खतरनाक इमारतें ही नहीं मिलीं। नौ अन्य PG इमारतों को visibly repairable पाया गया है। यानी इन भवनों में ऐसी कमियां हैं जिनके लिए बड़े स्तर पर मरम्मत की आवश्यकता है।
इन नौ इमारतों में करीब 140 लोग रह रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार इनमें पांच इमारतें केशव पुरम में हैं, जिनमें 36 लोग रहते हैं। दो इमारतें नजफगढ़ में हैं, जहां 38 लोग रह रहे हैं। इसके अलावा साउथ जोन-II में दो इमारतें ऐसी मिली हैं, जिनमें कुल 66 लोग रहते हैं।
इसका मतलब यह है कि सर्वे के दौरान MCD को केवल बेहद खतरनाक भवन ही नहीं मिले, बल्कि ऐसे कई PG भी सामने आए हैं जहां तत्काल या बड़े स्तर की मरम्मत की जरूरत है।
39 इमारतों में मामूली मरम्मत की जरूरत
सर्वे के दौरान 39 अन्य PG इमारतों को मामूली मरम्मत की जरूरत वाली श्रेणी में रखा गया है। इन भवनों में कुल 664 लोग रह रहे हैं।
मामूली मरम्मत का मतलब यह नहीं है कि इन इमारतों को तुरंत खाली कराना जरूरी है, लेकिन उनकी कमियों को समय रहते दूर करना जरूरी है। भवनों में छोटी-छोटी समस्याओं को लंबे समय तक नजरअंदाज करने पर भविष्य में वे बड़ी समस्या का रूप ले सकती हैं।
यही वजह है कि मौजूदा अभियान को केवल हादसे के बाद की कार्रवाई के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। इसका उद्देश्य दिल्ली में PG और अन्य आवासीय भवनों की सुरक्षा व्यवस्था को ज्यादा व्यवस्थित करना भी है।
कई और इमारतों को संभावित रूप से संवेदनशील माना गया
MCD के सर्वे में कुछ ऐसी इमारतों की भी पहचान की गई है जिन्हें भविष्य में संवेदनशील माना जा सकता है। इनमें G+4 से अधिक ऊंचाई वाली फ्रेम्ड स्ट्रक्चर इमारतें भी शामिल हैं।
सिविल लाइंस में ऐसी 21 इमारतों की पहचान हुई, जिनमें करीब 420 लोग रहते हैं। शाहदरा साउथ जोन-II में 57 ऐसी संरचनाएं मिलीं, जिनमें लगभग 2,036 लोग रहते हैं। इसके अलावा करोल बाग में सात, शाहदरा साउथ जोन-I में पांच और नजफगढ़ में दो ऐसी इमारतें चिन्हित की गई हैं।
हालांकि, इन सभी भवनों को सीधे खतरनाक घोषित नहीं किया गया है। इन्हें संभावित रूप से vulnerable यानी संवेदनशील संरचनाओं के तौर पर चिन्हित किया गया है। आगे की जांच और तकनीकी मूल्यांकन के बाद इन पर कार्रवाई तय की जा सकती है।
111 संपत्तियों पर चला ध्वस्तीकरण अभियान
PG इमारतों के सर्वे के साथ-साथ MCD ने अवैध और असुरक्षित निर्माण के खिलाफ कार्रवाई भी तेज कर दी है। अधिकारियों के अनुसार चार दिनों में 111 संपत्तियों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई और 88 संपत्तियों को सील किया गया।
7 सितंबर को सात, 8 सितंबर को 17, 9 सितंबर को 46 और 10 सितंबर को 41 संपत्तियों पर demolition action किया गया। इसी अवधि में दो, पांच, 20 और 61 संपत्तियों को क्रमशः सील किया गया।
MCD ने इस दौरान अवैध निर्माण से जुड़े मामलों में 91 show-cause notices और सीलिंग कार्रवाई के लिए 69 नोटिस जारी किए। इसके अलावा 34 demolition orders भी जारी किए गए।
PG सुरक्षा को लेकर नए नियमों की तैयारी
सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली में PG व्यवस्था को लेकर केवल MCD स्तर पर कार्रवाई नहीं हो रही है। दिल्ली सरकार ने भी PG और छात्र आवासों को अधिक व्यवस्थित और सुरक्षित बनाने के लिए नए नियमों पर काम शुरू किया है।
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत PG संचालकों के लिए लाइसेंस, पुलिस क्लीयरेंस और संरचनात्मक एवं अग्नि सुरक्षा से जुड़े प्रमाणपत्र जरूरी किए जाने की योजना है। PG के लिए एक केंद्रीय पोर्टल पर पंजीकरण और रिकॉर्ड रखने का प्रस्ताव भी सामने आया है।
इससे भविष्य में यह पता लगाना आसान हो सकता है कि किसी इलाके में कितने PG चल रहे हैं, वहां कितने लोग रहते हैं और संबंधित भवन की सुरक्षा स्थिति क्या है।
सर्वे अभी पूरा नहीं हुआ
MCD का यह सर्वे अभी जारी है। अधिकारियों के अनुसार कुछ इलाकों का डेटा अभी अंतरिम स्थिति में है। इसलिए आने वाले दिनों में खतरनाक, मरम्मत योग्य या संवेदनशील इमारतों की संख्या में बदलाव संभव है।
फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि सत्य निकेतन की घटना के बाद PG इमारतों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन ने बड़े स्तर पर जांच शुरू कर दी है। 1,355 इमारतों का सर्वे पूरा होना इस अभियान का एक महत्वपूर्ण चरण है, लेकिन तीन खतरनाक इमारतों और कई मरम्मत योग्य भवनों का मिलना यह भी बताता है कि जांच और कार्रवाई को लगातार जारी रखने की जरूरत है।
दिल्ली में बड़ी संख्या में छात्र, नौकरीपेशा लोग और दूसरे शहरों से आने वाले युवा PG में रहते हैं। ऐसे में भवन की मजबूती, अवैध निर्माण, आग से सुरक्षा और आपातकालीन निकासी जैसी व्यवस्थाएं सीधे लोगों की जिंदगी से जुड़ी हैं। सत्य निकेतन हादसे के बाद शुरू हुई कार्रवाई से अब उम्मीद यही है कि खतरनाक इमारतों की पहचान समय रहते हो और किसी बड़े हादसे का इंतजार न करना पड़े।
Delhi MCD has intensified its safety inspection of paying guest accommodations after the deadly Satya Niketan building collapse. So far, 1,355 PG buildings have been surveyed across Delhi, with 1,304 buildings found visibly safe. Three PG buildings housing 69 occupants were classified as visibly dangerous, while nine buildings require major repairs and 39 need minor repairs. The MCD survey and enforcement drive are aimed at improving Delhi PG building safety, identifying unsafe structures and preventing future building collapse incidents.



















