AIN NEWS 1: उत्तर प्रदेश के बरेली से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां तीन बहनों ने खुद को आईएएस अधिकारी बताकर लोगों से लाखों रुपये की ठगी की। इस गैंग का भंडाफोड़ उत्तर प्रदेश पुलिस ने किया है। खास बात यह है कि आरोपी महिलाएं पढ़ी-लिखी और शादीशुदा हैं, जिससे लोगों का भरोसा आसानी से जीत लेती थीं।
कैसे हुआ मामले का खुलासा?
यह पूरा मामला बरेली के बारादरी थाना क्षेत्र का है। पिछले कुछ समय से पुलिस को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ महिलाएं सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों से मोटी रकम वसूल रही हैं। शुरुआत में यह मामला सामान्य ठगी जैसा लगा, लेकिन जब शिकायतों की संख्या बढ़ी, तो पुलिस ने इसे गंभीरता से लिया।
एक पीड़ित की शिकायत के आधार पर पुलिस ने जांच शुरू की। जांच के दौरान मुखबिर की सूचना मिली कि कुछ महिलाएं संदिग्ध गतिविधियों में शामिल हैं और एक तय स्थान पर मिलने वाली हैं।
गिरफ्तारी कैसे हुई?
27 अप्रैल को पुलिस ने कार्रवाई करते हुए डेंटल कॉलेज रोड स्थित सार्वजनिक शौचालय के पास से तीन महिलाओं को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान डॉ. विप्रा शर्मा, दीक्षा पाठक और शिखा शर्मा के रूप में हुई है।
तीनों के बीच रिश्तेदारी भी है—दो सगी बहनें हैं, जबकि तीसरी उनकी मामा की बेटी है। यह पारिवारिक नेटवर्क मिलकर लंबे समय से ठगी को अंजाम दे रहा था।
पढ़ाई-लिखाई का फायदा उठाकर रची साजिश
इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि तीनों महिलाएं अच्छी-खासी शिक्षित हैं:
एक आरोपी ने पीएचडी की डिग्री हासिल की है और पीसीएस प्री परीक्षा भी पास कर चुकी है
दूसरी ने एमए किया हुआ है
तीसरी ने बीएससी की पढ़ाई की है
इतनी उच्च शिक्षा के बावजूद इन महिलाओं ने गलत रास्ता चुना और लोगों के भविष्य से खिलवाड़ किया।
ठगी का तरीका क्या था?
तीनों महिलाएं खुद को आईएएस या उच्च पदस्थ अधिकारी बताती थीं। वे सरकारी सिस्टम की जानकारी और आत्मविश्वास के साथ लोगों को भरोसे में लेती थीं।
लोगों को सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देती थीं
इंटरव्यू और चयन प्रक्रिया का नकली भरोसा दिलाती थीं
बदले में लाखों रुपये वसूलती थीं
उनकी बातचीत और व्यवहार इतना प्रोफेशनल होता था कि लोग आसानी से उनके जाल में फंस जाते थे।
बरामदगी में क्या मिला?
गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से कई अहम चीजें बरामद कीं:
फर्जी सरकारी दस्तावेज
7 अलग-अलग बैंक चेकबुक
महंगे आईफोन
एक सफेद रंग की Mahindra XUV700 कार
सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि कार पर “ADM FR उत्तर प्रदेश सरकार” लिखा हुआ था, जिससे वे खुद को प्रशासनिक अधिकारी साबित करती थीं।
बैंक खातों में मिले लाखों रुपये
पूछताछ के दौरान खुलासा हुआ कि आरोपियों के बैंक खातों में करीब 55 लाख रुपये जमा हैं। यह पूरी रकम नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करके जुटाई गई थी।
पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए इन खातों को फ्रीज कर दिया है, ताकि आगे की जांच में कोई गड़बड़ी न हो।
आगे क्या कार्रवाई होगी?
फिलहाल पुलिस तीनों आरोपियों को कोर्ट में पेश कर रिमांड लेने की तैयारी कर रही है। पूछताछ के दौरान यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि:
इस गैंग में और कौन-कौन शामिल है
कितने लोगों को अब तक ठगा गया है
क्या यह नेटवर्क अन्य जिलों या राज्यों तक फैला हुआ है
समाज के लिए चेतावनी
यह मामला एक बड़ी चेतावनी भी है कि आजकल ठग पढ़े-लिखे और प्रोफेशनल तरीके से अपराध कर रहे हैं। सिर्फ डिग्री या व्यक्तित्व देखकर किसी पर भरोसा करना खतरनाक हो सकता है।
लोगों को चाहिए कि:
नौकरी के नाम पर किसी को पैसे न दें
सरकारी भर्ती प्रक्रिया की जानकारी आधिकारिक वेबसाइट से ही लें
किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें
In a shocking case from Bareilly, Uttar Pradesh, three highly educated sisters were arrested for posing as IAS officers and running a job scam worth ₹55 lakh. The accused used fake documents, luxury vehicles, and professional communication to deceive victims seeking government jobs. The UP Police investigation revealed multiple bank accounts, forged credentials, and a well-organized fraud network. This case highlights the growing trend of job scams in India and raises concerns about verification in recruitment processes.


















