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गाजियाबाद ABES कॉलेज में बड़ा हादसा टला, गर्ल्स हॉस्टल पानी में डूबा, छात्राओं ने मुश्किल से बचाई जान!

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Ghaziabad ABES College Girls Hostel Flooded, Major Tragedy Averted

गाजियाबाद ABES कॉलेज में बड़ा हादसा टला, गर्ल्स हॉस्टल पानी में डूबा, छात्राओं ने मुश्किल से बचाई जान

AIN NEWS 1: गाजियाबाद जिले में स्थित ABES इंजीनियरिंग कॉलेज में बुधवार की रात बड़ा हादसा होते-होते टल गया। भारी बारिश के कारण कॉलेज के गर्ल्स हॉस्टल की बेसमेंट में पानी भर गया, जिससे वहां रह रही छात्राओं की जान पर बन आई। छात्राओं ने हिम्मत दिखाते हुए किसी तरह बाहर निकलकर अपनी जान बचाई। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने स्थानीय प्रशासन और कॉलेज प्रबंधन की लापरवाही को उजागर कर दिया है।

कैसे हुआ हादसा?

बुधवार को अचानक हुई तेज बारिश के बाद ABES कॉलेज के गर्ल्स हॉस्टल की बेसमेंट में पानी भरना शुरू हो गया। हॉस्टल का यह हिस्सा निचले स्तर पर बना हुआ है, जहां छात्राओं के कमरे और स्टोर रूम स्थित हैं। बारिश के कुछ ही मिनटों में पानी इतनी तेजी से अंदर आने लगा कि छात्राओं को अपनी सुरक्षा के लिए तुरंत बाहर भागना पड़ा। कई छात्राओं के कपड़े, किताबें, मोबाइल फोन और लैपटॉप तक पानी में डूब गए।

छात्राओं का भय और संघर्ष

घटना के दौरान हॉस्टल में मौजूद छात्राओं ने बताया कि पानी अचानक इतनी तेजी से आया कि कुछ समझ ही नहीं आया। कई लड़कियां डर के मारे रोने लगीं। उनके अनुसार, अगर पानी और तेज़ी से भरता तो शायद स्थिति गंभीर हो सकती थी। उन्होंने प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा, “इतना बड़ा कॉलेज है, लेकिन जलभराव की कोई सही व्यवस्था नहीं की गई। दिल्ली में हाल ही में हुए हादसों के बावजूद कॉलेज प्रबंधन ने सबक नहीं लिया।”

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल

हादसे का वीडियो किसी छात्रा ने रिकॉर्ड किया और सोशल मीडिया पर डाल दिया। वीडियो में देखा जा सकता है कि हॉस्टल के कॉरिडोर और कमरों में पानी भर चुका था, जिससे छात्राओं को घुटनों तक पानी में चलकर बाहर निकलना पड़ा। यह वीडियो वायरल होने के बाद कई लोगों ने गाजियाबाद प्रशासन और कॉलेज प्रबंधन को जिम्मेदार ठहराया और कार्रवाई की मांग की।

कॉलेज प्रबंधन और प्रशासन का बयान

घटना के बाद कॉलेज प्रबंधन ने बयान जारी कर कहा कि छात्राओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रबंधन ने दावा किया कि जैसे ही पानी भरने की जानकारी मिली, स्टाफ मौके पर पहुंच गया और छात्राओं को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। पानी निकासी के लिए तुरंत पंप लगाए गए। वहीं, जिला प्रशासन ने भी मामले का संज्ञान लेते हुए तकनीकी टीम को जांच के लिए भेजा।

दिल्ली हादसे से क्यों नहीं सीखा?

दिल्ली में हाल ही में एक इमारत में जलभराव और शॉर्ट सर्किट से हुई दुर्घटना में कई लोगों की जान चली गई थी। उस घटना के बाद उम्मीद थी कि शैक्षणिक संस्थान और हॉस्टल सुरक्षा के प्रति अधिक सतर्क होंगे। लेकिन ABES कॉलेज में हुई यह घटना दर्शाती है कि लापरवाही अब भी जारी है। अगर प्रशासन ने समय रहते तैयारी की होती तो छात्राओं की जान जोखिम में नहीं पड़ती।

छात्राओं की अपील

घटना के बाद छात्राओं ने प्रबंधन से लिखित में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने मांग की है कि बेसमेंट की जल निकासी व्यवस्था सुधारी जाए, बिजली का पूरा सिस्टम सुरक्षित बनाया जाए और आपातकालीन निकास (Emergency Exit) के लिए विशेष इंतजाम किए जाएं। उनका कहना है कि यह हादसा टल गया, लेकिन भविष्य में ऐसा न हो, इसके लिए पुख्ता कदम उठाए जाने जरूरी हैं।

लोगों की प्रतिक्रिया

स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया यूजर्स ने इस घटना पर गुस्सा जाहिर किया। एक यूजर ने लिखा, “दिल्ली हादसे से कुछ नहीं सीखा, अब गाजियाबाद में भी हादसे का इंतजार हो रहा था।” वहीं, कुछ ने यह भी कहा कि इस तरह की घटनाएं छात्रों और उनके माता-पिता के लिए चिंता का विषय बन गई हैं।

आगे क्या?

अब देखना यह है कि कॉलेज प्रबंधन और प्रशासन इस घटना से क्या सबक लेते हैं। क्या वे हॉस्टल और अन्य इमारतों में जलभराव रोकने के लिए नई तकनीक का इस्तेमाल करेंगे? क्या छात्राओं की सुरक्षा के लिए विशेष प्रोटोकॉल बनाए जाएंगे? इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में मिलेंगे। फिलहाल, छात्राएं डरी हुई हैं और प्रबंधन से जल्द कार्रवाई की उम्मीद कर रही हैं।

The ABES College girls hostel flood incident in Ghaziabad has raised serious safety concerns. Due to heavy rain, waterlogged areas in the hostel basement forced students to evacuate and save their lives. This incident, happening soon after the Delhi tragedy, highlights administrative negligence and the urgent need for improved safety measures in educational institutions and hostels. Keywords like Ghaziabad news, ABES College, hostel flood, student safety, Delhi tragedy, administrative negligence are crucial for spreading awareness about such safety lapses.

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