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गाजियाबाद मोदीनगर तहसील में सेंधमारी! रजिस्ट्री फाइलें लापता, जनता परेशान – पुलिस जांच शुरू

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AIN NEWS 1 | गाजियाबाद की मोदीनगर तहसील में उस समय हड़कंप मच गया जब सोमवार सुबह कर्मचारियों ने कार्यालय की दीवार टूटी हुई पाई। जांच में पता चला कि अज्ञात लोगों ने रात के समय तहसील की दीवार तोड़कर अंदर प्रवेश किया और रजिस्ट्री व प्रॉपर्टी से जुड़ी कई अहम फाइलें गायब कर दीं।

 कैसे हुआ मामला?

सुबह जब कर्मचारी ड्यूटी पर पहुंचे तो उन्होंने देखा कि कार्यालय की दीवार में बड़ा छेद बना हुआ है। फाइलों की गिनती करने पर सामने आया कि करोड़ों रुपये की प्रॉपर्टी से जुड़ी कई रजिस्ट्री और विवादित जमीन-जायदाद से संबंधित दस्तावेज गायब हैं।

 फाइलों की अहमियत

तहसील में रखी जाने वाली ये फाइलें बेहद महत्वपूर्ण होती हैं। इनमें रजिस्ट्री, जमीन के रिकॉर्ड, संपत्ति विवाद और स्टाम्प ड्यूटी से जुड़ी जानकारी रहती है। इन दस्तावेजों के गायब होने से कई प्रॉपर्टी मालिक कानूनी परेशानी में फंस सकते हैं।

 प्रॉपर्टी डीलरों की प्रतिक्रिया

स्थानीय प्रॉपर्टी डीलर संजय त्यागी ने कहा –
“यह कोई आम चोरी नहीं है। जिन फाइलों को गायब किया गया है, वे वही थीं जिन पर पहले से विवाद चल रहा था। यह साफतौर पर अंदरूनी मिलीभगत का मामला लगता है।”

 वकीलों की चिंता

वरिष्ठ अधिवक्ता सीमा जैन ने कहा –
“इन फाइलों के गायब होने से कोर्ट में चल रहे कई मुकदमों पर असर पड़ सकता है। अगर दस्तावेज समय पर बरामद नहीं हुए तो आम जनता को गंभीर परेशानी झेलनी पड़ सकती है।”

पुलिस की जांच

घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और तहसील का निरीक्षण किया। अधिकारियों के अनुसार, सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है। हालांकि अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। शुरुआती जांच में यह संदेह जताया गया है कि घटना को अंजाम देने वालों को तहसील की अंदरूनी जानकारी थी।

 जनता में गुस्सा

स्थानीय निवासी राजीव शर्मा ने कहा –
“हम अपनी जिंदगी भर की कमाई लगाकर प्रॉपर्टी खरीदते हैं और उसके कागज तहसील में सुरक्षित मानते हैं। अगर वहीं से फाइलें गायब हो जाएं तो आम आदमी कहां जाएगा?”

वहीं सुनीता देवी ने चिंता जताई –
“मेरे बेटे की रजिस्ट्री तहसील में पड़ी थी। अब हमें डर है कि कहीं वो फाइल भी गायब न हो गई हो।”

 अधिकारियों का रवैया

मीडिया के सवालों पर तहसील अधिकारियों ने कहा कि “सभी फाइलें सुरक्षित हैं और कोई बड़ी गड़बड़ी नहीं हुई है।” लेकिन कर्मचारियों के अनुसार, अधिकारियों के दबाव में सच्चाई दबाई जा रही है।

 उठते सवाल

यह घटना कई गंभीर सवाल खड़े करती है –

  • तहसील परिसर की सुरक्षा इतनी कमजोर क्यों थी?

  • क्या इसमें किसी कर्मचारी की मिलीभगत है?

  • गायब हुई फाइलें सिर्फ विवादित प्रॉपर्टी की ही क्यों हैं?

  • क्या यह किसी बड़े प्रॉपर्टी घोटाले की शुरुआत है?

आगे की उम्मीदें

फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। स्थानीय लोग चाहते हैं कि इस मामले को दबाया न जाए और दोषियों को सख्त सजा मिले। अगर जल्द ही दस्तावेज बरामद नहीं हुए तो हजारों परिवारों के लिए यह घटना जीवनभर की परेशानी बन सकती है।

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