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गुरमीत राम रहीम को फिर मिली 30 दिन की पैरोल, 16वीं बार जेल से बाहर आया डेरा प्रमुख!

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AIN NEWS 1: डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह एक बार फिर जेल से बाहर आ गया है। हरियाणा सरकार ने उसे 30 दिन की पैरोल मंजूर की है। साल 2020 के बाद यह 16वीं बार है जब राम रहीम को पैरोल या फरलो के जरिए अस्थायी राहत मिली है। उसकी रिहाई को लेकर एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है।

राम रहीम फिलहाल रोहतक की सुनारिया जेल में सजा काट रहा है। जेल से बाहर आने के बाद उसे सुरक्षा व्यवस्था के बीच यूपी के बागपत स्थित डेरा आश्रम ले जाया गया। हर बार की तरह इस बार भी प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए।

क्या है पूरा मामला?

गुरमीत राम रहीम को साध्वियों से दुष्कर्म और पत्रकार छत्रपति हत्याकांड समेत कई मामलों में दोषी ठहराया जा चुका है। वर्ष 2017 में सीबीआई अदालत ने उसे रेप केस में 20 साल की सजा सुनाई थी। इसके बाद 2019 में पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्या मामले में भी उसे दोषी माना गया।

इन गंभीर मामलों में सजा काटने के बावजूद राम रहीम को लगातार पैरोल और फरलो मिलने पर विपक्षी दल और कई सामाजिक संगठन सवाल उठाते रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि आम कैदियों की तुलना में उसे ज्यादा राहत मिलती है।

16वीं बार मिली राहत

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 2020 के बाद से राम रहीम को अब तक कई बार पैरोल और फरलो दी जा चुकी है। इनमें कभी 21 दिन, कभी 30 दिन तो कभी 40 दिन की अस्थायी रिहाई शामिल रही है।

जनवरी 2026 में भी उसे 40 दिन की पैरोल मिली थी। अब मई 2026 में फिर 30 दिन की राहत मिलने के बाद विपक्ष सरकार पर हमलावर हो गया है।

हालांकि सरकार का कहना है कि पैरोल कानूनी प्रक्रिया के तहत दी जाती है और इसके लिए जेल नियमों का पालन किया जाता है।

पैरोल और फरलो में क्या अंतर है?

कई लोग पैरोल और फरलो को एक ही मानते हैं, लेकिन दोनों अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं।

पैरोल विशेष परिस्थितियों में दी जाती है, जैसे पारिवारिक कारण, स्वास्थ्य या अन्य जरूरी परिस्थितियां।

फरलो अच्छे आचरण के आधार पर दी जाने वाली अस्थायी छुट्टी होती है।

राम रहीम को अब तक दोनों प्रकार की राहत मिल चुकी है। इसी वजह से कुछ रिपोर्ट्स इसे “16वीं पैरोल” बता रही हैं, जबकि तकनीकी रूप से इसमें फरलो भी शामिल है।

राजनीतिक गलियारों में बढ़ी हलचल

राम रहीम की रिहाई का मामला अक्सर राजनीति से जोड़कर देखा जाता है। खासतौर पर हरियाणा और पंजाब चुनावों के दौरान उसकी पैरोल चर्चा का विषय बनती रही है।

विपक्षी नेताओं का आरोप है कि चुनावी माहौल में डेरा समर्थकों को प्रभावित करने के लिए सरकारें इस तरह के फैसले लेती हैं। हालांकि सरकार हर बार इन आरोपों से इनकार करती रही है।

डेरा सच्चा सौदा का पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और पश्चिमी यूपी के कई इलाकों में बड़ा प्रभाव माना जाता है। लाखों की संख्या में उसके अनुयायी हैं। ऐसे में राम रहीम की रिहाई हमेशा राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन जाती है।

प्रशासन अलर्ट मोड पर

राम रहीम की रिहाई के बाद प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया। सुरक्षा एजेंसियों ने उसके मूवमेंट पर नजर रखी। बागपत आश्रम के आसपास भी पुलिस बल तैनात किया गया।

प्रशासन नहीं चाहता कि किसी तरह की कानून व्यवस्था की स्थिति पैदा हो। साल 2017 में राम रहीम को सजा सुनाए जाने के बाद हरियाणा और पंजाब में बड़े स्तर पर हिंसा हुई थी, जिसमें कई लोगों की मौत हुई थी। इसी अनुभव को देखते हुए सरकार और पुलिस इस बार कोई जोखिम नहीं लेना चाहती।

सोशल मीडिया पर भी छिड़ी बहस

राम रहीम को लगातार पैरोल मिलने का मुद्दा सोशल मीडिया पर भी ट्रेंड कर रहा है। कई लोग सवाल उठा रहे हैं कि गंभीर अपराधों में सजा काट रहे व्यक्ति को इतनी बार राहत कैसे मिल रही है।

वहीं उसके समर्थक इसे कानूनी अधिकार बता रहे हैं। उनका कहना है कि जेल नियमों के तहत हर कैदी को पैरोल और फरलो का अधिकार होता है।

डेरा समर्थकों में खुशी

राम रहीम की रिहाई की खबर सामने आते ही डेरा समर्थकों में खुशी का माहौल देखने को मिला। कई अनुयायियों ने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर कर खुशी जाहिर की।

हालांकि प्रशासन ने समर्थकों को बड़ी भीड़ जुटाने की अनुमति नहीं दी है। सुरक्षा कारणों से डेरा गतिविधियों पर भी नजर रखी जा रही है।

आगे क्या?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भविष्य में भी राम रहीम को इसी तरह नियमित रूप से पैरोल मिलती रहेगी। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक जेल नियमों के तहत पात्रता बनी रहती है, तब तक किसी भी कैदी को राहत दी जा सकती है।

लेकिन दूसरी ओर यह मामला संवेदनशील बना हुआ है क्योंकि इसमें गंभीर अपराध और राजनीतिक आरोप दोनों जुड़े हुए हैं। इसलिए हर बार उसकी रिहाई राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन जाती है।

फिलहाल गुरमीत राम रहीम 30 दिन तक जेल से बाहर रहेगा। इसके बाद उसे तय समय पर वापस सुनारिया जेल में सरेंडर करना होगा।

Dera Sacha Sauda chief Gurmeet Ram Rahim has once again been granted 30 days parole, marking his 16th temporary release from jail since 2020. The latest parole granted by the Haryana government has sparked political debate and public discussion across India. Ram Rahim, who is serving a prison sentence in Rohtak’s Sunaria Jail, has frequently received parole and furlough in recent years. Read the complete update on Gurmeet Ram Rahim parole news, legal background, political reactions, and Dera Sacha Sauda latest developments.

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