AIN NEWS 1: मोबाइल फोन आज सिर्फ बातचीत का साधन नहीं रह गया है। बैंकिंग, UPI, जरूरी दस्तावेज, निजी तस्वीरें और कई महत्वपूर्ण जानकारियां भी इसी छोटे से डिवाइस में मौजूद रहती हैं। ऐसे में अगर फोन चोरी हो जाए तो नुकसान केवल मोबाइल तक सीमित नहीं रहता। हैदराबाद पुलिस ने एक ऐसे नए और खतरनाक तरीके के साइबर अपराध को लेकर चेतावनी जारी की है, जिसमें पहले मोबाइल चोरी किया जाता है और फिर उसी फोन की मदद से बैंक खाते तक पहुंच बनाने की कोशिश की जाती है। पुलिस ने इस तरीके को ‘हाइब्रिड साइबर फ्रॉड’ बताया है।
क्या है हाइब्रिड साइबर फ्रॉड?
सामान्य तौर पर साइबर फ्रॉड में ठग फोन कॉल, लिंक, फर्जी वेबसाइट या सोशल मीडिया के जरिए लोगों को निशाना बनाते हैं। लेकिन हाइब्रिड साइबर फ्रॉड में अपराध का पहला कदम डिजिटल नहीं, बल्कि मोबाइल चोरी होता है।
हैदराबाद पुलिस के मुताबिक, इस तरह के गिरोह भीड़भाड़ वाली जगहों, बसों, बस स्टैंड, रेलवे प्लेटफॉर्म और व्यस्त चौराहों पर ऐसे लोगों को तलाशते हैं, जिन्हें मोबाइल इस्तेमाल करते समय आसानी से देखा जा सके। खासकर बुजुर्ग, रोजाना सफर करने वाले और तकनीकी जानकारी कम रखने वाले लोग इनके निशाने पर हो सकते हैं।

पुलिस के अनुसार, गिरोह के सदस्य पहले यह देखने की कोशिश करते हैं कि व्यक्ति मोबाइल का लॉक कैसे खोल रहा है। इसे आम भाषा में ‘शोल्डर सर्फिंग’ कहा जाता है। यानी आपके पीछे या बगल में खड़ा व्यक्ति चुपचाप आपका PIN, पैटर्न या पासवर्ड देख लेता है।
इसके बाद मौका मिलते ही ध्यान भटकाकर मोबाइल फोन जेब या बैग से निकाल लिया जाता है।
फोन चोरी के बाद शुरू होता है असली खेल
अगर अपराधियों ने मोबाइल का PIN पहले ही देख लिया है, तो उनके लिए चोरी किया गया फोन खोलना आसान हो सकता है। लेकिन अगर उन्हें PIN नहीं पता चला, तो पुलिस के अनुसार गिरोह एक और चाल चल सकता है।
फोन चोरी होने के बाद परेशान व्यक्ति स्वाभाविक रूप से अपने नंबर पर कॉल करता है। यहीं से ठग सोशल इंजीनियरिंग का इस्तेमाल करते हैं।
फोन उठाने वाला व्यक्ति खुद को बस कंडक्टर, ड्राइवर या कोई मददगार व्यक्ति बताकर कह सकता है कि आपका फोन उसे मिला है। वह यह भी कह सकता है कि वह अगले बस स्टॉप पर फोन लौटा देगा।
इसके बाद कथित ठग फोन के मालिक से कह सकता है कि पहचान की पुष्टि करने के लिए स्क्रीन लॉक PIN बताना होगा। कभी-कभी यह भी कहा जा सकता है कि किसी दूसरे व्यक्ति ने फोन पर अपना दावा किया है और असली मालिक की पहचान के लिए PIN चाहिए।
यही वह क्षण है जब पीड़ित अपनी परेशानी में आकर सबसे बड़ी गलती कर सकता है।
फोन वापस पाने के नाम पर कभी भी स्क्रीन लॉक PIN, बैंकिंग पासवर्ड, UPI PIN या OTP किसी को न बताएं।
मोबाइल में सेव जानकारी बन सकती है बड़ा खतरा
हैदराबाद पुलिस के मुताबिक, फोन का लॉक खुलने के बाद अपराधी उसमें मौजूद कई तरह की संवेदनशील जानकारी तलाश सकते हैं।
कई लोग सुविधा के लिए अपने डेबिट या क्रेडिट कार्ड की तस्वीर, CVV, आधार कार्ड, PAN कार्ड, बैंक पासबुक या दूसरे दस्तावेजों की फोटो मोबाइल की गैलरी में रखते हैं। कुछ लोग PIN और पासवर्ड तक Notes ऐप में लिखकर रखते हैं।
ऐसी जानकारी गलत हाथों में पहुंचने पर ठगों को बैंकिंग धोखाधड़ी करने में मदद मिल सकती है।
यानी खतरा सिर्फ फोन के अंदर मौजूद बैंकिंग ऐप से नहीं है। फोन में रखी हुई एक फोटो या नोट भी अपराधियों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी बन सकता है।
SIM कार्ड भी बन सकता है हथियार
हाइब्रिड फ्रॉड को खतरनाक बनाने वाली एक बड़ी वजह यह है कि चोरी हुए मोबाइल के साथ पीड़ित का सक्रिय SIM कार्ड भी अपराधियों के कब्जे में आ सकता है।
पुलिस के अनुसार, ऐसी स्थिति में अपराधी SMS के जरिए आने वाले verification codes और OTP का फायदा उठाकर UPI या मोबाइल बैंकिंग से जुड़े credentials को reset करने की कोशिश कर सकते हैं।
इसके बाद बैंक खाते, UPI और दूसरी वित्तीय सेवाओं से अनधिकृत लेनदेन का खतरा बढ़ जाता है। पुलिस ने चेताया है कि कुछ मामलों में बैंक बैलेंस के साथ-साथ जमा रकम और जुड़े हुए credit facilities को भी निशाना बनाया जा सकता है।
तीन आरोपी गिरफ्तार, 20 लाख रुपये से ज्यादा की ठगी का आरोप
हैदराबाद पुलिस ने इस मामले में एक अंतरराज्यीय गिरोह के तीन प्रमुख सदस्यों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से पांच मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं।
प्रारंभिक जांच के अनुसार, इस गिरोह ने कथित तौर पर पीड़ितों से 20 लाख रुपये से अधिक की धोखाधड़ी की है। पुलिस का कहना है कि यह कोई सामान्य जेबकतरी का मामला नहीं था, बल्कि अलग-अलग भूमिकाओं में काम करने वाला संगठित नेटवर्क था।
पुलिस के मुताबिक, गिरोह में अलग-अलग लोग लक्ष्य तलाशने, मोबाइल चोरी करने, फोन करके PIN हासिल करने, तकनीकी तरीके से बैंकिंग जानकारी का इस्तेमाल करने और कथित तौर पर पैसे को दूसरे खातों तक पहुंचाने का काम करते थे।
ठगी के पैसे को छिपाने की भी कोशिश
जांच में पुलिस को कथित तौर पर यह भी पता चला कि ठगी की रकम को सीधे अपराधियों के व्यक्तिगत बैंक खातों में रखने के बजाय अलग-अलग माध्यमों से आगे भेजने की कोशिश की जाती थी।
पुलिस के अनुसार, रकम को ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म, डिजिटल वॉलेट और कथित ‘म्यूल अकाउंट’ के नेटवर्क के जरिए घुमाने के बाद ATM से निकालने की कोशिश की जाती थी। इसका उद्देश्य पैसों के डिजिटल ट्रेल को जटिल बनाना और जांच एजेंसियों से बचना बताया गया है।
फोन चोरी हो जाए तो तुरंत क्या करें?
फोन चोरी या गुम होने के बाद सबसे जरूरी बात है कि घबराने के बजाय तुरंत कार्रवाई की जाए। कुछ मिनटों की देरी भी नुकसान बढ़ा सकती है।
पहला कदम: अपने मोबाइल नेटवर्क ऑपरेटर से संपर्क करके SIM को तुरंत ब्लॉक कराएं।
दूसरा कदम: बैंक से संपर्क कर मोबाइल बैंकिंग और UPI सेवाओं को अस्थायी रूप से बंद या सुरक्षित कराएं। जरूरत पड़ने पर कार्ड और दूसरे वित्तीय माध्यम भी ब्लॉक कराएं।
तीसरा कदम: फोन का IMEI नंबर उपलब्ध हो तो उसे सरकार के CEIR पोर्टल के जरिए ब्लॉक कराने की प्रक्रिया पूरी करें।
चौथा कदम: अगर खाते से कोई अनधिकृत रकम निकल गई है तो तुरंत 1930 पर कॉल करें। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज की जा सकती है।
राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 चौबीसों घंटे उपलब्ध है। वित्तीय साइबर फ्रॉड की स्थिति में जल्द रिपोर्ट करने से संबंधित बैंकिंग संस्थानों तक सूचना पहुंचाने और रकम को रोकने की कार्रवाई में मदद मिल सकती है।
इन गलतियों से बचें
मोबाइल चोरी से बचना जरूरी है, लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी है कि मोबाइल चोरी होने पर अपराधियों को अतिरिक्त जानकारी न मिले।
सार्वजनिक जगह पर मोबाइल का PIN या पैटर्न डालते समय आसपास जरूर देखें।
PIN किसी व्यक्ति को फोन पर न बताएं।
फोन लौटाने का दावा करने वाले व्यक्ति को भी स्क्रीन लॉक पासवर्ड न दें।
UPI PIN और बैंकिंग पासवर्ड कभी साझा न करें।
OTP किसी के साथ साझा न करें।
डेबिट/क्रेडिट कार्ड और CVV की तस्वीर मोबाइल में रखने से बचें।
आधार, PAN और बैंक पासबुक की कॉपी जरूरत न हो तो फोन की गैलरी या Notes में न रखें।
बैंकिंग ऐप में उपलब्ध अतिरिक्त सुरक्षा सुविधाओं का इस्तेमाल करें।
फोन चोरी होने पर पहले SIM और बैंकिंग सेवाओं को सुरक्षित करें, उसके बाद बाकी कार्रवाई करें।
बुजुर्गों को खास तौर पर सावधान रहने की जरूरत
हैदराबाद पुलिस ने परिवार के युवाओं से यह भी अपील की है कि वे अपने बुजुर्ग परिजनों को इस तरह के फ्रॉड के बारे में समझाएं। सार्वजनिक परिवहन में मोबाइल इस्तेमाल करते समय PIN को दूसरों की नजर से बचाना और फोन खोने के बाद किसी अजनबी पर भरोसा न करना बेहद जरूरी है।
दरअसल, इस पूरे मामले से सबसे बड़ी सीख यही है कि मोबाइल फोन अब आपकी डिजिटल पहचान और बैंकिंग का अहम हिस्सा है। इसलिए फोन की सुरक्षा को केवल डिवाइस की सुरक्षा न समझें।
अगर कभी कोई व्यक्ति फोन वापस करने के नाम पर आपसे स्क्रीन लॉक PIN मांगता है, तो उसे बिल्कुल न बताएं। फोन वापस मिलना जरूरी है, लेकिन बैंक खाता बचाना उससे कहीं ज्यादा जरूरी है।
डिस्क्लेमर: यह खबर हैदराबाद पुलिस की ओर से सामने आई चेतावनी और उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर तैयार की गई है। किसी भी साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में तुरंत अपने बैंक/टेलीकॉम सेवा प्रदाता से संपर्क करें और 1930 या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें।
Hybrid Cyber Fraud is an emerging cybercrime method in which criminals combine mobile phone theft with social engineering and digital banking fraud. Hyderabad Police has warned that fraudsters may observe screen-lock PINs, steal smartphones and then trick victims into revealing passwords by pretending to be bus conductors or people who found the lost phone. Criminals may also misuse sensitive information stored in phone galleries, notes, WhatsApp and banking applications. Victims should immediately block their SIM, contact their bank, secure UPI services, block the stolen device through CEIR and report financial fraud on 1930 or the National Cyber Crime Reporting Portal.



















