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महंगाई की नई मार: आटा, दाल, तेल से लेकर रोजमर्रा के सामान तक महंगे, RBI सर्वे में भी बढ़ी लोगों की चिंता

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महंगाई की नई मार: आटा, दाल, तेल से लेकर रोजमर्रा के सामान तक महंगे, RBI सर्वे में भी बढ़ी लोगों की चिंता

AIN NEWS 1 नई दिल्ली। देश में बढ़ती महंगाई ने आम लोगों की जेब पर एक बार फिर बड़ा असर डालना शुरू कर दिया है। रसोई में इस्तेमाल होने वाले आटा, दाल, चावल, खाद्य तेल, चीनी और मसालों जैसी जरूरी वस्तुओं की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। इसके साथ ही टूथपेस्ट, साबुन, डिटर्जेंट, हेयर ऑयल और पैकेज्ड फूड जैसे रोजमर्रा के एफएमसीजी (FMCG) उत्पाद भी पहले की तुलना में महंगे हो गए हैं। परिणामस्वरूप मध्यम वर्ग और निम्न आय वाले परिवारों के लिए मासिक बजट संभालना पहले से अधिक कठिन होता जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक परिस्थितियों, कच्चे तेल की कीमतों, आयात लागत, कमजोर मानसून और बढ़ती परिवहन लागत का संयुक्त असर बाजार में दिखाई दे रहा है। दूसरी ओर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के हालिया सर्वेक्षण ने भी संकेत दिया है कि महंगाई और रोजगार को लेकर लोगों की चिंता पहले से बढ़ गई है।

क्यों बढ़ रही है महंगाई?

आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार मौजूदा महंगाई केवल घरेलू कारणों से नहीं, बल्कि वैश्विक परिस्थितियों का भी परिणाम है। मध्य-पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और कई आयातित वस्तुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। इसका सीधा असर भारत में परिवहन, पैकेजिंग और उत्पादन लागत पर पड़ा।

इसके अलावा खाद्य तेल, मसाले और कई कृषि उत्पादों के आयात की लागत बढ़ने से खुदरा बाजार में इनके दाम ऊपर चले गए। पैकेजिंग सामग्री, प्लास्टिक और पेट्रोकेमिकल आधारित उत्पादों की कीमतों में वृद्धि ने भी एफएमसीजी कंपनियों की लागत बढ़ाई, जिसका असर उपभोक्ताओं पर पड़ा।

कमजोर मानसून भी बना बड़ी वजह

इस वर्ष कई क्षेत्रों में मानसून की रफ्तार सामान्य से कमजोर रहने की आशंका जताई गई है। यदि वर्षा सामान्य से कम रहती है तो दाल, तिलहन और मसालों जैसी फसलों का उत्पादन प्रभावित हो सकता है। ऐसे में बाजार में आपूर्ति घटने और कीमतें बढ़ने की संभावना बनी रहती है।

कृषि बाजार के जानकारों का कहना है कि भविष्य में बेहतर कीमत मिलने की उम्मीद में कुछ किसान अपनी उपज को तुरंत बेचने के बजाय रोककर भी रख रहे हैं। हालांकि इसका प्रभाव अलग-अलग राज्यों और फसलों के अनुसार अलग हो सकता है।

किन-किन वस्तुओं के बढ़े दाम?

पिछले कुछ महीनों में आवश्यक खाद्य वस्तुओं और घरेलू उपयोग के सामान की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। बाजार में आटा, चावल, दाल, चीनी और सरसों तेल की कीमतों में पहले की तुलना में वृद्धि देखी जा रही है।

इसी तरह साबुन, टूथपेस्ट, फेस वॉश, डिटर्जेंट पाउडर, हेयर ऑयल, अगरबत्ती, पैकेज्ड जूस और बच्चों के डायपर जैसे कई उपभोक्ता उत्पाद भी महंगे हुए हैं। हालांकि इनकी वास्तविक कीमतें शहर, राज्य, ब्रांड और स्थानीय बाजार के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं।

कंपनियों ने क्यों बढ़ाए दाम?

एफएमसीजी कंपनियों का कहना है कि उत्पादन लागत में लगातार बढ़ोतरी के कारण कीमतों में संशोधन करना पड़ा है। प्रमुख कारणों में शामिल हैं—

अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद्य तेल की कीमतों में तेजी।

पैकेजिंग सामग्री और कच्चे माल की लागत बढ़ना।

डीजल और ईंधन की वजह से परिवहन खर्च बढ़ना।

लॉजिस्टिक्स लागत में इजाफा।

त्योहारी सीजन से पहले कंपनियों द्वारा मूल्य संशोधन।

इन सभी कारणों का असर अंततः उपभोक्ताओं पर दिखाई दे रहा है।

गृहिणियों का बिगड़ रहा बजट

महंगाई का सबसे बड़ा असर घर का मासिक बजट संभालने वाली गृहिणियों पर पड़ रहा है। कई परिवारों का कहना है कि छह महीने पहले जिस बजट में महीनेभर का राशन आ जाता था, अब उसी सामान के लिए हजारों रुपये अधिक खर्च करने पड़ रहे हैं।

दिल्ली की एक गृहिणी का कहना है कि रसोई गैस, दूध, आटा, दाल, तेल और चीनी जैसी हर जरूरी वस्तु महंगी हो गई है। खर्च को नियंत्रित करने के लिए परिवार को कुछ वस्तुओं की खरीद कम करनी पड़ रही है। विशेष रूप से खाद्य तेल की खपत घटाई गई है ताकि बजट संतुलित रखा जा सके।

नौकरीपेशा लोगों की भी बढ़ी चिंता

महंगाई का असर केवल रसोई तक सीमित नहीं है। नौकरीपेशा लोगों का कहना है कि बच्चों की पढ़ाई, दवाइयों, बिजली, ईंधन और रोजमर्रा के खर्च में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। पहले जहां हर महीने कुछ राशि बचत के रूप में निकल जाती थी, अब अधिकांश आय घरेलू खर्चों में ही समाप्त हो रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आय की गति महंगाई के बराबर नहीं बढ़ती, तो मध्यम वर्ग की बचत पर सबसे अधिक दबाव पड़ता है।

RBI सर्वे में सामने आई चिंता

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी उपभोक्ता विश्वास सर्वेक्षण में भी महंगाई को लेकर लोगों की चिंता स्पष्ट रूप से सामने आई है। सर्वे में देश के शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के हजारों परिवारों से राय ली गई।

सर्वे के अनुसार अधिकांश लोगों का मानना है कि महंगाई अभी भी सबसे बड़ी आर्थिक चुनौती बनी हुई है। बड़ी संख्या में उत्तरदाताओं ने यह भी माना कि आने वाले एक वर्ष तक कीमतों पर दबाव बना रह सकता है।

रोजगार को लेकर भी लोगों की चिंता बढ़ी है। कई परिवारों ने रोजगार के अवसरों और आर्थिक स्थिति को लेकर पहले की तुलना में अधिक सतर्क रुख अपनाया है। ग्रामीण क्षेत्रों में कुछ परिवारों ने आय में कमी महसूस होने की बात भी कही।

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राहत की भी कुछ उम्मीद

हालांकि सर्वे में एक सकारात्मक संकेत भी मिला है। कई लोगों को उम्मीद है कि आने वाले समय में उनकी आय में सुधार हो सकता है। आवश्यक वस्तुओं पर खर्च अभी भी जारी है और गैर-जरूरी वस्तुओं की खरीदारी को लेकर भी लोगों का भरोसा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

इससे संकेत मिलता है कि आर्थिक चुनौतियों के बावजूद भारतीय उपभोक्ता बाजार पूरी तरह कमजोर नहीं पड़ा है।

सरकार और RBI की नजर

भारतीय रिजर्व बैंक ने हाल ही में रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखा है। केंद्रीय बैंक का कहना है कि फिलहाल महंगाई पहले की तुलना में नियंत्रित है, लेकिन वैश्विक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और कमजोर मानसून भविष्य में जोखिम पैदा कर सकते हैं।

सरकार भी खाद्य वस्तुओं की उपलब्धता बनाए रखने, आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर निगरानी रखने और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के लिए लगातार समीक्षा कर रही है।

महंगाई का असर अब लगभग हर परिवार महसूस कर रहा है। रसोई का खर्च बढ़ने के साथ-साथ दैनिक उपयोग की वस्तुएं भी महंगी होती जा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक परिस्थितियां सामान्य होती हैं और मानसून बेहतर रहता है तो आने वाले महीनों में कुछ राहत मिल सकती है। फिलहाल आम लोगों को खर्चों की प्राथमिकता तय कर बजट का संतुलन बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।

India is witnessing a significant rise in food prices, FMCG product costs, and household expenses, putting pressure on family budgets across the country. Rising inflation in India, increasing cooking oil prices, higher wheat flour, rice, dal, and sugar prices, along with growing logistics and packaging costs, have impacted consumers. According to the latest RBI Consumer Confidence Survey, concerns over inflation, employment, and the Indian economy have increased, while global geopolitical tensions and weak monsoon forecasts continue to influence retail prices and consumer spending. This comprehensive India inflation update explains the reasons behind rising prices and their impact on everyday households.

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